पानी का प्रेशर नहीं झेल पा रही बदहाल लाइनें, बदलने में नाकाम अफसर

पानी का प्रेशर नहीं झेल पा रही बदहाल लाइनें, बदलने में नाकाम अफसर
पानी का प्रेशर नहीं झेल पा रही बदहाल लाइनें, बदलने में नाकाम अफसर

Bhavnesh Gupta | Updated: 09 Oct 2019, 07:35:28 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

-20 से 25 वर्ष पुरानी लाइनें दे रही जवाब

-बड़ी चौपड़ से गुजर रही लाइनें भी हो रही जर्जर

-अमृत योजना के तहत नम्बर आने की बाट जोह रहे

 


जयपुर। चारदीवारी में पेयजल लाइन टूटने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। लाइनें इतनी बदहाल है कि पानी का प्रेशर तक नहीं झेल पा रही हैं। बड़ी चौपड़ से गुजर रही 10 इंच की पेयजल लाइन भी इसी कारण टूटी। इससे लाखों लीटर पेयजल सड़क पर बह गया। हालांकि, जलदाय विभाग ने बुधवार दोपहर बाद इसे सुधार दिया और शाम को क्षेत्र में सप्लाई शुरू कर दी। हालांकि, इससे विभाग की कार्यशैली की पोल खुल गई। बताया जा रहा है कास्ट आयरन से यह लाइन 20 से 25 वर्ष पुरानी है। इन्हें बदला जाना है लेकिन समय रहते यह नहीं हो पाया। हालांकि, अमृत योजना के तहत चारदीवारी में कुछ जगह लाइन बदलने का काम चल रहा है।

एबीडी एरिया में है शामिल...

चारदीवारी का चिन्हित इलाका स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के एबीडी (एरिया बेस्ड डवलपमेंट) में शामिल है। इसी के तहत 50 से 60 करोड़ रुपए पेयजल लाइन बदलने पर खर्च होंगे। मोदीखाना विश्वेश्वरजी व शरद चौकड़ी में तो लाइन बदली है लेकिन अन्य जगह अभी काम नहीं हुआ। जबकि, डिस्ट्रीब्यूशन लाइन के साथ—साथ मुख्य पेयजल लाइन भी बदहाल है।

यूं चला सिलसिला...

-रात 12.10 बजे (मंगलवार) टूटी लाइन

-रात 1.20 बंद किया पेयजल लाइन का वॉल्व

-सुबह 8 बजे शुरू हुआ लाइन ठीक करने का काम

-दोपहर 1.15 बजे लाइन ठीक कर दी गई

-दोपहर 3 बजे सप्लाई शुरू की

-पेयजल सप्लाई समय से पहले ही लाइन ठीक करा दी। कई जगह लाइनें जर्जर हैं, जिन्हें बदलने का काम चल रहा है। अमृत योजना में ऐसे प्रोजेक्ट चिन्हित भी हैं। -संजय शर्मा, अधिशासी अभियंता, जलदाय विभाग

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पत्रिका व्यू...

पानी अनमोल है..। हमारी जुबान से यह सुनाई जरूर देता है लेकिन जब बात इसे सहेजने की आती है तो आंकड़ा कुछ फीसदी लोगों से आगे नहीं बढ़ पाता है। यहां तक की अपने कमरों में पानी बचाने के स्लोगन लगाकर वाहवाही लूटने वाले नौकरशाहों भी चिंति नजर नहीं आ रहे। यही कारण है कि ऐसी बदहाल लाइनें बदलने के प्रोजेक्ट कागजों में सहेजकर छोड़ रखे हैं। ऐसी बदहाल लाइनों से बह रहे अमृत को बचाने के लिए भी केन्द्र सरकार की तरफ मुंह ताक रहे हैं। अब भी समय है जब इसे दलगत राजनीति और सरकारों के बीच हिस्सेदारी के मकड़जाल से बाहर निकालना होगा।

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