स्टार कछुए को संरक्षित कर रहा जयपुर चिडिय़ाघर


लगातार बढ़ रही है स्टार कछुओं की तादाद
चिडि़याघर में छोड़ रहे आमजन कछुए

By: Rakhi Hajela

Published: 26 Oct 2020, 09:37 PM IST


संरक्षित प्रजाति में शुमार स्टार कछुए का नया घर अब जयपुर चिडि़याघर बन रहा है। जयपुर चिडि़याघर में इन कछुओं की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। इनमें केवल वही कछुए शामिल नहीं हैं जिन्हें वन विभाग की टीम ने शिकारियों से रेस्क्यू किया है बल्कि वह कछुए भी शामिल हैं जिन्हें लोग बिना किसी को बताए चुपचाप यहां छोड़ जाते हैं। चिडि़याघर में इन कछुओं की संख्या तकरीबन १०० के करीब है।

पूछताछ से बचना चाहते हैं आमजन
जैसे जैसे आमजन में इस बात को लेकर जागरुकता बढ़ी है कि सरंक्षित प्रजाति के किसी भी वन्यजीव को पालना अपराध की श्रेणी में आता है तो लोग इन्हें यहां छोडऩे के लिए आने लगे हैं लेकिन वह इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से नहीं देना चाहते क्योंकि उन्हें लगता है कि यदि वह एेसा करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है और वह पुलिस की कार्रवाई से बचना चाहते हैं एेसे में इन कछुआें को बिना चिडि़याघर के अधिकारियों को बताए छोड़ कर जाना उनके लिए बेहतर विकल्प होता है। कई लोग किसी के कहने-सुनने या बतौर किंवदंती जिस कछुए को वास्तु के लिहाज से घर या फिर यहां बने पानी के टैंकरों में लाकर छोड़ देते हैं, वह दरअसल वन्यजीव एक्ट में अपराध की श्रेणी में है।

वन विभाग ने अनिवार्य किया रजिस्ट्रेशन
गौरतलब है कि वन विभाग ने अब किसी भी प्रकार के वन्यजीवों को घर में रखने से पहले उसका रजिस्ट्रेशन करवाया जाना अनिवार्य किया है। तब से इन्हें यहां छोड़े जाने की तादाद भी बढ़ी है।
घर में रखना है गैरकानूनी
आपको बता दें कि स्टार कछुए को घर में रखना या पालना गैरकानूनी है। स्टार कछुए संरक्षित प्रजाति के तहत आते हैं। इन्हें इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की लुप्तप्राय प्रजातियों की लाल सूची में अतिसंवेदनशील के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह प्रजाति वन्य जीव संरक्षण अधिनियम १९७२ की अनुसूची चार में भी सूचीबद्ध है और भारत के भीतर या उससे बाहर इस प्रजाति का स्वामित्व और व्यावसायिक रूप से व्यापार करना अवैध है। इसे घर में रखने पर ७ साल की कैद का प्रावधान है। भारतीय स्टार कछुए १० इंच तक बढ़ सकते हैं। ये ज्यादातर शाकाहारी होते हैं और घास, फल, फूल, और पौधों की पत्तियों पर जीवित रहते हैं। इसकी खूबसूरत पीली और काली ढाल पर तारे की आकृति और पिरामिडी उभार होती है। ये लकीर आमतौर पर संकीर्ण और बहुत अधिक होती हैं। यही वजह है कि विदेशों में पालतू जानवर के रूप में उपयोग के लिए,बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए इन प्रजातियों का अवैध व्यापार किया जाता है। स्टार टोरटोइस को पालने के लिए अधिकांशत: अरावली की तलहटी एवं राजस्थान के अन्य वनों में से पकड़कर बेचा जाता है, इनकी मांग दीवाली के त्यौहार के दौरान सर्राफा व्यवसायियों के बीच बढ़ जाती है 7 संरक्षित क्षेत्रों में से होकर बाँध, उच्च मार्गों का निर्माण, बालू का खनन इनके लिए मुख्य खतरे हैं।

इन कछुओं को पश्चिम बंगाल ले जाकर वहां से अवैध तरीके से बांग्लादेश पहुंचाया जाता है। इसके बाद ये कछुए चीन, हांगकांग, मलेशिया, थाईलैंड आदि देशों में सप्लाई किए जाते हैं। इन देशों में कछुए का मांस, सूप और चिप्स काफी पसंद किया जाता है। साथ ही इसके कवच से यौनवर्धक दवाएं और ड्रग्स बनाई जाती हैं।

Rakhi Hajela Desk
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