घटयात्रा जुलूस में गूंजा 'जय जिनेंद्र'

Vikas Jain

Publish: Feb, 15 2018 02:38:20 PM (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
घटयात्रा जुलूस में गूंजा 'जय जिनेंद्र'

जनकपुरी ज्योतिनगर स्थित दिगंबर जैन मन्दिर में सहस्त्रकूट जिनालय की वेदि शुद्धि

टोंक रोड। जनकपुरी ज्योतिनगर स्थित दिगंबर जैन मन्दिर में नवनिर्मित भव्य सहस्त्रकूट जिनालय में स्थित 1008 मूर्तियों और 4 प्रतिमाओं का पंचकल्याणक समारोह घटयात्रा जुलूस से शुरू हुआ। जुलूस में परंपरागत बग्गियों में जहां सौधर्म इन्द्र, कुबेर, यज्ञनायक सहित सभी इंद्र सपत्नी आकर्षक वेशभूषा में बैठे, वहीं अन्तर्मना मुनि प्रसन्नसागर और मुनि पीयूषसागर संसघ, आर्यिका गौरवमती माताजी ससंघ शोभायात्रा का प्रमुख आकर्षण का केन्द्र थे।

 

पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के उपाध्यक्ष सुरेश काला और समन्वयक देवेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि घटयात्रा जुलूस जनकपुरी ज्योतिनगर मन्दिर से शुरू होकर इमली फाटक से ज्योतिनगर होता हुआ अमरूदों के बाग पहुंचा। वहां प्रतिष्ठाचार्य धर्मचन्द शास्त्री ने पूजा-अर्चना से साथ पंचकल्याणक के कार्यक्रमों की शुरुआत की। ध्वजारोहण, मंडप, मंगल कलश स्थापना, दीप प्रज्ज्वलन किया गया। जुलूस वापस जनकपुरी ज्योतिनगर मन्दिर पहुंचा, जहां सहस्त्रकूट जिनालय की वेदी शुद्धि हुई।

 

कंकड़ से शंकर की यात्रा, नर से नारायण की यात्रा का नाम है पंचकल्याणक-
सनातन परंपरा कहती है कि जब-जब धरती पर पाप अत्याचार बढेंग़े तब परमात्मा सृष्टि पर अवतार लेंगे लेकिन जैन दर्शन कहता है कि दूध यदि एक बार घी बन जाए तो पुन: दूध नहीं बन पाता है। पंचकल्याणक का अर्थ है कंकड़ से शंकर की यात्रा, नर से नारायण की यात्रा का नाम पंचकल्याणक है। पंचकल्याणक ऐसे महापर्व है जिनके मध्य पाषाण को परमात्मा बनाया जाता है।

 

गर्भपात ने हमारे घरों को बूचडख़ाना बना दिया-
मुनि प्रसन्न सागर ने कहा कि इस देश का दुर्भाग्य तो देखिए जिस देश में गर्भकल्याणक महोत्सव मनाया जाता है आज उसी देश में गर्भपात का व्यापार धड़ल्ले से चल रहा है। तीर्थंकरों के पांच कल्याणक होते हैं, जिसमें गर्भकल्याणक पहला है जिसे संपन्न करने स्वर्ग से देव इन्द्र आते हैं। शहरों में ऐसे क्लीनिक की बाढ़ आ गई है, जहां गर्भ परीक्षण करके अवैध तरीके से चोरी छुपे कन्याभ्रूण हत्या, मादा भू्रण हत्या करा दी जाती है। गर्भपात ने आज हमारे घरों को बूचडख़ाना बना दिया है। एक गर्भपात हजारों जन्मों के पाप का दोष दिलाता है।

 

रूप को नहीं स्वरूप को देखे-
मुनि पीयूषसागर ने प्रवचन में कहा कि दुनिया को जो दिख रहा है वह रूप है, जो देख रहा है वह स्वरूप है। रूप बदलता रहता है। बचपन, जवानी और बुढ़ापे में रूप बदलता रहता है लेकिन स्वरूप नहीं बदलता। हमें रूप को नहीं स्वरूप को देखना चाहिए। स्वरूप को देखने के लिए ज्ञान चक्षु चाहिए। यह पंचकल्याणक स्वरूप को जानने का आयोजन है।

 

 

गर्भकल्याणक उत्तराद्र्ध आयोजन-
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के मु य समन्वयक ने बताया कि पंचकल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को सुबह 6.30 बजे यागमंडल विधान पूजन, आर्शीवचन, दोपहर में माता की गोद भराई, इन्द्र दरबार, कुबेर की ओर से नगरी की रचना, माता के सोलह स्वप्न, राजदरबार में सोलह स्वप्नों का फलादेश आदि आयोजन हुए।

 

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