Janmashtami 2018: श्रीकृष्ण भक्ति से सरोबार हुई छोटी काशी, आधी रात को कंस के कारागार में लेंगे जन्म

Janmashtami 2018: श्रीकृष्ण भक्ति से सरोबार हुई छोटी काशी, आधी रात को कंस के कारागार में लेंगे जन्म

kamlesh sharma | Publish: Sep, 02 2018 06:09:54 PM (IST) | Updated: Sep, 02 2018 06:14:00 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

जयपुर। जन्माष्टमी पर्व को लेकर देशभर का वातावरण कृष्ण भक्ति से सरोबार है। मंदिरों में बाल गोपाल की रास लीलाएं रची है। छोटी काशी में भी श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर काफी उत्साह है। पिंकसिटी के गोविंद देवजी मंदिर में इस पर्व को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। दरअसल, हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के त्योहार का विशेष महत्व है। यह पर्व भाद्रपद के कृष्णपक्ष की अष्टमी को हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। शास्त्रों की मानें तो भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का जन्म ***** के महीने में कृष्णपक्ष की अष्टमी को हुआ था। इस साल दो और तीन सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जा रही है।

 


ऐसे करें बाल गोपाल की पूजा

जन्माष्टमी के दिन काफी लोग व्रत रखते हैं। व्रत रखने वालों को जन्माष्टमी की सुबह स्नान करने के बाद मां देवकी के लिए सूतिका गृह बनाकर फूलों से सजा दें। सूतिका गृह में बाल गोपाल और मां देवकी को विराजनमान करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करें। आधि रात में गोविंद के जन्म के बाद उन्हें पालने में झूलाया जाता है। नंद के आनंद भयो जैसे भजनों से पूरे माहौल को भक्तिमय बना लेवें। बता दें कि बाल गोपाल के जन्मोत्सव को लेकर मंदिरों में राधा कृष्ण की झांकिया सजी है।

 


कंस की कैद में हुआ श्रीकृष्ण का जन्म

पुराणों के अनुसार मथुरा के राजा कंस के अत्याचारों से जनता काफी तंग आ चुकी थी। निरंकुश राजा कंस के विनाश और उसके अत्याचारों को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए भगवान विष्णु ने बाल गोपाल के रूप में कंस की बहन देवकी की कोख से जन्म लिया। मध्य रात्री को १२ बजे कंस की कैद में देवकी ने आठवें पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण को जन्म दिया। उस वक्त कंस अपनी बहन व बहनोई दोनों को कारागार में डाल रखा था। श्रीकृष्ण की जन्मभूमी मथुरा में जन्माष्टमी को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यहां के मंदिरों में गोपियों संग गोपाल की रासलीलाओं का आनंद लेते भी देख सकते हैं।

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