वृंदावन से कम नहीं राजस्थान का ये शहर, भगवान श्रीकृष्ण से रहा है गहरा नाता

वृंदावन से कम नहीं राजस्थान का ये शहर, भगवान श्रीकृष्ण से रहा है गहरा नाता

Dinesh Saini | Publish: Sep, 03 2018 04:40:45 PM (IST) | Updated: Sep, 03 2018 04:44:21 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

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जयपुर। भगवान श्रीकृष्ण का आमेर के अम्बिका वन और जयपुर से तो बहुत पुराना व गहरा नाता रहा है। भागवत पुराण के मुताबिक द्वापर में श्रीकृष्ण नंदबाबा के संग अम्बिका वन में गाये चराने आए तब उन्होंने अजगर रुपी सुदर्शन का उद्धार किया था। कृष्ण के अतिप्रिय कदम्ब वृक्षों से आच्छादित सुदर्शन की खोळ और नाहरगढ़ का चरण मंदिर श्रीकृष्ण के यहां आगमन की याद को ताजा करता है।

बादशाह औरंगजेब मंदिर व मूर्तियां तोडऩे पर आमादा हो गया तब श्रीकृष्ण के पड़पोते मथुरा नरेश बृृजनाभ की खुद के सामने बनवाई गई गोविंददेवजी और पुरानी बस्ती के गोपीनाथजी की मूर्तियों के अलावा भी श्रीकृष्ण व राधाजी की अनेक मूर्तियां जयपुर आई। अधिकांश मूर्तियों को गोस्वामी संत लाए। कछवाहा शासकों ने भव्य मंदिरों में मूर्तियों को स्थापित किया।

श्रीकृष्ण के दर्जनों मंदिरों के कारण जयपुर भी वृंदावन से कम नहीं लगता। चौड़ा रास्ता में राधा दामोदरजी, मदन गोपालजी और त्रिपोलिया के गोकुलानन्द और राधा विनोदजी को लोकनाथ गोस्वामी और विश्वनाथ चक्रवर्ती ने स्थापित किया।

गणगौरी बाजार में धोळी पेड़ी मंदिर, सिरह ढ्योढ़ी में दाऊजी और नीलमणीजी के अलावा गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के गोस्वामीजी श्रीकृष्ण मूर्तियों को कामां होते हुए जयपुर लाए।

वर्ष 1765 में वृंदावन चन्द्रजी के अलावा वृजनंदजी उर्फ बृजनिधि मंदिर सवाई प्रतापसिंह ने चांदनी चौक में बनाया। इन बृजनिधिजी का जौहरी बाजार की हल्दिया हवेली में राधाजी से विवाह भी कराया गया था। चांदनी चौक में आनन्द कृष्णजी मंदिर महारानी भटियानीजी ने व हवामहल के गोर्वधननाथजी मंदिर को वर्ष 1790 में बनाया गया।

महाकवि भोलानाथ शुक्ल ने गोर्वधननाथ मंदिर में श्रीकृष्णलीलामृतम् ग्रंथ लिखा था। सिरह ढ्योडी बाजार में बल्लभ सम्प्रदाय के गिरधारीजी मंदिर में महाकवि पद्माकर रहे थे। पुरानी विधानसभा के पास बलदाऊजी का मंदिर प्रतापसिंह ने, महताबबिहारीजी मंदिर महारानी महताब कंवर ने बनवाया। यहां सवाई राज जयपुर का मुख्य डाकघर था।

त्रिपोलिया में चन्द्र मनोहर मंदिर सवाई जयसिंह रानी मेड़तणी ने व ठंडी प्याऊ के पास बृजबिहारी मंदिर सवाई जगत सिंह ने बनवाया। श्रीजी की मोरी में गोपीजन बल्लभ मंदिर, ब्रह्म्पुरी में गोकुलनाथ व पुरानी बस्ती से गोकुल चन्द्रमाजी मंदिर निम्बार्क सम्प्रदाय के थे। पुराना घाट में विजय गोविंद मंदिर की जगह गोविंददेवजी ने पड़ाव किया था।

ताडक़ेश्वर के सामने राधा दामोदर मंदिर, पुरानाघाट में चर्तुभुजजी व चांदपोल बाहर राजमाता तंवरानीजी का बनवाया माधोबिहारी जी मंदिर बहुत प्रसिद्ध है।

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