विवादित द्वीपों पर जापान इसलिए बना रहा सुरक्षा दीवार

विवादित द्वीपों पर जापान इसलिए बना रहा सुरक्षा दीवार
विवादित द्वीपों पर जापान इसलिए बना रहा सुरक्षा दीवार

Pushpesh Sharma | Updated: 08 Sep 2019, 05:34:23 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

-पांच द्वीपों पर है विवाद (disputed islands), जहां चीन और जापान (china-japan) और अपना-अपना दावा करते हैं। चीन की लगातार घुसपैठ रोकने के लिए जापान अपनी सुरक्षा को मजबूत कर रहा है। (security wall)

पूर्वी चीन सागर में जापान और चीन एक-दूसरे के दांव पलटने की कोशिश में हैं। चीन, जापान के विवादित द्वीपों के नियंत्रण को चुनौती देने के लिए हवाई और समुद्री अतिक्रमण बढ़ाकर जापान को उकसा रहा है। इसके बदले जापान ने चीनी उकसावे का मुकाबला करने और घुसपैठ कर रही विमान और नौकाओं को खदेडऩे के लिए लड़ाकू विमानों और तटरक्षक जहाजों को तैनात किया है। वह अपने पर्यटन द्वीपों और मिसाइल अड्डों की सुरक्षा के लिए दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में आर्कनुमा दीवार बना रहा है।

पिछले कुछ वर्षों में जापान ने ओकिनावा के दक्षिण-पश्चिमी द्वीप पर वायुसेना और तटरक्षक ठिकानों को महत्पूर्ण विस्तार किया है, जहां पहले अमरीका के एशिया प्रशांत में सबसे बड़े नौसैन्य बेस पर दसों हजार अमरीकी सैनिक तैनात हैं। 2018में 2100 सैनिकों के साथ जापान ने पहली बार यहां एम्फीबियस (जल-थल दोनों के लिए) ब्रिगेड तैनात की थी, जो इन द्वीपों पर आक्रमण की सूरत में जवाब देने के लिए तैयार हैं। दक्षिण-पश्चिमी दीवार के रक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि जापान अपने द्वीपों की सुरक्षा के लिए ताइवान की ओर दूरस्थ द्वीपों पर सैन्य ठिकाने स्थापित किए हैं, जहां सेना और मिसाइलों की तैनाती की गई है। इससे चीन में चिंता बढ़ गई।

चीन दियाओयू और जापान सेनकाकू कहना है इन द्वीपों को
-जापान द्वारा नियंत्रित पांच छोटे द्वीपों पर जापान अपना हक मानता है। ये हैं मियाको, अमामी ओशिमो, योनागुनी, इशिगाकी। इन्हें जापान में ‘सेनकाकू’ कहा जाता है, जबकि चीन इन पर अपना दावा करता है, जिसे वह ‘दियाओयू’ कहता है। हाल के वर्षों में इन द्वीपों पर तनाव बढ़ गया है, क्योंकि चीन ने अपनी समुद्री दावों को आक्रामकता से लागू करने की मांग कर रहा है, खासकर तब से जब 2012 में जापान ने इनमें से तीन द्वीपों को इनके मालिक से खरीदा था। चीन ने 2013 में इस पर खुद का अधिकार क्षेत्र घोषित कर दिया।
-चीन विवादित दियाओयू द्वीप पर प्राचीन काल से खुद का अभिन्न हिस्सा बताता है। उसका आरोप है कि 1895 में जापान ने इसे हड़प लिया था। बीजिंग खुद को रवैये को आक्रामक और विस्तारवादी होने से इनकार किया है, लेकिन उसका कहना है कि क्षेत्रीय संप्रभुता बनाए रखने के लिए वह फिक्रमंद है। यह वही भाषा है, जिसका उपयोग चीन दक्षिणी चीन सागर में इस तरह की रणनीति को अंजाम देने में करता है। जहां उसने विवादित हिस्से में कृत्रिम द्वीपों का निर्माण किया है।

दो जलमार्गों पर भी विवाद
चीन विवादित दियाओयू द्वीप पर प्राचीन काल से खुद का अभिन्न हिस्सा बताता है। उसका आरोप है कि 1895 में जापान ने इसे हड़प लिया था। बीजिंग खुद को रवैये को आक्रामक और विस्तारवादी होने से इनकार किया है, लेकिन उसका कहना है कि क्षेत्रीय संप्रभुता बनाए रखने के लिए वह फिक्रमंद है। यह वही भाषा है, जिसका उपयोग चीन दक्षिणी चीन सागर में इस तरह की रणनीति को अंजाम देने में करता है। जहां उसने विवादित हिस्से में कृत्रिम द्वीपों का निर्माण किया है।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned