लगन और मेहनत से अमेजन को पहुंचाया शीर्ष पर

16 साल की उम्र में जेफ ने मैकडोनाल्ड में पहली नौकरी की। इनका काम जमीन पर गिरे कैचप को साफ करना होता था।

By: Archana Kumawat

Published: 18 Apr 2020, 05:35 PM IST

जब इनका जन्म हुआ तब मां की उम्र करीब 17 वर्ष थी। आपसी समझ न होने से माता-पिता का वैवाहिक संबंध भी एक साल से ज्याद न चल सका और उन्होंने अलग होने का फैसला ले किया। इसलिए बचपन का अधिकांश समय ननिहाल में बीता। जब चार साल की उम्र हुए तो मां का दूसरा विवाह हो गया। मां के साथ पिता ने बच्चे को भी अपनाया और इसे अपना नाम दिया। इस तरह पिता का प्यार पाकर यह बच्चा खुश था। अब यह परिवार टेक्सास शहर में शिफ्ट हो गया। पिता को एक कंपनी में इंजीनियर के पद पर काम मिला। अब छोटे भाई-बहिन का भी साथ मिला। बचपन में ही विज्ञान में रुचि थी। इस उम्र में ही इन्होंने अपने लिए एक अलार्म बना लिया था, जिसे वह अपने भाई-बहिन से छुपाकर रखते थे। स्कूल की पढ़ाई के बाद कॉलेज में उन्होंने भौतिक विज्ञान में प्रवेश लिया। कुछ ही समय बाद इस विषय से उनकी रुचि हट गई। अब कंप्यूटर साइंस में डिग्री लेने का विचार किया। उन्होंने कम्प्यूटर साइंस और इलेक्ट्रिकल इंजीनिरिंग में स्नातक की।
रेस्टोरेंट में की पहली नौकरी
16 साल की उम्र में इस व्यक्ति ने मैकडोनाल्ड में पहली नौकरी की। नाना-नानी के यहां जब भी वे गर्मियों में छुट्टियां मनाने जाते तो मैकडोनाल्ड रेस्टोरेंट में जाकर काम किया करते। उनका मानना था कि इस पर वह स्वयं पर होने वाले माता-पिता के खर्चों में कटौती कर सकते हैं। हालांकि यह नौकरी इन्हें पसंद नहीं आई। इनके पास रेस्टोरेंट की साफ-सफाई से संबंधित काम था। उन्हें जमीन पर गिरे कैचप को साफ करना होता था। एक बार कैचप का पूरा कंटेनर फट गया और पूरा कैचप फर्श पर फैल गया। यह उनके काम का पहला हफ्ता था। इसलिए नए होने के कारण इसकी पूरी सफाई का जिम्मा अकेले इन्हें ही दिया गया। अपने साथ ऐसा व्यवहार देखकर उन्हें बहुत निराशा हुई लेकिन करते भी क्या, यहां काम करने के अलावा इनके पास और कोई विकल्प नहीं था। यही से इस व्यक्ति को जीवन की सीख मिली।
जब आया मार्केटिंग का आइडिया
कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब उन्हें किसी रेस्टोरेंट में काम करने की आवश्यकता नहीं थी। उन्हें बैंकर्स ट्रस्ट नाम की कंपनी में अच्छे पद पर जॉब मिल गई थी। इस दौरान काम के सिलसिले से उन्हें अमरीका घूमने का भी मौका मिला। जब वे लोगों से बात करते तो उनके साथ जुड़ाव महूसस करने लगते। बातचीत में उन्हें पता चला कि लोगों को खरीददारी करने में भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जॉब के दौरान उन्होंने इंटरनेट क्रांति को भी करीब से देखा। इंटरनेट के तेजी से प्रसार को देखते हुए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और स्वयं की कंपनी शुरू करने का फैसला किया। उनके दिमाग में ई-मार्केटिंग का आइडिया आया। इस तरह ऑनलाइन बेचे जाने वाले 20 प्रोडक्ट्स की एक लिस्ट तैयार की।
ऑनलाइन बुक स्टोर के रूप में शुुरू किया बिजनेस
बचपने से ही पढऩे-लिखने का शौक होने के कारण जब ऑनलाइन मार्केटिंग का विचार आया तो उन्होंने प्रोडक्ट लिस्ट में सबसे ऊपर किताबे रखी। इसके पीछे एक कारण यह भी था कि किताबों की मांग कभी समाप्त नहीं होती है। हर उम्र के लोगों की किताबों में रुचि होती है। उस समय उनका सपना दुनिया का सबसे बड़ा बुक सेलर बनाना था। कंपनी की शुरुआत उन्होंने घर के गैरेज की थी। दो हफ्तों बाद की कंपनी की कमाई हर हफ्ते 20 हजार डॉलर होने लगी। अब उन्होंने बुक्स के साथ अन्य तरह के सामानों को भी रखना शुरू किया। आज यह विश्व की जानी-मानी कंपनी है और इसमें ‘ए’ से लेकर ‘जेड’ तक सभी तरह के सामान मिलते हैं। यह व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस हैं। बेजोस 1982 से लेकर अब तक के इतिहास में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार 2023 तक वे दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बन सकते हैं। 2004 में उन्होंने ब्लू ओरिजिन नाम से एयरोस्पेस कंपनी भी शुरू की है, जो उनकी अंतरिक्ष में रुचि को दर्शाता है।

Archana Kumawat Desk
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