जितिन के जाने से आलाकमान सकते में, राजस्थान से दिल्ली तक सियासत तेज

कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के युवा नेता जितिन प्रसाद के बुधवार को भाजपा में शामिल होने के बाद कांग्रेस आलाकमान सकते में हैं। जयपुर से दिल्ली तक हलचल तेज है। अब आलाकमान ने पंजाब के साथ ही राजस्थान में सचिन पायलट के मुद्दों पर जल्द सम्मानजनक निर्णय करने का निर्देश दिया है।

By: santosh

Updated: 10 Jun 2021, 10:15 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
जयपुर/नई दिल्ली। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के युवा नेता जितिन प्रसाद के बुधवार को भाजपा में शामिल होने के बाद कांग्रेस आलाकमान सकते में हैं। जयपुर से दिल्ली तक हलचल तेज है। अब आलाकमान ने पंजाब के साथ ही राजस्थान में सचिन पायलट के मुद्दों पर जल्द सम्मानजनक निर्णय करने का निर्देश दिया है। इसके लिए जल्द फॉर्मूला तय किया जा सकता है। इस बीच पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने पायलट के समर्थन में बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पायलट से वादे किए हैं तो उन्हें पूरा किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री बदलने की कोई बात नहीं है।

सचिन पायलट ने एक दिन पहले ही नाराजगी जताते हुए कहा था कि राजस्थान सरकार का आधा कार्यकाल बीत चुका है लेकिन कांग्रेस को सत्ता में लाने वाले कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। पायलट खेमा पहले ही तर्क दे चुका है कि पंजाब में 15 दिन में एक्शन हो गया और राजस्थान में 10 माह बाद भी कुछ नहीं हुआ। इस सियासी रस्साकशी के बीच बुधवार को गहलोत-पायलट वर्चुअल बैठक में आमने-सामने हुए। यह बैठक प्रभारी महासचिव अजय माकन ने 11 जून को महंगाई के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन की तैयारी के लिए बुलाई थी।

डैमेज कन्ट्रोल के लिए जल्द हो सकता है मंत्रिमंडल विस्तार
गहलोत-पायलट के बीच रार खत्म करने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार, राज्य व जिला स्तरीय सियासी नियुक्तियों का काम जल्द करना होगा। आलाकमान ने विवाद को गम्भीरता से लिया तो एक-दो महीने में मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। इनमें पायलट खेमे के विधायक व नेताओं को शामिल किया जाना है। राजस्थान में 30 मंत्री बनाने का कोटा है। अभी मुख्यमंत्री सहित 21 मंत्री हैं। ऐसे में 9 मंत्री और बनाए जा सकते हैं। पायलट खेमा अपने 5 से 6 विधायकों को मंत्री बनाना चाहता है। हालांकि गहलोत खेमा बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों और कुछ निर्दलीयों को भी मंत्री बनाना चाहता है।

इससे मंत्री बनाने को लेकर तकरार बनी हुई है। वहीं राज्य स्तरीय राजनीतिक नियुक्तियां लगातार की जा रही हैं लेकिन पायलट खेमे के लोग इंतजार तक सीमित हैं। इसे लेकर पायलट खेमे के लोग नाराज हैं। वे लगातार मांग कर रहे हैं कि सभी को बराबर तवज्जो मिले। फिर पायलट खेमा उन्हें भी अच्छे पद दिलाना चाहता है, जिनके सियासी घमासान के दौरान पद छीन लिए गए थे। हालांकि एक दिन पहले ही प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने कहा था कि जून में ही जिला स्तरीय राजनीतिक और कांग्रेस जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां की जाएंगी। जबकि असल लड़ाई राज्य स्तरीय नियुक्तियों की है। इनके करीब 50 पद खाली बताए जा रहे हैं।

गहलोत खेमे को भी असंतोष का खतरा

दूसरी ओर, विपक्षी दल भाजपा के तोडफ़ोड़ के खतरे और मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत किसी विधायक को नाराज करने की हालत में नहीं हैं। मंत्रिमंडल और राजनीतिक नियुक्तियों में बड़े पदों पर जगह नहीं मिली तो विधायकों की नाराजगी का खतरा है। वहीं मंत्रिमण्डल से किसी मंत्री को हटाना भी आसान नहीं है।

पायलट से किए वादे पूरे हों : जितेन्द्र सिंह
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जितेन्द्र सिंह ने सचिन पायलट की पैरवी करते हुए मीडिया से कहा कि पार्टी हाईकमान ने पायलट से वादे किए हैं तो वे पूरे करने चाहिए। ताकि पायलट अपने कार्यकर्ताओं को संतुष्ट कर सकें। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलने जैसी कोई बात नहीं है और न ही सरकार पर कोई खतरा है।

सिंह ने कहा कि उन्हें ज्यादा जानकारी तो नहीं है लेकिन यही लगता है कि पायलट अपने कार्यकर्ताओं और विधायकों को उचित सम्मान देने के लिए हाईकमान से जो बातें हुईं उन्हें पूरा कराने के लिए कह रहे हैं। वैसे राजनीतिक नियुक्तियां तुरंत की जानी चाहिए ताकि मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मान मिले। उन्होंने कहा कि सचिन मेरे अच्छे मित्र हैं। उनके पिता राजेश पायलट का मुझ पर आशीर्वाद रहा था।

नेतृत्व लेगा सम्मानजनक फैसला
पायलट कांग्रेस के युवा, ऊर्जावान, सम्मानजनक नेता हैं। वह प्रदेश अध्यक्ष, डिप्टी सीएम, केन्द्र में मंत्री समेत कई पदों पर रहे हैं। कांग्रेस में नेताओं को अपनी समस्याएं रखने की आजादी है। वह अपनी बात रख रहे हैं, इससे हमें खुशी होती है। जिन नेताओं को निर्धारित किया है, वे उनकी बात सुन रहे हैं। पायलट ने संयम बरता है और कांग्रेस नेतृत्व समय पर सम्मानजनक फैसला करेगा। जबकि भाजपा में ऐसा नहीं है। योगी ने इस्तीफा देने और दिल्ली आने से इनकार कर दिया। यूपी में राजनीतिक हालात किसी से छिपे नहीं हैं।
- सुप्रिया श्रीनते, राष्ट्रीय प्रवक्ता, कांग्रेस

काम कर रही है पार्टी

आज एक वर्चुअल बैठक की थी। इसमें सीएम गहलोत, पायलट के साथ प्रदेश अध्यक्ष व अन्य नेता शामिल रहे। हम 11 जून को फिर मिलेंगे। पायलट के बताए मुद्दों पर पार्टी काम कर रही है।
- अजय माकन, राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश प्रभारी

पायलट, ज्योतिरादित्य व जितिन की रही है जोड़ी

पायलट के ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद से कांग्रेस में रहते अच्छे रिश्ते रहे हैं। अब ज्योतिरादित्य के बाद जतिन भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उधर, पायलट की नाराजगी को लेकर आलाकमान 10 माह से चुप्पी साधे है। जबकि पायलट और उनके खेमे के विधायक वादे जल्द पूरे करने की मांग लगातार उठाते रहे हैं।

ऐसे में बुधवार दोपहर तक उत्तर भारत के एक बड़े कांग्रेस नेता के भाजपा में जाने की चर्चा चली तो राजस्थान से उत्तरप्रदेश तक कांग्रेस-भाजपा के लोग नेताओं के नामों को लेकर चर्चा करते रहे। वहीं एक टीवी चैनल पर लाइव-शो में कांग्रेस की उत्तरप्रदेश की अध्यक्ष रहीं और अब भाजपा में जा चुकीं रीता बहुगुणा ने यह कहकर सियासी पारा और गर्म कर दिया कि उन्होंने सचिन पायलट को फोन कर कहा था कि उन्हें देश के विकास और देश को आगे बढ़ाने के लिए मोदीजी के साथ काम करना चाहिए।

पिछले कार्यकाल में 3 साल में 2 बार फेरबदल

2008 से 2013 की गहलोत सरकार में तीन साल में दो बार मंत्रिमंडल फेरबदल किया गया था। पहले 2009 में बसपा से कांग्रेस में आने वाले विधायकों को मंत्री और संसदीय सचिव बनाया गया था। इसके बाद 16 जून 2011 को विस्तार करते हुए 7 मंत्री नए बनाए और 5 मंत्रियों को हटाया गया था। लेकिन इस बार गहलोत-पायलट खेमे की रस्साकशी के चलते कुछ नहीं हो रहा।

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