नगर निगम चुनाव:सरकार ने 5 जनवरी तक परिसीमन करने का दिया आश्वासन

(Rajasthan Highcourt) राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को जयपुर नगर निगम के बंटवारा करने और चुनाव टालने के सरकार के फैसले को चुनौती देने के मामले में (Judgement reserved) फैसला सुरक्षित कर लिया। गुरुवार को चीफ जस्टिस इन्द्रजीत महांति और जस्टिस महेन्द्र गोयल ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग की बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित किया।

जयपुर

96 दिन तो लगेगें ही...

राज्य चुनाव आयोग की ओर से एडवोकेट आर.बी.माथुर ने शपथ पत्र पेश कर बताया कि आयोग को वार्ड सीमांकन व परिसीमन पूरा होने के बाद चुनावी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कम से कम 96 दिन लगेगें। आयोग ने शपथ पत्र में बताया कि आयोग को विधानसभा क्षेत्रवार वोटर लिस्ट और फार्म ए तैयार करने में 10 दिन। फार्म ए को अपलोड करने में दो दिन। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को डाउनलोड करने में 1 दिन। फील्ड वैरिफिकेशन में 10 दिन। ईआरओ द्वारा चैकिंग और वैरिफिकेशन के बाद सर्टिफिकेट अपलोड करने में एक दिन। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को डाउनलोड करके 12 सैट फोटोस्टेट तैयार करने में तीन दिन। आपत्तियां मांगने में 10 दिन। आपत्तियों के निपटारे में आठ दिन। सप्लीमेंट्री लिस्ट तैयार करने में 10 दिन। फाइनल वोटर लिस्ट डाउनलोड करने में तीन दिन लगेगें। फाइनल वोटर लिस्ट तैयार होने से वोटों की गिनती तक पूरी चुनावी प्रक्रिया को निपटाने में कम से कम 30 दिन का समय और लगेगा। इसके बाद मेयर और चेयरमैन के चुनाव में कम से कम सात दिन का समय तो लगेगा ही।

तो 5 जनवरी तक पूरा कर लेगें परिसीमन...

अदालत ने महाधिवक्ता महेन्द्र सिंह सिंघवी से पूछा कि सरकार परिसीमन कम से कम कितने दिन में पूरा कर सकती है ? अदालत ने उन्हें इसके लिए सरकार से बात करके बताने का आग्रह किया। महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि यदि चुनाव आयोग को पूरी चुनावी प्रक्रिया के लिए कम से कम 96 दिन चाहिएं तो सरकार जयपुर,जोधपुर और कोटा नगर निगमों के परिसीमन के काम को 5 जनवरी तक पूरा करने का प्रयास करेगी।

यह है मामला--

याचिकाकर्ता एडवोकेट सतीश शर्मा ने जयपुर नगर निगम का बंटवारा करके दो नगर निगम बनाने और छह महीेने के लिए चुनाव टालने के सरकार के फैसले को जनहित याचिका के जरिए चुनौती दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि संविधान के अनुसार स्थानीय निकाय का कार्यकाल पांच साल का होता है और इसे किसी भी हाल में बढ़ाया नहीं जा सकता। यह फैसला जनहित में नहीं बल्कि राजनीतिक कारणों से लिया गया है। सरकार एेसा कोई काम नहीं कर सकती जिससे चुनावी प्रक्रिया में बाधा पहुंचे। यदि सरकार को जयपुर,जोधपुर और कोटा में दो नगर निगम बनाने ही थे तो छह महीने पहले यह काम करना चाहिए था ताकि २५ नवंबर तक चुनावी प्रक्रिया पूरी हो जाती।

Mukesh Sharma
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