scriptJodhpur: Five hundred years old invitation letter, cultural splendor | जोधपुर:पांच सौ साल पुराने निमंत्रण पत्र, दिखता है सांस्कृतिक वैभव | Patrika News

जोधपुर:पांच सौ साल पुराने निमंत्रण पत्र, दिखता है सांस्कृतिक वैभव

समूचे मारवाड़ में चातुर्मास के लिए साधु -संतों को निमंत्रण देने की परम्परा जितनी अनूठी है, उतने ही नायाब संतों को भेजे जाने वाले आमंत्रण पत्र भी रहे हैं। उस जमाने में जब एक दूसरे तक कोई संदेश पहुंचाने की आज जैसी सुविधा नहीं थी, उस वक्त चातुर्मास निमंत्रण पत्रों में चातुर्मास स्थल और आसपास के क्षेत्र का जीवंत चित्रण किया जाता था।

जयपुर

Published: July 20, 2022 08:19:08 pm

समूचे मारवाड़ में चातुर्मास के लिए साधु -संतों को निमंत्रण देने की परम्परा जितनी अनूठी है, उतने ही नायाब संतों को भेजे जाने वाले आमंत्रण पत्र भी रहे हैं। उस जमाने में जब एक दूसरे तक कोई संदेश पहुंचाने की आज जैसी सुविधा नहीं थी, उस वक्त चातुर्मास निमंत्रण पत्रों में चातुर्मास स्थल और आसपास के क्षेत्र का जीवंत चित्रण किया जाता था।
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जोधपुर के प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में ऐसे पांच सौ साल पुराने निमंत्रण पत्रों का बेशकीमती संग्रह मौजूद है। जैन संतों को भेजे गए संस्कृत, प्राकृत व लोकभाषाओं में तैयार इन निमंत्रण पत्रों में तत्कालीन समाज, संस्कृति और नगरीय वैभव का भी वर्णन मिलता है। साथ ही रंगीन चित्रों के माध्यम से तत्कालीन धर्मस्थलों, सामाजिक परिवेश की जानकारी मिलती है।
आठ मीटर से भी लम्बे निमंत्रण पत्र
खरड़ा यानी स्क्रॉल करके भेजे जाने वाले इन निमंत्रण पत्रों की लम्बाई कई मीटर में है। मेवाड़ चित्रशैली का एक खरड़ा तो 8.5 मीटर लम्बा है, जबकि इसकी चौड़ाई 30 सेमी है। प्रतिष्ठान में विक्रम संवत 1802 के एक निमंत्रण पत्र में भवन, हाथी, घोड़े, जैन साधु, बाजार और श्रीनाथ मंदिर का सुंदर चित्रांकन है। यह निमंत्रण पत्र विनयसागर ने लाशुनाक्य नगर में चातुर्मास आराधना के लिए कल्याण सूरि को प्रेषित किया था।
बना होता था नगर का नक्शा
निमंत्रण पत्रों में संत को गांव की पूरी स्थिति और नक्शा चित्रण कर भेजा जाता था। जोधपुर जैन संघ की ओर से गुजरात में चातुर्मास कर रहे संत विजय जैनेन्द्र सूरि को विक्रम संवत 1848 में भेजे गए पत्र एवं उम्मेद विजय की ओर से 1892 में विजयदेव महाराज को भेजे चित्रित निमंत्रण पत्र में तत्कालीन जोधपुर का विवरण है। विक्रम संवत 1880 में मेड़ता से शिवचंद एवं मानसिंह के शासनकाल में सोजत के सुखराज सिंघवी की ओर से भेजे गए निमंत्रण पत्र में मेड़ता व सोजत का वर्णन है।

जब वर्तमान संचार साधनों जैसी सुविधाओं का अभाव था तो चातुर्मास के लिए चित्रात्मक निमंत्रण पत्र भेजे जाते थे। इनसे तत्कालीन हालात का सहज ही पता लगाया जा सकता है।

-डॉ. कमल किशोर सांखला, वरिष्ठ शोध अधिकारी, प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर
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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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