छोटा पड़ रहा जंगल , बढ़ रहा बाघों में टकराव

कई बाघ नहीं बना पा रहे टैरेटरी
इंसानों से भी हो रहा आमना सामना

By: Rakhi Hajela

Updated: 15 Jul 2020, 05:17 PM IST

एक ओर रणथंभौर नेशनल पार्क में बाघों की संख्या लगातार बढ़ती संख्या वन्यजीव प्रेमियों के मन में खुशी जगा रही है वहीं दूसरी ओर यहीं संख्या अब बाघों के लिए ही खतरा साबित हो रही है। पार्क क्षेत्र में जगह कम पडऩे से इनमें आपसी टकराव की स्थिति पैदा होने लगी है। रणथंभौर नेशनल पार्क में बढ़ती बाघों की संख्या के कारण कई बाघ अपनी टैरेटरी नहीं बना पा रहे हैं और इसी के चलते रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों के बीच संघर्ष बढ़ रहा है।

चार बाघों में वर्चस्व की जंग
आपको बता दें कि रणथंभौर राष्ट्रीय अभयारण्य की खंडार रेंज में इन दिनों टेरेटरी को लेकर चार बाघों में वर्चस्व की जंग छिड़ी हुई है। हालात यह है कि बाघ एक.दूसरे की टेरिटरी में घुसकर अपनी सत्ता कायम करने पर तुले हुए हैं। कुछ ऐसी ही घटना बाघ टी 3 के साथ भी हुई है। टी.3 अपनी टेरिटरी में नहीं लौटकर काछड़ा क्षेत्र में ही डेरा डाले हुए है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अभयारण्य में चार बाघों में टेरेटरी को लेकर वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। संबंधित बाघों की टेरेटरी में लग रहे कैमरों में इनके फोटो ट्रेप हुए भी मिले हैं।

किसने किसे खदेड़ा
आपको बता दें कि बाघ टी-57 को उसकी टेरेटरी से टी-58 या टी-56 ने खदेड़ा था, जिससे यह टी-96 की टेरेटरी में आ गया। टी-96 बाघ टी-3 की टेरेटरी में घुस आया है। टी 96 ने टी-3 को खदेड़ा जिससे टी-3 अपनी टेरेटरी को छोड़कर टी-66 की टेरेटरी यानी काछड़ा क्षेत्र में पहुंचा है। टी-66 अपनी टेरेटरी के अंतिम छोर पर तालेड़ा रेंज में विचरण कर रहा है। टी-57 मजबूत टाइगर है। टी-96 वही है जिसने टी-85 को मारा था। टी-3 उम्रदराज बाघ है। टी-66 युवा बाघ है। काछड़ा में टी-3 का सामना टी-66 या इसकी टेरेटरी के आसपास विचरण करने टी-65 से कभी भी हो सकता है।

नया नहीं है बाघों में संघर्ष
गत वर्ष सितंबर में रणथंभौर नेशनल पार्क के जोन नम्बर 10 में भी दो बाघों के बीच संघर्ष हुआ था। यहां टाइगर टी-42 फतेह व टी-109 वीरू के बीच जमकर संघर्ष हुआ, जिसमें टी- 109 घायल हो गया। आपसी संघर्ष के बाद टी-42 भैरूपुरा के जंगलों की तरफ चला गया। इससे पूर्व गत वर्ष मार्च में बाघ टी-86 और बाघ टी-95 के मध्य भी संघर्ष हुआ था। इसी प्रकार बैरदा वन क्षेत्र में टी-104 व टी-64 में संघर्ष हुआ था, जिसमें टी-104 के गंभीर चोट आई थी।

Rakhee Hajela, [14.07.20 20:26]
बाघों के लिए कम पड़ रही जगह
गौरतलब है कि रणथंभौर में बाघों का कुनबा बढ़ रहा है जिससे इनके रहने के लिए जगह कम पडऩे लगी है। यहां 55 बाघों के रहने की जगह है, लेकिन 70 बाघ रह रहे हैं। 1734 किलोमीटर रणथंभौर का कुल क्षेत्रफल है। 1392 किलोमीटर बफर जोन और 392 किलोमीटर कोर एरिया है। रणथंभौर में वर्तमान में 24 नर, 25 मादा और 21 शावक रह रहे हैं। जबकि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के नियमों के तहत यहां अधिकतम 40 बाघ ही रह सकते हैं। बाघों की संख्या अधिक होने के कारण रणथंभौर में 15 बाघों का विचरण जंगल की सीमा के आसपास रहता है। इनमें टी-97, टी-66, टी-62, टी-99, टी-100, टी-110, टी-48, टी-69, टी-96 और टी-108 शामिल है।
सामान्य रूप से एक मादा को 20 से 25 वर्ग किमी का क्षेत्र चाहिए एवं नर को 40 से 50 किमी का इलाका। बच्चे जब तक मां से अलग नहीं होते हैं, उनको अलग से जगह नहीं चाहिए। लेकिन रणथंभौर में इनके लिए जगह नहीं है। रणथंभौर के आठ से दस बाघों को जंगल के भीतर एवं सीमा पर जगह नहीं मिलने से वे गांवों के आसपास एवं बाहरी इलाके में भटक रहे हैं।
पांच बाघों की मौत
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार रणथंभौर में बाघों के वर्चस्व की लड़ाई में पांच बाघों की मौत एक साल में हुई है। इनमें टी-25, टी-85, टी-37, टी-109 और एक शावक की मौत हुई है।
एक नजर इन पर भी
71 कुल बाघ
25 बाघ
25 बाघिन
21 शावक
1734 वर्ग किमी है रणथम्भौर का कुल क्षेत्रफल
392 वर्ग किमी है कोर एरिया
1342 वर्ग किमी बफर एरिया
700 वर्ग किमी एरिया में ही रह रहे बाघ
हो रहा बाघ और इंसानों के मध्य संघर्ष
आपको बता दें कि वहींं कई बार ये बाघ पार्क क्षेत्र से निकलकर आबादी क्षेत्र में पहुंच जाते हैं। इंसानों और बाघों के बीच भी टकराव पैदा हो रहा है। गत वर्ष रणथंभौर में सबसे अधिक बार बाघों ने इंसानों पर हमले किए। हमले में छह लोगों की मौत भी हुई। बाघों के हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। दरअसल बाघों की संख्या अधिक होने से टेरिटरी व शिकार की तलाश में बाघ आबादी क्षेत्र की तरफ आ रहे हैं। आबादी क्षेत्र में पहुंचकर टाइगर इंसानों और पालतू जानवरों का शिकार कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ हम इंसान भी उनके क्षेत्र में दखल दे रहे हैं जिससे दोनों का आमना सामना हो रहा है।

Rakhi Hajela Desk
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