जज साहब ने कार्यवाहक सीेजे के खिलाफ दिया आदेश

बेंच बदलने पर कलकत्ता हाईकोर्ट में फिर अभूतपूर्व घटना

— पहले सीजेआइ के खिलाफ आदेश को लेकर रहा सुर्खियों में रहा कलकत्ता हाईकोर्ट

By: Shailendra Agarwal

Published: 21 Jul 2021, 03:22 AM IST

कोलकाता। देश के प्रधान न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीशों के खिलाफ आदेश जारी करने वाला कलकत्ता हाईकोर्ट एक बार फिर सुर्खियों में है। अबकी बार हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश ने अपने ही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और कोर्ट प्रशासन के खिलाफ आदेश जारी किया है। इस आदेश में कहा कि मुख्य न्यायाधीश मास्टर आॅफ रोस्टर है, मास्टर आॅफ आॅल नहीं।
एक मामले की वर्चुअल सुनवाई के दौरान खराब कनेक्टिविटी पर सख्त टिप्पणियां करने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश सब्यसाची भट्टाचार्य ने यह आदेश दिया। आदेश में न्यायाधीश भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश मास्टर ऑफ रोस्टर होते हैं, लेकिन इसका अर्थ मास्टर ऑफ ऑल नहीं हो सकता है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश या मुख्य न्यायाधीश रोस्टर तय करने के अधिकारी होते हैं और वे ही कोर्ट के प्रशासन के बारे में निर्णय लेते हैं, लेकिन इस बात पर संदेह है कि क्या वे अपनी प्रशासनिक क्षमता के तहत रातों रात किसी मामले को दूसरी बेंच को सौंप सकते हैं। इस आदेश की कॉपी सोमवार रात को हाईकोर्ट की वेबसाइट पर भी अपलोड हुई।

मामला ट्रांसफर कर दिया था
पता चला है कि 16 जुलाई को जिस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश सब्यसाची भट्टाचार्य ने कनेक्टिविटी को लेकर कडी टिप्पणियाँ की, उस मामले को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल ने डिविजन बेंच को ट्रांसफर कर दिया। इस पर उन्होंने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और कोर्ट प्रशासन के खिलाफ आदेश पारित किया गया है। न्यायाधीश भट्टाचार्य ने 10 पन्नों के अपने आदेश में राजेश बिंदल और कोर्ट प्रशासन की आलोचना भी की ।

न्यायिक व्यवस्था के लिए सही नहीं

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि मेरे आदेश पर असिस्टेंट कोर्ट ऑफिसर ने रजिस्ट्रार जनरल को बताया है कि उनके पास कौनसा केस किस बेंच को सौंपा जाएगा, यह तय करने की शक्तियां नहीं हैं। न्यायाधीश ने आदेश में तंज कसते हुए कहा कि पारदर्शिता का अभाव समस्याएं पैदा करता है और यह न्यायिक व्यवस्था के लिए सही नहीं है।

पहले भी एक न्यायाधीश ने जताई थी नाराजगी
इससे पहले नारद मामले के दौरान जस्टिस अरिंदम सिन्हा ने भी इसी तरह मुख्य कार्यवाहक न्यायाधीश बिंदल का विरोध किया था। सिन्हा ने सभी जजों को इस सम्बन्ध में पत्र भेजा था।

2016 की याद ताजा
-2016 में सुप्रीम कोर्ट में भी घटी थी ऐसी घटना। कोलकाता हाईकोर्ट के इस मामले ने 2016 की यादें ताजा कर रही है। जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मदन बी लोकुर ने सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर नियमों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया था।

Shailendra Agarwal Reporting
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