न्याय कभी बदले के रूप में नहीं हो सकता: बोबडे

जोधपुर में सीजेआई बोले-न्याय तत्काल भी नहीं हो सकता

 

By: anoop singh

Updated: 08 Dec 2019, 01:30 AM IST

जोधपुर.
हैदराबाद गैंगरेप के चारों आरोपियों के एनकाउंटर का मुद्दा देश में बड़ी बहस बन चुका है। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े ने कहा है कि न्याय कभी आनन-फानन में नहीं हो सकता और यदि न्याय बदले की भावना से किया जाए तो अपना मूल स्वरूप खो देता है।
जस्टिस बोबडे ने शनिवार को यहां राजस्थान हाईकोर्ट के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण समारोह में कहा कि देश में हाल की घटनाओं ने एक पुरानी बहस फिर छेड़ दी है। लेकिन मुझे लगता है कि न्याय कभी जल्दबाजी में या फटाफट नहीं होना चाहिए। न ही न्याय को कभी बदले का रूप लेना चाहिए। उन्होंने कहा, मौजूदा न्यायिक प्रणाली दशा, ढिलाई तथा आपराधिक मामलों के अंतिम निस्तारण में लगने वाले समय को लेकर पुनर्विचार किए जाना चाहिए।

बोबडे के बोल
- आत्मसुधार की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए।
- तकनीक का उपयोग समय पर न्याय सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा।
- प्री-लिटिगेशन मध्यस्थता बाध्यकारी होनी चाहिए।

दो माह में पूरी हो रेप की जांच: विधि मंत्री
केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बलात्कार के मामलों में महिलाएं त्वरित इंसाफ मांग रही है। वर्तमान में बलात्कार जैसे घिनौने अपराधों की ट्रायल के लिए 704 फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं, करीब 1123 ऐसी अदालतों को स्थापित करना प्रक्रियाधीन है। महिला अत्याचार से जुड़े कानून में मृत्युदंड, गंभीर सजा सहित दो महीने में ट्रायल पूरी करने का प्रावधान किया गया है।

गहलोत का सवाल, बोबड़े का जवाब
मुयमंत्री अशोक गहलोत ने सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की ओर से सार्वजनिक तौर पर लोकतंत्र के खतरे में होने का जिक्र छेड़ते हुए कहा कि जस्टिस गोगोई ने यह सब सार्वजनिक कहा था, लेकिन बाद में उन्होंने कार्यशैली में बदलाव नहीं करवाया। मैं समझ नहीं पाया कि जस्टिस गोगोई पहले गलत थे या बाद में। जस्टिस बोबड़े ने इस पर अपने संबोधन में कहा, प्रेस कॉन्फ्रेंस को मैं सही तो नहीं ठहराना चाहता। यह आत्म सुधारात्मक उपाय से ज्यादा कुछ नहीं था।


महंगा न्याय, आम आदमी की पहुंच से बाहर:राष्ट्रपति
जोधपुर. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने खर्चीली न्याय प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए कहा कि यह जनसामान्य की पहुंच से बाहर हो गई है। विशेषकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पहुंचना आम फरियादी के लिए नामुमकिन हो गया है। कोविंद ने इस पर चिंता जताते हुए सवाल खड़ा किया कि क्या हम सभी के लिए न्याय सुलभ करा पा रहे हैं?
हाईकोर्ट के भवन के लोकार्पण समारोह में कोविंद बोले, पुराने जमाने में कोई भी व्यक्ति घंटी बजाकर राजा से न्याय के लिए प्रार्थना कर सकता था, क्या आज कोई गरीब या वंचित वर्ग का व्यक्ति यहां आ सकता है? महात्मा गांधी भी महंगी न्याय प्रक्रिया के बारे में बहुत चिंतित रहते थे।
महामहिम बोले
-संविधान प्रदत्त न्याय पाने के अधिकार को सुनिश्चित किया जाए।
- एस के दीक्षांत समारोह में बोले- चिकित्सक दूरदराज के गांवों में भी जाएं।

समारोह को राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी संबोधित किया। प्रारंभ में राजस्थान के मुय न्यायाधीश इंद्रजीत महांति ने स्वागत उद्बोधन दिया। एस के दीक्षांत समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी संबोधित किया।
हैदराबाद एनकाउंटर: मानवाधिकार आयोग की टीम पहुंची

हैदराबाद. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम शनिवार को जांच के लिए हैदराबाद पहुंची। टीम ने महबूबनगर के सरकारी अस्पताल का भी दौरा किया, जहां चारों आरोपियों के शव पोस्टमॉर्टम के बाद रखे गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल
नई दिल्ली. हैदराबाद एनकाउंटर मामले में जीएस मणि और मनोहर लाल शर्मा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाओं में एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने और मृतकों के परिवारवालों को मुआवजा देने की मांग की गई है। साथ ही सीबीआई अथवा किसी अन्य जांच एजेंसी से निष्पक्ष जांच की मांग भी की गई है।

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