उसैन बोल्ट से भी तेज दौड़ा कंबाला ‘जॉकी’ श्रीनिवास गौड़ा

देशी प्रतिभा: कीचड़ से भरे ट्रैक पर भैसों की दौड़ में रचा नया कीर्तिमान, 142.5 मीटर की दूरी 13.62 सेकंड में पूरी की

मेंगलूरु. कर्नाटक के मेंगलूरु के पास मूडाबिदरी के रहने वाले श्रीनिवास गौड़ा ने कीचड़ से भरे ट्रैक पर भैसों की दौड़ (कंबाला) में इतिहास रच दिया। करीब 700 साल से चली आ रही भैसों की इस दौड़ में श्रीनिवास गौड़ा ने 142.5 मीटर की दूरी मात्र 13.62 सेकंड में पूरी कर ली। 100 मीटर की गणना करने पर उन्होंने यह दूरी मात्र 9.55 सेकंड में पूरी की। श्रीनिवास ने विश्व चैंपियन उसैन बोल्ट को भी पीछे छोड़ दिया। यानी 100 मीटर की दूरी उन्होंने उसैन बोल्ट से 0.05 सेकंड तेजी से पूरी कर ली।
श्रीनिवास ने कंबाला जॉकी बनने के लिए स्कूल से पढ़ाई छोड़ दी थी। बाकी बचे दिनों में वे मजदूरी किया करते थे। श्रीनिवास ने बताया कि करीब 6 साल पहले उन्होंने इस दौड़ में शामिल होने के लिए खुद को तैयार करना शुरू किया था। इस साल कंबाला दौड़ में वे तीन भैंसों के जोड़े के साथ मैदान में उतरे थे। इन भैंसों के मालिक अलग-अलग हैं। एक कंबाला जॉकी को भैंसों को ट्रेनिंग देने और एक सत्र में दौड़ में हिस्सा लेने के लिए 1-2 लाख रुपए मिलते हैं। अगर कोई कंबाला जॉकी पुरस्कार जीतता है तो भैंसों के मालिक उन्हें नकद इनाम भी देते हैं। श्रीनिवास ने बताया कि उन्होंने इस सत्र के शुरू होने के 4 सप्ताह पहले ही अपनी भैंसों को ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया था। भैंसों के साथ दौडऩे वाले जॉकी को कंबाला अकादमी में फ्री में ट्रेनिंग दी जाती है।
30 साल पुराना रेकॉर्ड तोड़ा
28 वर्षीय श्रीनिवास ने ऐकला गांव में हुई इस दौड़ में 30 साल पुराने रेकॉर्ड को तोड़ दिया। पिछला रेकॉर्ड अलादनगाडी में बनाया गया था। श्रीनिवास इस साल आयोजित 12 कंबाला दौड़ में 29 पुरस्कार जीत चुके हैं। ऐकला में आयोजित इस दौड़ में चारों श्रेणियों में पुरस्कार जीतकर भी उन्होंने रेकॉर्ड बनाया है।
सुविधाओं के साथ होती है दौड़
कर्नाटक के तटीय इलाकों में कीचड़ से सने ट्रैक पर होने वाली कंबाला दौड़ में कई अंपायर होते हैं। दौड़ में वीडियो रेफरल भी होता है। इसका अयोजन धान की दूसरी फसल काटने के बाद होता है। आधुनिक कंबाला की शुरुआत 1969 में बाजागोली से हुई थी। इसे लव-कुश कंबाला कहा गया। ऐसे आयोजन से 5 हजार लोग जुड़े होते हैं।
सोशल मीडिया पर छाए श्रीनिवास
श्रीनिवास सोशल मीडिया पर छा गए हैं। लोगों का कहना है कि इसकी सीधी तुलना नहीं की जा सकती है, क्योंकि वह भैंसों के जोड़े के साथ दौड़े थे। उन्हें मदद मिली होगी, लेकिन पानी और कीचड़ रोकते भी हैं।

Vijayendra Desk
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