पैसों के अभाव में बीच में ही छोड़ा थिएटर स्कूल, टैलेंट के दम पर बनीं टॉप अभिनेत्री

पांच साल की उम्र में ही इन्होंने स्टेज पर परफॉर्म करना शुरू कर दिया था। बचपन में ये ओवरवेट थी। स्कूल में सभी इनका मजाक बनाया करते थे, लेकिन इन्होंने कभी इन बातों पर ध्यान नहीं दिया।

By: Archana Kumawat

Published: 17 Jun 2020, 05:42 PM IST

इनका जन्म 1975 में इंग्लैंड में हुआ था। माता-पिता दोनों ही अभिनय की दुनिया से जुड़े थे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पाई थी। पिता मुश्किल से परिवार का चला पाते थे। इनकी दो बहिने और एक भाई भी है। घर के आर्थिक हालात अच्छे न होने के कारण परिवार के लिए मुक्त का भोजन बड़ी राहत था, जो उन्हें एक्टर्स चैरिटेबल ट्रस्ट की तरफ से मिलता था। पांच साल की उम्र में ही इन्होंने स्टेज पर परफॉर्म करना शुरू कर दिया था। बचपन में ये ओवरवेट थी। स्कूल में सभी इनका मजाक बनाया करते थे, लेकिन इन्होंने कभी इन बातों पर ध्यान नहीं दिया। जब ये 10 साल की थी, तब एक एक्सीडेंट में पिता के पैर में गंभीर चोट लग गई। अब पिता के लिए काम करना और भी मुश्किल हो गया था। इस तरह परिवार और भी ज्यादा आर्थिक संकटों से घिर गया था। तब पिता को समझाते हुए इन्होंने कहा कि हम सभी एक-दूसरे का सहारा बनेंगे। फिर ११ साल की उम्र में ही थिएटर स्कूल जॉइन कर लिया। यह स्कूल एक एजेंसी के रूप में काम करती थी, जो स्टूडेंट्स को लंदन में एक्टिंग जॉब दिलाने का काम दिलाता था।
बीच में ही छोड़ दी पढ़ाई
एक्टिंग में कॅरियर बनाने के लिए इन्होंने बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी। अब इनका पूरा फोकस अभिनय की नई-नई कलाओं को सीखने में रहता था। 12 साल की उम्र में ही इन्होंने पहली बार कैमरा फेस कर लिया था। अब ये विज्ञापन में भी नजर आने लगी थी। 1991 में टेलीविजन पर बीबीसी की बच्चों की साइंस फिक्शन सीरीज डार्क सीजन में सह कलाकार के रूप में किरदार निभाया। इन सबके बावजूद भी आर्थिक रूप से अभी भी कमजोर थी। इन्हें किसी भी काम से अच्छे पैसे नहीं मिले थे। इस तरह 16 साल की उम्र में ही पैसे के अभाव के चलते इन्हें थिएटर स्कूल छोडऩा पड़ा। 1992 में टेलीविजन फिल्म के लिए एक छोटा सा रोल मिला। उस समय उनका वजन करीब 85 किलोग्राम था, इसलिए इन्हें एक मोटी महिला का रोल मिला। फिल्म की डिमांड को देखते हुए डायरेक्ट ने इन्हें वजन कम करने के लिए कहा। 1993 में मेडिकल ड्रामा सीरीज में गेस्ट रोल किया।
पहली ही फिल्म सें छा गई
1994 में इन्हें ‘हेवनली क्रिएचर्स’ फिल्म में रोल मिला। इस रोल का पाने के लिए इन्होंंने भी 175 लड़कियों के साथ ऑडिशन दिया। इनके अभिनय से डायरेक्ट बहुत प्रभावी हुए। जब इनकी फिल्म मार्केट में आई तो न केवल अभिनय के लिए तरीफ मिली, बल्कि इन्होंने कई अवार्ड भी जीत लिए। फिल्म में इन्होंने जुलियट का रोल किया था। अपनी पहली ही फिल्म से ये फिल्म इंडस्ट्री में छा गई। इसके चलते इन्हें 1995 में इन्हें एमा थॉम्पसन और ह्यू ग्रांट के साथ बतौर सेकेंड लीड काम करने का मौका मिला। ‘सेंस एंड सेंसिबिलिटी’ नाम की इस फिल्म में इनका काम लोगों को इतना पसंद आया कि न सिर्फ इन्हें गोल्डन ग्लोब का नॉमिनेशन मिला, बल्कि इन्होंने ऑस्कर का अपना पहला नॉमिनेशन भी हासिल किया।
फिल्म पाने के लिए फिर भी करना पड़ा संघर्ष
1995 में जेम्स कैमरून अपनी फिल्म को लेकर अभिनेत्री की तलाश में थे। इन्होंने रोल पाने के लिए कई बार निर्देशक को फोन किया और चिट्टी लिखी लेकिन उनका जवाब नहीं मिला। इस तरह एक साल इंतजार करवाने के बाद 1996 में जेम्स ने अपनी दूसरी फिल्म ‘रोज’ का रोल इन्हें दिया। इस रोल के बाद ये कामयाबी की सीढिय़ां चढ़ती गई और जल्द ही एक टॉप अभिनेत्री बनी। जिस फिल्म के लिए जेम्स को अभिनेत्री की तलाश थी, वह टाइटेनिक थी और फिर यह रोल पाने वाली अभिनेत्री कोई और नहीं केट विंस्लेट है। 1997 में आई टाइटेनिक के पास आज भी सबसे ज्यादा अवॉड्र्स जीतने का रिकॉर्ड है। इस फिल्म के लिए डायरेक्टर जेम्स कैमरून को 14 नॉमिनेशन मिले थे। फिल्म को 11 ऑस्कर अवॉड्र्स मिले थे। केट के पास 6 ऑस्कर नॉमिनेशन है लेकिन 2009 में आई फिल्म ‘द रीडर’ के लिए इन्हें पहला ऑस्कर मिला था। यह फिल्म नाजी अनुभव से गुजरी महिला की संवेदनशील कहानी है। केट को एक एल्बम के लिए ग्रैमी पुरस्कार भी मिल चुका है। 2012 में अभिनेत्री को विश्व सिनेमा में उनके योगदान के लिए मानद पुरस्कार ‘सीजर’ से सम्मानित किया गया था।

Archana Kumawat
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