Kharmas 2020 विवाह वर्जित पर हो सकती हैं ऐसी शादियां, जानें खरमास में कर सकते हैं कौन से शुभ कार्य

सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास शुरू हो जाते हैं। इस माह में मांगलिक कार्यों की मनाही की गई है। इस बार खरमास प्रारंभ होने की तिथि पर मतभेद है। कुछ पंचांगों में 15 दिसंबर की रात से ही खरमास की शुरुआत बताई गई है जबकि कुछ पंचांगों में 16 दिसंबर की सुबह खरमास प्रारंभ होने की बात कही है। खरमास 14 जनवरी तक चलेंगे।

By: deepak deewan

Published: 16 Dec 2020, 09:29 AM IST

जयपुर. सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास शुरू हो जाते हैं। इस माह में मांगलिक कार्यों की मनाही की गई है। इस बार खरमास प्रारंभ होने की तिथि पर मतभेद है। कुछ पंचांगों में 15 दिसंबर की रात से ही खरमास की शुरुआत बताई गई है जबकि कुछ पंचांगों में 16 दिसंबर की सुबह खरमास प्रारंभ होने की बात कही है। खरमास 14 जनवरी तक चलेंगे।

खरमास (Kharmas 2020) पूजा—पाठ के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि माह में सूर्य पूजा सबसे फलदायी है। साथ ही विष्णुजी की पूजा भी करनी चाहिए। सूर्य के धनु राशि में जाने से ही खरमास शुरू होता है। सूर्य का यह राशि परिवर्तन प्रशासनिक, धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र से संबंधित लोगों के लिए लाभप्रद होता है।

खरमास में देवगुरू बृहस्पति अस्त रहते हैं इसलिए मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। गुरू अस्त होने से विवाह करना वर्जित है। सगाई करना, नया व्यवसाय प्रारंभ करना, नए मकान में प्रवेश करना भी वर्जित है। ये काम खरमास में कल्याणकारी नहीं माने जाते। इस मास में गृह निर्माण प्रारंभ करना भी वर्जित है। मान्यता है कि खरमास में बनाए गए मकानों में सुख नहीं मिलता।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार इस अवधि में पहले से तय अन्नप्राशन, जातकर्म आदि काम बदस्तूर किए जा सकते हैं। गृह निर्माण कार्य चल रहा हो तो उसे नियमित रूप से कराया जा सकता है। खास बात यह है कि इस माह में जहां पारंपरिक विवाह वर्जित हैं वहीं प्रेम विवाह किए जा सकते हैं। पौराणिक ग्रंथों में खरमास में गंधर्व विवाह का विधान किया गया है।

खरमास में दान करना बहुत पुण्यदायी माना गया है। इसके साथ ही खरमास में मंत्र जाप जरूर करना चाहिए। खरमास के दौरान रोज सुबह पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करने से धीरे-धीरे सभी समस्याएं खत्म होने लगेंगी। खरमास में नियमित रूप से पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी की एक साथ पूजा करने से आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

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