ड्रैगन के कब्जे में किशनगढ़ मार्बल मंडी

कैसे बने आत्मनिर्भर भारत: मार्बल और ग्रेनाइट कटर में प्रयुक्त 70-80 फीसदी टूल्स मैड इन चाइना कालीचरण मदनगंज-किशनगढ़ . एशिया की सबसे बड़ी किशनगढ़ मार्बल मंडी पर चीन ने कुछ सालों में ही अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। चीन इन दिनों मार्बल और ग्रेनाइट कटर में काम में आने वाले 70 से 80 प्रतिशत टूल्स केवल मार्बल मंडी के लिए ही निर्यात करता है। इसके अलावा उसने पांच साल में ही भारतीय मार्बल और ग्रेनाइट की तर्ज पर ही आर्टिफिशल मार्बल और ग्रेनाइट उद्योग भी विकसित कर लिया है। यदि देसी टूल्स इंडस्ट्रीज विकसित ह

By: Sudhir Bile Bhatnagar

Updated: 22 Jun 2020, 05:57 PM IST


मार्बल औद्योगिक क्षेत्र में 450 से 500 मार्बल और ग्रेनाइट कटर मशीनें हैं। यहां मार्बल और ग्रेनाइट पत्थर के ब्लॉक की चिराई तथा प्रोसेसिंग कर स्लैब तैयार किए जाते हैं। इन कटर मशीनों में 10 ब्लैड्स के एक सेट से पत्थर की चिराई की जाती है और पत्थर की प्रोसेसिंग के लिए डायमंड सैगमेंट का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन बीते कुछ सालों से तो मैड इन चाइना की ही कटर मशीनें भी आयात की जाने लगी हैं। किशनगढ़ मार्बल मंडी की बात करें तो यहां 70 से 80 फीसदी टूल्स मैड इन चाइना का ही इस्तेमाल में लिया जा रहा है।
नई टूल्स इंडस्ट्रीज हो विकसित : भारत सरकार को इटली या अन्य देशों से आयातित टूल्स इत्यादि वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी कम करनी चाहिए। साथ ही चीन से आयातित वस्तुओं की कस्टम ड्यूटी बढ़ानी चाहिए। नई टूल्स इंडस्ट्रीज को भी विकसित किया जाना चाहिए। अनिल गोयल, उद्यमी इम्पोर्टेड मार्बल।
किशनगढ़ मार्बल मंडी में पांच साल में पसारे पांव
किशनगढ़ मार्बल मंडी में पांच साल पहले चाइना से नैनो वाइट मार्बल (कृत्रिम और आर्टिफिशियल मार्बल) के रूप में पैर जमाने शुरू किए और अब नैनो वाइट मार्बल के साथ ही कई रंगों और डिजाइनों में भी ग्रेनाइट पत्थर उपलब्ध करवा रहा है। अब मंडी में प्रति माह करोड़ों का कारोबार स्थापित कर चुका है। जहां शुरुआत में इक्के-दुक्के उद्यमी भी यह कारोबार
करते थे, लेकिन अब ऐसे उद्यमियों की संख्या 50 से अधिक हो चुकी है।
चीनी कारोबार...
मंडी में वर्तमान में 50 प्रतिशत से ज्यादा मशीनें चीन की ही उपयोग में लाई जा रही हैं। कटर मशीनें सालाना करीब 25 करोड़ की आयातित की जा रही हैं। मार्बल मंडी के उद्यमी ज्यादातर टूल्स के लिए चीन पर ही निर्भर हैं।
डायमंड सैगमेंट और प्रोसेसिंग मशीनें चीन करता है निर्यात
कटर मशीनें 02 करोड़ से अधिक प्रतिमाह
डायमंड सैगमेंट 6.30 करोड़ प्रतिमाह
कटर ब्लैड्स 1.50 करोड़ प्रतिमाह
पॉलिस बट्टियां 03 करोड़ प्रतिमाह
नैनो मार्बल स्लैब 15 करोड़ प्रतिमाह
कलर ग्रेनाइट 01 करोड़ प्रतिमाह
देशी टूल्स इंडस्ट्रीज को मिले प्रोत्साहन
केंद्र के साथ ही राज्य सरकारों को भी देशी और स्थानीय टूल्स इंडस्ट्रीज स्थापित करने में आगे कदम बढ़ाना होगा। मशीनों और टूल्स की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शोध और अनुसंधान की शुरुआत होनी चाहिए। सरकारों को अब नई टूल्स इंडस्ट्रीज के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहित करना होगा और उद्योग लागत को कम करना होगा। तभी नए उद्यमी आगे आएंगे और यह उद्योग विकसित हो सकेगा।
चीन पर लगे अंकुश
&केंद्र सरकार को चीन से आयातित होने वाले माल को कम करना चाहिए या फिर बंद करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। चीन पर अंकुश लगाने के लिए आयातित माल पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने का भी फैसला भी सार्थक साबित होगा। अतुल लुहाडिय़ा, उद्यमी इम्पोर्टेड मार्बल

Sudhir Bile Bhatnagar
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