Sharad Purnima 2020 Laxmi Puja Importance कई सालों के बाद मिल पाएगा लक्ष्मी पूजन का ऐसा मौका, जानिए क्या है महत्व

आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है। लक्ष्मी पूजन के लिए यह बहुत खास दिन होता है। मान्यता है कि इस दिन धन की देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। यह भी कहा जाता है कि इस दिन माता लक्ष्मी धरती पर आती हैं। वे जिस घर में रोशनी में किसी को जागते हुए देखती हैं वह घर उनका स्थायी निवास बन जाता है।

By: deepak deewan

Published: 28 Oct 2020, 06:02 PM IST

जयपुर. आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है। लक्ष्मी पूजन के लिए यह बहुत खास दिन होता है। मान्यता है कि इस दिन धन की देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। यह भी कहा जाता है कि इस दिन माता लक्ष्मी धरती पर आती हैं। वे जिस घर में रोशनी में किसी को जागते हुए देखती हैं वह घर उनका स्थायी निवास बन जाता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि पंचांगों में आश्विन पूर्णिमा तिथि दो दिन 30 अक्टूबर और 31 अक्टूबर को दर्शाई गई है। 30 अक्टूबर को शाम करीब 6 बजे पूर्णिमा लग जाएगी जोकि 31 अक्टूबर को रात को करीब 8 बजे तक रहेगी। हालांकि शरद पूर्णिमा 30 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी क्योंकि इसी दिन रातभर पूर्णिमा तिथि रहेगी। अगले दिन शनिवार को दिन में पूर्णिमा तिथि रहेगी। इस अवधि में स्नान—दान कर सकते हैं।

इस बार शरद पूर्णिमा पर बन रहे संयोग ने पर्व की शुभता में वृद्धि कर दी है। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार इस बार शरद पूर्णिमा शुक्रवार को है। शुक्रवार लक्ष्मीजी का प्रिय दिन है। शुक्रवार के दिन शरद पूर्णिमा होने से इस दिन लक्ष्मी पूजन का महत्व बढ़ गया है। 30 अक्टूबर 2020 को बन रहा शुक्रवार पर शरद पूर्णिेमा का संयोग अब पूरे 13 बाद बन पाएगा।

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