मुश्किल परिस्थितियों में भी नहीं टेके घुटने, फिर बनें सफल उद्यमी

परिवार के आर्थिक हालातों को देखते हुए बीच में ही पढ़ाई छोडक़र नौ वर्ष की आयु में इन्होंने छोटे-मोटे काम करना शुरू किया। ओसाका इलेक्ट्रिक लाइट कंपनी की नौकरी छोडक़र नई कंपनी शुरू की। इन्होंने अपने प्रोडक्ट के कई सैंपल बनाएं। ये स्वयं ही थोक विक्रेताओं के पास जाकर सॉकेट बेचने लगते लेकिन हर बार इन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता।

By: Archana Kumawat

Published: 15 Jul 2020, 07:08 PM IST

इनका जन्म 1894 में जापान के वाकायामा प्रांत में हुआ था। पिता गांव के जमींदार थे। इसलिए इनके लालन-पालन में भी किसी तरह की कोई कमी नहीं थी लेकिन किसे पता था कि अब ये वैभव और सुख कुछ दिनों के ही रह गए है। अचानक से दिन ऐसे फिरे की एक ही झटके में इनका सबकुछ बदल गया। 1899 में पिता के निवेश का एक निर्णय इतना गलत साबित हुआ कि परिवार को सबकुछ बेचकर किसी अन्य स्थान पर जाना पड़ा। इनका परिवार अब ऐसी जगह पर रहने के लिए मजबूर हो गया, जहां मानव जीवन की आधारभूत सुविधाएं भी नहीं थी। परिवार के आर्थिक हालातों को देखते हुए बीच में ही पढ़ाई छोडक़र नौ वर्ष की आयु में इन्होंने छोटे-मोटे काम करना शुरू किया। इस दौरान इन्हें एक दुकान में नौकरी मिल गई। अब जीवन बिल्कुल बदल चुका था। सूरज की पहली किरण के साथ ही ये उठते और दुकान के कामों में व्यस्त हो जाते। दुकान के साथ ही मालिक के घरेलू काम भी किया करते थे। ये अपना काम पूरी ईमानदारी और मेहनत से कर रहे थे लेकिन दुकान में अच्छा मुनाफा न होने के कारण मालिक ने एक साल बाद ही इन्हें नौकरी से निकाल दिया।
सुधरने लगे थे हालात
नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटकने के बाद आखिरकार ओसाका इलेक्ट्रिक लाइट कंपनी में इन्हें नौकरी मिल गई। इनकी मेहनत को देखते हुए अगले दो सालों में कंपनी में इन्हें आगे बढऩे के कई मौके दिए। इसी बीच इन्होंने शादी भी कर ली। अब इनका नया परिवार था और ये अपनी नई जिम्मेदारियों को भी अच्छी तरह से समझ गए थे। इसलिए काम पर भी इनका फोकस बढ़ गया था। 22 साल की उम्र में ही ये इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर बन गए थे। इलेक्ट्रिसिटी पर अब नई प्रयोग करना भी शुरू कर दिए थे। इसी दौरान इन्होंने नया इलेक्ट्रिकल सॉकेट बनाया। जब इसे लेकर ये अपने बॉस के पास गए तो उन्होंने कोई रुचि नहीं दिखाई। बॉस ने इनके आइडिया को रिजेक्ट करते हुए कहा कि ये आइडिया बिल्कुल नहीं चलेगा। लेकिन इन्हें अपने इलेक्ट्रिकल सॉकेट पर पूरा भरोसा था।
फिर से किया गरीबी का सामना
वर्ष 1917 में इनहोंने ओसाका इलेक्ट्रिक लाइट कंपनी की नौकरी छोडक़र नई कंपनी शुरू की। कंपनी शुरू करते समय इनके पास न तो किसी तरह की पूंजी थी और न ही व्यावसायिक शिक्षा, इनके पास सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग का अनुभव था। इसलिए इनके साथियों को लगा कि ऐसी कंपनी तो शुरू होने से पहले ही विफल हो जाएगी। इनमें कुछ नया करने का जुनून था। घर के बेसमेंट में ही इन्होंने एक शॉप खोली। इसमें इनकी पत्नी, रिश्तेदार और कुछ लोग जुड़ गए। इन्होंने अपने प्रोडक्ट के कई सैंपल बनाएं। ये स्वयं ही थोक विक्रेताओं के पास जाकर सॉकेट बेचने लगते लेकिन हर बार इन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता। असल में इनके पास एक ही तरह का प्रोडक्ट होता है। कुछ महीनों तक यू ही चलता रहा लेकिन ये निराश नहीं हुए। इनके प्रोडक्ट की तकनीक को देखते हुए कुछ ऑर्डर तो मिलना शुरू हुआ लेकिन घर चलाने के लिए ये पैसे काफी नहीं थे। एक बार फिर से ये आर्थिक हालातों से घिरने लगे। इनके हालातों को देखते हुए को-वर्कर्स ने भी साथ छोड़ दिया। दिनों दिन स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि घर चलाने के लिए अब घर का सामान भी बिकने लगा था।
फिर कमाया दुनियाभर में नाम
घर के हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे थे। ऐेसे में सबने इन्हें फिर से नौकरी करने की सलाह दी लेकिन अपने प्रोडक्ट पर इतना विश्वास था कि ये परिस्थितियों के आगे घुटना टेकने को तैयार नहीं दे। इनकी इसी जिद्द को देखते हुए एक दिन किस्मत भी बदल गई जब इन्हें एक हजार पीसेस का पहला ऑर्डर मिला। इसके बाद इन्होंने जीवन में कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा। इनके प्रोडक्ट की अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मांग होने लगी। आज इस कंपनी में हजारों लोग काम करते हैं और इसका टर्न ऑवर भी बिलियन डॉलर्स में है। यह व्यक्ति कोइ्र और नहीं बल्कि पैनासॉनिक कंपनी के संस्थापक कोनोसुके मात्सुशिता थे। 1989 में 94 साल की उम्र में इनका निधन हो गया था, उस समय कंपनी का रेवेन्यू बिजनेस 42 बिलियन यूएस डॉलर था।

Archana Kumawat Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned