पारा 45 डिग्री, तीन-चार घंटे पीपीइ किट पहनना कड़ी परीक्षा

- लैब टेक्निशियन हो या एम्बुलेंसकर्मी गर्मी में कर रहे ड्यूटी
- चिलचिलाती गर्मी में किट पहनने से हो रही मुश्किल

 

By: Avinash Bakolia

Published: 28 May 2020, 04:23 PM IST

जयपुर. पारा दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। 45 डिग्री तापमान में पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीइ) किट पहनकर काम करना बहुत ही परेशानी वाला हो रहा है। तीन-चार घंटे तक किट पहनकर इस भीषण गर्मी में सैम्पल लेना किसी चुनौती से कम नहीं है। हमेशा पूरा शरीर और कपड़े पसीने से तर रहता है। यह दर्द है कोरोना महामारी में क्षेत्र में पीपीइ किट पहनकर काम करने वाले कोरोना योद्धाओं का। बेसिक लाइफ एम्बुलेंस चालक से लेकर सैम्पल ले रहे लैब टेक्निशियन सबका हाल इन दिनों खराब है। हालत यह हो गई है कि पसीने के दौरान कई लैब टेक्निशियनों के शरीर पर रेशेज हो गए हैं। इतना ही नहीं प्यास के मारे हलक सूख जाता हैं, लेकिन मजबूरी है पीपीइ किट को उतार नहीं सकते। पिछले दिनों गर्मी की वजह से कई लैब टेक्निशियनों की तबीयत खराब हो गई थी।

हो सकता है डिहाइडे्रशन
मालवीय नगर सेक्टर-6 स्थित डिस्पेंसरी में सैम्पल ले रहे पवन, राकेश और राजकुमार ने बताया कि बढ़ते हुए तापमान में सैम्पलिंग का काम करना बहुत मुश्किल हो रहा है। पूरा शरीर पसीने में भीग जाता है। फेस मास्क, कैप के कारण सांस लेने में बहुत परेशानी होती है। एक बार किट पहनने के बाद पानी भी नहीं पी सकते। किट पहनने के बाद पसीने ज्यादा आते हैं। लगातार पसीने निकलने और पानी नहीं पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन हो सकता है।

एक बार किट पहन लिया तो टॉयलेट भी नहीं जा सकते
लैब टेक्निशियन राहुल शर्मा ने बताया कि सैम्पल देने लोग आए या नहीं आए हमेशा किट पहनकर रखनी जरूरी है। इसे एक बार पहन लिया तो उतार नहीं सकते। इस गर्मी में तीन-चार घंटे तक किट पहनकर रखने में परेशानी हो रही है, फिर भी कोरोना में लोगों की सेवा जरूरी है। यदि किट पहनने से पहले ज्यादा पानी पी लिया तो टॉयलेट जाना पड़ता है। जबकि किट पहनने के बाद टॉयलेट भी नहीं जा सकते। उन्होंने बताया कि टॉयलेट नहीं जाने से यूरिन इंफेक्शन भी हो गया है।

धूप में बढ़ जाता है एम्बुलेंस का तापमान, जलने लगती हैं आंखें

अशोक नगर थाना स्थित 108 एंबुलेंस के इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन मुकेश शर्मा और पायलेट विजय गुर्जर बताते हैं कि क्वारंटीन सेंटर से गंभीर मरीजों को कोविड हॉस्पिटल में छोडऩा होता है। पीपीई किट ने परेशान कर दिया है। गर्मी में मरीजों को एम्बुलेंस में लेकर जाना होता है। धूप में एम्बुलेंस का तापमान और भी अधिक बढ़ जाता है। दो-तीन मास्क पहनकर सांस लेना मुश्किल हो जाता है। तेज सांस लेनी होती है, लेकिन सांस तेज या जोर से लेने पर गर्म सांस से चश्मे में भांप जम जाती है, जिससे आंखों में जलन भी होती है। किट के नीचे पहने पेंट, शर्ट बिल्कुल गीले हो जाते हैं। इन्हें दिन में कई बार बदलना पड़ता है। लैब टेक्निशियन अलका शर्मा कहती हैं कि लगातार किट पहनने से फंगल इंफेक्शन होने की संभावना बनी रहती है। बाहर की हवा तक नहीं लगती है। तीन-चार घंटे पहनने से हाथों में नमी रहती है।

इनका कहना है-
गर्मी में लैब टेक्निशियनों को परेशानी तो हो ही रही है। सैम्पल लेने वाली टीम के पानी, छाछ की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही जहां टीम सैम्पल लेने जा रही है वहां पर कूलर और पंखे रखवाए जा रहे हैं।
- डॉ. नरोत्तम शर्मा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जयपुर प्रथम

Avinash Bakolia Reporting
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