पितलिया के चुनाव मैदान से हटते ही सियासी बवाल, कथित ऑडियो-चिट्ठी वायरल, CM से सुरक्षा मांगी

भीलवाड़ा जिले की सहाड़ा विधानसभा सीट से भाजपा के बागी लादूलाल पितलिया ने शुक्रवार को जैसे ही नामांकन वापस लिया, राजनीतिक बवाल मच गया।

By: santosh

Published: 03 Apr 2021, 09:53 AM IST

भीलवाड़ा/जयपुर। भीलवाड़ा जिले की सहाड़ा विधानसभा सीट से भाजपा के बागी लादूलाल पितलिया ने शुक्रवार को जैसे ही नामांकन वापस लिया, राजनीतिक बवाल मच गया। पितलिया नामांकन वापसी के लिए अपने पुत्र के साथ दोपहर 12.10 बजे निर्वाचन अधिकारी कार्यालय परिसर के पिछले दरवाजे से घुसे थे। इस बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को गत 30 मार्च को उनकी ओर से लिखी कथित चिट्ठी और कार्यकर्ता से बातचीत का कथित ऑडियो वायरल हो गया।

चिट्ठी में उन्होंने मुख्यमंत्री से खुद की और परिवार की सुरक्षा की मांग की। भाजपा पर नामांकन वापसी का दबाव बनाने और धमकाने के आरोप लगाए। चिट्ठी में लिखा है कि कर्नाटक की भाजपा सरकार की ओर से मेरे बेंगलूरु स्थित आवास और प्रतिष्ठान पर दबाव बनाया जा रहा है। मैं नाम वापस ले लूं, इसके लिए परिजन को प्रताडि़त किया जा रहा है। ऑडियो में वह अपने कार्यकर्ता से भाजपा हाईकमान की ओर से नामांकन वापसी का बहुत दबाव होने की बात कह रहे हैं।

नामांकन वापसी की अर्जी लगाने गुपचुप दफ्तर पहुंचे पितलिया तेजी से बाहर निकले और जनता व मीडिया की पहुंच से दूर हो गए। रात तक उनसे सम्पर्क नहीं हो सका। उनके पुत्र ने भी अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। चिट्ठी और ऑडियो वायरल होते ही कांग्रेस और भाजपा नेताओं के एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए। पितलिया उपचुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे। टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर 30 मार्च को निर्दलीय पर्चा भरा था।

अब क्या गला काटोगे:
नाम वापसी से ठीक पहले सोशल मीडिया पर सुरक्षा की मांग वाली सीएम के नाम चिट्ठी और एक ऑडियो वायरल हुआ। इसके कुछ मिनट बाद भाजपा के प्रदेश मंत्री एवं सहाड़ा चुनाव प्रभारी श्रवण सिंह बगड़ी के साथ पितलिया निर्वाचन कार्यालय में देखे गए। नाम वापसी के बाद बेटा विकास हाथ पकड़कर पितलिया को तेजी से बाहर ले गया। बाहर मीडियाकर्मी बातचीत के लिए पितलिया की तरफ दौड़े तो उनके पुत्र ने रोक दिया। विकास और मीडियाकर्मियों के बीच कहासुनी भी हुई लेकिन पितलिया से बात नहीं हो सकी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पितलिया ने बाहर निकलते समय सामने खड़े लोगों से कहा कि अब तो मैंने नाम भी वापस ले लिया, अब क्या गला काटोगे? पर्चा भरने के बाद से ही पितलिया पर नाम वापस लेने का दबाव होने की चर्चाएं थी।

अंजाम भुगतना होगा, खतरनाक लोग:
चिट्ठी में कर्नाटक की भाजपा सरकार पर दबाव बनाने के आरोप के साथ लिखा है कि वहां मेरे गारमेंट के सभी प्रतिष्ठानों को अनधिकृत रूप से बंद करा दिया गया। परिजन को धमकी दी जा रही है कि फार्म विड्रॉ नहीं किया तो अंजाम भुगतना होगा। हम बहुत खतरनाक लोग हैं। हमने हमारे विरोधियों को पूरे देश में ईडी, आइटी, सीबीआइ, इनसे इसी तरह प्रताडि़त किया है, उनसे पूछ लो। पत्र के आखिर में मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया कि मेरी तथा परिवार की जान-माल की राजस्थान और कर्नाटक में रक्षा की जाए।

चिट्ठी कांग्रेस का षड्यंत्र:
पितलिया के साथ मैं ही निर्वाचन कार्यालय गया था। हमने नाम वापसी के लिए उन्हें मना लिया। वह पार्टी के कार्यकर्ता हैं और स्वेच्छा से नामांकन वापस लिया। दबाव का आरोप गलत है। चिट्ठी फर्जी है। यह कांग्रेस का षड्यंत्र है।

- श्रवण सिंह बगड़ी, प्रदेश मंत्री एवं चुनाव प्रभारी, भाजपा

पितलिया को डराया गया:
नीति और नैतिकता का स्वांग रचने वाली भाजपा को हार का डर इस कदर सता रहा है कि पितलिया को डरा-धमका कर नामांकन वापस करवा लिया। भाजपा ने राजनीति में अनैतिकता के हदें पार करने का बीड़ा उठा रखा है। आगे-आगे देखो होता है क्या।

- गोविन्द सिंह डोटासरा, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
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मान-सम्मान रखेंगे:
पितलिया के नाम पर पार्टी ने गंभीरता से विचार किया लेकिन सर्वसम्मति से रतनलाल जाट को प्रत्याशी बनाया गया। पितलिया को पार्टी ने कहा है कि उनका मान-सम्मान रखा जाएगा। उचित जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्होंने बिना शर्त अपना नामांकन वापस ले लिया।

- सतीश पूनिया, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
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नाम वापसी का आज अंतिम दिन:
तीन सीटों पर हो रहे उपचुनाव में नाम वापसी का शनिवार को अंतिम दिन है। इसके बाद मुकाबले की आखिरी तस्वीर साफ हो जाएगी।

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2.20 मिनट ऑडियो: ऊपर से बहुत दबाव:

- कार्यकर्ता: भाई यहां कुछ लोग बैठे हैं। उनका कहना है कि मोबाइल बन्द है लेकिन मैंने कहा मोबाइल बन्द तो न हो सके।
- पितलिया: मोबाइल बन्द था, वह सही कह रहे हैं। मैंने अभी चालू किया है ताकि कार्यकर्ताओं को फोन कर बता दूं। कुल मिलाकर मुझे तकलीफ दी है, उसे सब समझ जाओ, ठीक है।

- कार्यकर्ता: अब क्या फार्म वापस उठाओ...।
- पितलिया: दबाव डाल रहे हैं, फार्म उठाने के लिए ही दबाव डाल रहे हैं। नीचे (स्थानीय) से नहीं ऊपर से दबाव पड़ रहा है। नीचे से ऊपर तक फोर्स कर दिया है। चैनल से चैनल चल रहा है। यहां अपने नेताजी को चुनाव जीतने के लिए दबाव शुरू किया कि लादूलाल को कैसे नीचे लेकर आए। गला पकडऩे जैसी स्थिति हो गई है। यहां से कहते-कहते हुए सीधे हाई कमान तक चला गया है। वहां से दबाव डाला। सो बात की, एक ही बात... फार्म उठा लो। साम-दाम चाहे जो लगा दो, यहां राजनीति है। इधर-उधर चारों तरफ से परेशान करने की राजनीति चल रही है।

- कार्यकर्ता: ये डर गए कि अबकी बार लादूलालजी का वर्चस्व ज्यादा है।
- पितलिया: चुनाव 2023 में आ रहे हैं। जनता वही है, जनता कहीं नहीं जाएगी।

- कार्यकर्ता: हां... हां...।
- पितलिया: करा कई, ऊपर से दबाव डाल रहे हैं। परिवार...।

- कार्यकर्ता: वही बात है, 2023 में भी फेर वही करेंगे। दबाव डालेंगे।
- पितलिया: नहीं-नहीं, दबाव न चाल... जनता जवाब दे देगी। वोट तो जनता के हाथ में है। परिवार में तकलीफ आ जाए किसन भाई, अब क्या करें।

- कार्यकर्ता: सही बात है, परिवार पहले, फिर दूसरा।
- पितलिया: वे 200 सीट का चुनाव अलग है। यह उपचुनाव अलग है।

- कार्यकर्ता: हां... आपनो तो परिवार पहले।
- पितलिया: न्यूज आ गई कई...।

- कार्यकर्ता: आप बैंगलोर ही हो या...।
- पितलिया: हां... यहीं पर हूं...।

- कार्यकर्ता: चलो ठीक है।
- पितलिया: न्यूज देख ली क्या?

- कार्यकर्ता: न्यूज देखी, कल पेपर में आई। मेरे व्हाट्सअप पर खबर देखी, या तो न हो सके। अभी कारखाना पर पांच-सात जना आया। उन्होंने कहा कि फोन बन्द है। तो ऐसे तो नहीं हो सकता। फोन लगाओ तो बन्द हो। ध्यान रखना।
- पितलिया: ठीक है।

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