Lalita Shashti : संतान का सौभाग्य और सुख बढ़ाता है ये व्रत, कम करता है कष्ट

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी के दिन ललिता षष्ठी व्रत रखा जाता है। देशभर में यह दिन अलग-अलग पर्व के रुपों में मनाया जाता है। इस दिन मां ललिता का पूजन करते है। संतान के सुख एवं उसके सौभाग्य के लिए इस व्रत का बहुत महत्व है।

By: deepak deewan

Published: 24 Aug 2020, 10:33 AM IST

जयपुर. भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी के दिन ललिता षष्ठी व्रत रखा जाता है। देशभर में यह दिन अलग-अलग पर्व के रुपों में मनाया जाता है। इस दिन मां ललिता का पूजन करते है। संतान के सुख एवं उसके सौभाग्य के लिए इस व्रत का बहुत महत्व है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इस दिन मां ललिता के साथ स्कंदमाता और शिवजी की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विश्वासपूर्वक मां ललिता देवी की पूजा करने से उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। माता ललिता पार्वतीजी का रूप मानी जाती हैं तथा ऐश्वर्य की कारक मानी जाती हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार संतान प्राप्ति के लिए भी यह व्रत शीघ्र फलदायक होता है। यही कारण है कि इसे संतान षष्ठी व्रत भी कहा जाता है। संतान के कष्ट दूर करने या उनकी अन्य परेशानियों को खत्म करने के लिए भी इस व्रत का महत्व है। मान्यता है कि पुत्रवती महिलाओं को यह व्रत जरूर करना चाहिए।

इस दिन माता ललिता की विधिविधान से पूजा करें। ललिता माता को मिष्ठान्न का भोग लगाएं। मालपुआ, हलवा, खीर आदि बनाकर प्रसाद के रूप में वितरित करें। विश्वासपूर्वक की गई मां ललिता की पूजा जरूर फलदायी होगी. उनकी प्रसन्नता से जीवन में सर्वसुख एवं समृद्धि के साथ ही शांति भी प्राप्त होगी।

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