scriptLaw and order is deteriorating due to half-heartedness in police | Rajasthan: थानों में आधी-अधूरी नफरी से बिगड़ रही कानून व्यवस्था | Patrika News

Rajasthan: थानों में आधी-अधूरी नफरी से बिगड़ रही कानून व्यवस्था

अपराध पर अंकुश से ज्यादा अब कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। सैकड़ों-हजारों की भीड़ कब-कहां जुट जाए और उपद्रव करने लगे, पता नहीं चलता। करौली, जोधपुर, उदयपुर में हाल ही में हुई कुछ घटनाएं प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

जयपुर

Published: July 03, 2022 08:05:38 pm

अपराध पर अंकुश से ज्यादा अब कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। सैकड़ों-हजारों की भीड़ कब-कहां जुट जाए और उपद्रव करने लगे, पता नहीं चलता। करौली, जोधपुर, उदयपुर में हाल ही में हुई कुछ घटनाएं प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

पुलिस बेडे में भारी फेरबदल
पुलिस बेडे में भारी फेरबदल

उधर, पुलिस महकमे की बात करें तो थानों में नफरी, स्वीकृत तो दूर आधी भी नहीं है। जो स्टाफ है उसपर पर दस गुना भार है। यही कारण है कि पुलिस का अनुसंधान, बीट प्रणाली, कानून-व्यवस्था, सूचना तंत्र सबकुछ प्रभावित हो रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में कहा था कि शहरी थानों में 60 और ग्रामीण में 45 पुलिसकर्मियों की तैनाती आवश्यक है। लेकिन नफरी का यह संतुलन राजधानी सहित सभी जगह बिगड़ा हुआ है।


इसलिए अनुसंधान में लगता है समय
थानों में दर्ज अधिकांश मुकदमों की जांच उपनिरीक्षक या सहायक उपनिरीक्षक करते हैं। लेकिन पुलिस कमिश्नरेट में 668 उपनिरीक्षक पदों की स्वीकृति के तुलना में 244 ही मौजूद है। वहीं सहायक उप निरीक्षक के स्वीकृत 1212 पदों की तुलना में 519 ही मौजूद हैं। हेड कांस्टेबल के 2328 में से 538 पद खाली हैं। थानों में एफआइआर दर्ज नहीं करने के पीछे एक यह भी कारण है कि अनुसंधान अधिकारी ही पर्याप्त संख्या में नहीं है।

पुलिसकर्मियों पर दस गुना अधिक कार्यभार
कमिश्नरेट के पूर्व और दक्षिण जिलों के अधिकांश थाने तो वीवीआइपी मूवमेंट, रूट-लाइनिंग, धरने-प्रदर्शनों व कानून व्यवस्था बनाए रखने में जूझते रहते हैं। ऐसे में परिवादी कई-कई दिनों तक थानों के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाते हैं। उधर, मौजूद स्टाफ पर कार्यभार की बात करें तो एक पुलिसकर्मी से दस के बराबर काम कराया जा रहा है। जैसे कि कोतवाली थाने में 11 उपनिरीक्षक का काम एक उपनिरीक्षक संभाल रहा है। इसी तरह 20 सहायक उपनिरीक्षक का काम दो कर रहे हैं। यही स्थिति हेड कांस्टेबल, कांस्टेबलों की है।

राजधानी में यह हाल

पुलिस कमिश्नरेट का एक भी थाना ऐसा नहीं जहां स्वीकृत पदों के मुताबिक नफरी हो। ज्यादातर थानों में तीस का ही स्टाफ है। शहर के कोतवाली, माणकचौक व रामगंज थाने में क्रमश: 143,143 और 141 की नफरी स्वीकृत है। परंतु यहां पर क्रमश: 45,40 और 52 का स्टाफ ही तैनात है। इन संवेदनशील इलाकों में पुलिसकर्मियों की इतनी कम तैनाती से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनपर कार्य का भार कितना अधिक होगा।

संवेदनशील थानों में यह है स्थिति

थाना स्वीकृत मौजूद

भट्टा बस्ती 56 38

शास्त्री नगर 72 44

सांगानेर 70 34

कोतवाली 143 45

माणकचौक 143 40

रामगंज 141 52

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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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