जहां कदम रखा, वहां ही अपनी दूरदृष्टि से पाई सफलता

टेक्सटाइल बिजनेस से ट्रेडिंग कंपनी शुरू की और फिर इलेक्ट्रॉनिक में बनाई अपनी पहचान

By: Archana Kumawat

Published: 15 Jul 2020, 09:06 PM IST

इनका जन्म 1910 में साउथ कोरिया में हुआ था। ये अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था और किसी तरह की कोई कमी नहीं थी इसलिए बचपन बहुत ही आराम से बिता। स्कूली शिक्षा इन्होंने अपने दादा के प्राइवेट स्कूल से ही प्राप्त की थी। मिडिल स्कूल सियोल से किया। मिडिल स्कूल के दौरान इन्होंने मार्डन साइंस का अध्ययन किया। आगे की पढ़ाई के लिए इन्होंने जापान की यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया लेकिन डिग्री पूरी किए बिना ही इन्हें यूनिवर्सिटी छोडऩी पड़ी।
कम उम्र में ही किया बिजनेस
पिता की मृत्यु के बाद बीच में ही पढ़ाई छोड़ते हुए इन्होंने बिजनेस शुरू किया। अपने ही टाउन में इन्होंने एक चावल की मील शुरू की लेकिन दुर्भाग्य से बिजनेस चल नहीं पाया और कुछ ही समय के बाद मील को बंद करना पड़ा। 1938 में इन्होंने एक ट्रकिंग बिजनेस शुरू किया, जो कि एक टेडिंग कंपनी थी। इसका काम कोरिया और अन्य देशों में ताजी मछलियां, फल और सब्जियां पहुंचाना था। बिजनेस आराम से चल रहा था। करोबार के विस्तार के लिए 1947 में फर्म ने सियोल में अपना मुख्यालय बनाया लेकिन 1950 में कोरियाई युद्ध छिड़ गया। युद्ध के दौरान देश की अर्थव्यवस्था को जो नुकसान हुआ था, उसे फिर से मजबूत बनाने के लिए सरकार ने नए सिरे प्रयास किए। ऐसे में इन्होंने टे्रडिंग कंपनी के साथ ही टेक्सटाइल के बिजनेस पर फोकस किया और यह विचार किया कोरिया में बहुत बड़ी वुलन मील शुरू की। इनका लक्ष्य देश के औद्योगिकरण को बढ़ावा देना था।
तेजी से किया कंपनी का विस्तार
अगले तीन दशकों में इनकी ट्रेङ्क्षडंग कंपनी तेजी से उभरी। इस कंपनी ने टे्रडिंग और टेक्सटाइल के साथ अब इंस्योरेंस, सिक्योरिटी और रिटेल के क्षेत्रों में भी कदम रखा। 1969 में कंपनी ने इलेक्ट्रोनिक्स की शुरुआत की लेकिन उस समय कंपनी इस क्षेत्र में काफी छोटी थी। 1972 में कंपनी ने अपना पहला इलेक्ट्रोनिक प्रोडक्ट लॉन्च किया, जो एक ब्लैक एंड वाइट टीवी था। फिर आगे चलकर रेफ्रिजरेटर, माइक्रोवेव, कलर टीवी एवं अन्य कई तरह के प्रोडक्ट को लॉन्च किया। वर्ष 1981 तक कंपनी 10 मिलियन से ज्यादा ब्लैक एंड वाइट टीवी का निर्माण कर चुकी थी। इलेक्ट्रोनिक में अपनी पहचान बनाने के बाद कंपनी ने टेली कम्यूनिकेशन में कदम रखा। 1986 में इनके मार्गदर्शन में कपंनी ने एससी 100 नाम का पहला बिल्ट इन कार फोन बनाया। आगे चलकर यह कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी बनी। मोबाइल के अलावा कंपनी ने माइक्रोचिप चिप निर्माणके क्षेत्र में भी किस्मत आजमाई। आज यह विश्व नंबर एक चिप निर्माता कंपनी बन गई है। ट्रेडिंग कंपनी के रूप में शुरू हुई इस कंपनी का नाम सैमसंग है, जिसे अलग-अलग क्षेत्रों अपनी दूरदृष्टि से लोकप्रिय ब्रांड बनाने वाले ये व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि ली युंग-चुल थे। 1987 में सैमसंग को अपने जीवन के 50 साल देने के बाद फेफड़ों के कैंसर के कारण ली युंग-चुल का निधन हो गया। इनकी बनाई हुइ्र इस कंपनी में आज हजारों की संख्या में एम्प्लॉई काम करते हैं और ये आज दुनिया की शीर्ष कंपनियों में से एक है।

Archana Kumawat Desk
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