लेपर्ड प्रोजेक्ट को लगी 'सर्दीÓ

खटाई में देश की पहली योजना
सरकार को सरोकार नहीं, जिम्मेदारों को रुचि नहीं

- झालाना जंगल के बाद अन्य सात अभयारण्यों में पूरा नहीं हो पाया काम

जयपुर. वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन और टूरिज्म की सौगात देने के उद्देश्य से शुरू हुए देश के पहले लेपर्ड प्रोजेक्ट की कवायद सरकार बदलते ही ठंडे बस्ते में पहुंच गई। सरकार के साथ-साथ वन विभाग के अधिकारी भी इसमें रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसके चलते अभयारण्यों को बजट नहीं मिला और कई जगह काम ही शुरू नहीं हो पाए। पिछली राज्य सरकार की बजट घोषणा के बाद अक्टूबर 2018 में झालाना जंगल को लेपर्ड रिजर्व के लिए तैयार कर दिया। इसी प्रोजेक्ट में कुंभलगढ़ (रावली टॉडगढ़), जयसमंद, शेरगढ़(बारां), माउंटआबू, खेतड़ी (बासिलायल), जवाई बांध कंजर्वेशन रिजर्व व बस्सी सीतामाता अभयारण्य को भी शामिल किया गया। यह था प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य

- इस प्रोजेक्ट में अभयारण्यों की चारदीवारी, वन्यजीवों की सुरक्षा, कैमरा, सर्विलांस सिस्टम, ग्रासलैंड, मानव व वन्यजीवों के बीच बढ़ रहे संघर्ष को रोकने के जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन, एन्कलोजर का निर्माण, पर्यटन सुविधाओं में इजाफा आदि शामिल थे।

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प्रोजेक्ट में शामिल अभयारण्यों की वर्तमान स्थिति

1. खेतड़ी (बासिलायल) : यहां पैंथर प्रोजेक्ट के लिए वन विभाग ने ढाई करोड़ के प्रस्ताव बनाकर भेजा। दो माह पूर्व सरकार ने महज 75 हजार रुपए की स्वीकृति जारी की।

2. शेरगढ़(बारां): बारां के शेरगढ़ अभयारण्य में इस प्रोजेक्ट के लिए बजट अब तक नहीं मिला। इससे यहां अब तक कोई कार्य शुरू ही नहीं हुआ है।

3. बस्सी सीतामाता अभयारण्य: यहां के लिए लेपर्ड प्रोजेक्ट के तहत ढाई करोड़ रुपए के कार्य का प्रस्ताव बनाकर भेजे गए। गत सरकार ने राशि दी, लेकिन अब कोई बजट ही आवंटित नहीं हुआ।
4. कुंभलगढ़ (रावली टॉडगढ़): विभाग ने इस प्रोजेक्ट के तहत 5 करोड़ मांगे थे, लेकिन विभाग ने डेढ़ करोड़ दिए। ऐसे में इकोरेस्टोरेशन का काम भी पूरा नहीं होगा।

5 . झालाना वन क्षेत्र: पहले लेपर्ड प्रोजेक्ट के तौर पर देशभर में पहचान मिली। दीवार निर्माण, इंटरपीटिशन सेंटर, प्रतिक्षालय, भव्य द्वार समेत कई सुविधाएं विकसित हुईं। अभी इसमें कैफे समेत कई सुविधाएं आमजन को नहीं मिल पा रही है।
6. माउंटआबू : प्रोजेक्ट लेपर्ड में माउंट आबू को शामिल किया है, लेकिन अभी तक कोई भी वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली।

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वनमंत्री सुखराम बिश्नोई से पत्रिका की बातचीत

पत्रिका : पूर्ववर्ती सरकार राजस्थान में देश का पहला लैपर्ड प्रोजेक्ट लेकर आई, जिसे अब दरकिरनार क्यों किया जा रहा है?

वनमंत्री : नहीं ऐसी बात नहीं है। कोई भी प्रोजेक्ट बंद नहीं किए।
पत्रिका : पिछली सरकार ने बजट घोषणा में प्राथमिकता दी, अबकी बार ध्यान नहीं दिया गया, ऐसा क्यों?

वन मंत्री : हमने भी प्राथमिकता दी है, भले बजट घोषणा में शामिल नहीं किया हों। आगे भी जरूरत के हिसाब से रूपरेखा तैयार की जाएगी।
पत्रिका : अब तक इस प्रोजेक्ट को लेकर कोई बैठक भी नहीं हुई, अब आगे क्या तैयारी है।

वनमंत्री : कुछ दिनों पहले कैम्पा से फंड लाए हैं। जल्द उच्च अधिकारियों से बैठक कर आगे की नीति बनाई जाएगी। वन्यजीवों के सरंक्षण में हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

manoj sharma
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