नाहरगढ़ जैविक उद्यान में शेरनी तेजिका के शावक ज्यों-ज्यों बड़े हो रहे हैं, उनमें चंचलता बढ़ रही है। बड़े होने के साथ ये शावक मां से जीवन के गुर सीख रहे हैं। ये नन्हे शावक जयपुर जू के लिए एक खास अमानत की तरह है क्योंकि यहां शेर के शावक 29 साल बाद जन्मे हैं। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में शेरनी तेजिका ने जब इन तीन शावकों को जन्म दिया था तब कर्मचारियों में उत्साह उमड़ पड़ा था। उन्होंने मिठाईयां बांटी थी। ये शावक शेर सिद्धार्थ और शेरनी तेजिका की संतान हैं।


इस जोड़े को गुजरात से जयपुर लाया गया था। दोनों नाहरगढ़ स्थित बायोलोजिकल पार्क में साथ रखे गए। यहीं पर तेजिका ने तीन शावकों को जन्म दिया। तेजिका से जन्मे इन तीन शावकों के नाम की घोषणा वन महोत्सव के तहत आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने की थी। मादा शावक को तारा और नर शावकों को त्रिपुर व तेजस नाम दिया गया। गुजरात के जूनागढ़ से करीब डेढ़ साल पहले शेरनी तेजिका और शेर सिद्धार्थ को लाया गया था। 29 साल के प्रयास के बाद 21 मई, 2017 को तेजिका ने तीन शावकों को जन्म दिया था।

 

जन्म के समय शेर के शावक का वजन सामान्यत: 1 से 5 किलोग्राम तक होता है। जन्म के बाद शावक की आंखे खुलने में लगभग 3 से 11 दिन तक लग जाते हैं। शावक लगभग 10 सप्ताह से लेकर 10 महीनों तक मां का दूध पीना नहीं छोड़ते हैं। 2 साल तक होते-होते ये शावक शिकार करने में महारथ हासिल कर लेते हैं और 3-4 साल की उम्र में पूरी तरह परिपक्व हो जाते हैं।

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