कोरोना वायरस पॉजिटिव सेन्स सिंगल-स्ट्रैंड आरएनए वायरस:डॉ. पांडे, देखें वीडियो

'अंडरस्टैंडिंग कोरोना वायरस' पर लाइव वेबिनार

By: SAVITA VYAS

Published: 12 Oct 2020, 09:21 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

जयपुर। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से आईएएस लिटरेरी सोसाइटी राजस्थान के सहयोग से आज 'अंडरस्टैंडिंग कोरोना वायरस' पर एक लाइव वेबिनार का आयोजन हुआ। आईएएस लिटरेरी सोसायटी राजस्थान के फेसबुक पेज पर आयोजित वेबिनार में सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (IGIB) दिल्ली के वैज्ञानिक, डॉ. राजेश पांडे ने संबोधित किया। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की शासन सचिव मुग्धा सिन्हा के साथ चर्चा की। वेबिनार को 'यश 2020' (ईयर ऑफ अवेयरनेस ऑन साइंस एंड हैल्थ) डायलॉग सीरीज के तहत आयोजित किया गया था। इस सेशन में कोरोना वायरस के साथ-साथ जीनोम सिक्वेंसिंग को गहनता से समझने का अवसर मिला।

डॉ. पांडे ने कहा कि हमारे शरीर में डीएनए होता है, जो आरएनए बनाता है। यह आरएनए प्रोटीन बनाता है। इसी प्रकार वायरस दो प्रकार के होते हैं - डीएनए और आरएनए युक्त वायरस। ये वायरस पॉजिटिव या निगेटिव-सेन्स वाले डबल और सिंगल-स्ट्रैंड में वर्गीकृत किए जा सकते हैं। कोरोना वायरस पॉजिटिव सेन्स सिंगल-स्ट्रैंड आरएनए वायरस है। यह वायरस अपनी तरह की 7 वीं प्रजाति है, जिसने इंसानों को संक्रमित किया है। इसका जीनोम 10 प्रकार के प्रोटीन बनाता है और सर्वाइवल और रेप्लिकेशन के लिए होस्ट प्रोटीन पर निर्भर करता है। डीएनए वायरस की तुलना में आरएनए वायरस का जीनोम छोटा होता है और इसकी म्यूटेशन रेट अधिक होती है। कोरोना वायरस के अलावा, इस प्रकार के वायरस के अन्य उदाहरणों में हेपेटाइटिस सी, एचआईवी और इन्फ्लुएंजा वायरस शामिल है।

कोरोना वायरस के उपचार को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स के बारे में बात करते हुए उन्होंने वायरस के विभिन्न स्ट्रेन, पॉपुलेशन डायवर्सिटी, एन्वायरन्मेंट डायवर्सिटी, संक्रमण के प्रति संवेदनशीलता और संक्रमण की गंभीरता, आदि फैक्टर्स पर प्रकाश डाला। यह वायरस मनुष्य के शरीर में मुंह, नाक, आंख के माध्यम से फेफड़े, आंत आदि में प्रवेश कर सकता है।
कोविड-19 पेपर-स्ट्रिप टेस्ट 'फेल्यूदा' को लेकर डॉ. पांडे ने कहा कि टेस्ट सीएसआईआर-आईजीआईबी द्वारा विकसित किया गया है और जिसे किसी भी दिन जारी किया जा सकता है। इसे ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने कॉमर्शियल लॉन्च के लिए मंजूरी दे दी है। यह टेस्ट समय और पहुंच के हिसाब से बेहद आसान है और इसकी लागत भी बहुत कम है। यह प्रेग्नेंसी टेस्ट के समान काम करता है।

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