ये मजबूरी, जनता से मिलना जरूरी, लेकिन दूरी है मजबूरी

सोशल डिस्टेंसिंग के बीच राज्य के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहरों में नगरीय निकाय चुनाव

 

By: Amit Pareek

Updated: 30 Sep 2020, 09:48 PM IST

जयपुर. कोरोना काल में शहरी सरकार चुनना लोगों के लिए आसान काम नहीं होगा। 21.5 लाख से अधिक मतदाता दोनों निकायों में हैं। ऐसे में चुनाव आयोग से लेकर सरकार और जनता से लेकर राजनीतिक दलों के लिए यह परीक्षा की घड़ी होगी। राजनीतिक दलों को प्रचार-प्रसार के लिए नए तरीके अपनाने होंगे ताकि लोगों के बीच में कम से कम जाना पड़े। प्रत्याशियों के सामने पहली बार अजीब स्थिति होगी। लोगों तक पहुंचना उनके लिए बहुत जरूरी होगा और दूरियां बनाकर रखना उनके लिए मजबूरी भी होगी। जनता भी पहले की तरह प्रत्याशियों का अभिवादन नहीं करना चाहेगी क्योंकि कोरोना से सभी को डर है।

किसके लिए क्या चुनौती
चुनाव आयोग : कोरोना काल में गाइडलाइन के अनुसार चुनाव कराना आसान काम नहीं होगा। नए बूथ तलाशने होंगे क्योंकि अब तक एक बूथ पर 1500 से अधिक मतदाता होते हैं। एक इमारत में पांच से सात बूथ होते हैं। ऐसे में मतदाताओं की संख्या बढ़कर पांच हजार के पार हो जाएगी। सोशल डिस्टेंसिंग के लिहाज से इस संख्या को कम करना चुनौती होगी।

सरकार: हैरिटेज नगर निगम में तंग गलियां और वहां सघन आबादी के बीच चुनाव कराना आसान काम नहीं होगा। सरकार के लिए व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना बेहद मुश्किल काम हो जाएगा। क्योंकि जिस तरह से संक्रमण बढ़ रहा है, उससे सोशल डिस्टेंसिंग की पालना बहुत जरूरी हो गई है।

राजनीतिक दल: हर घर तक दस्तक भी देनी है, लेकिन दूरियां भी बनाकर रखनी होंगी। कोरोना काल में प्रचार का तरीका भी अलग होगा। राजनीतिक दल और प्रत्याशियों के सामने अजीब दुविधा होगी। चुनिंदा लोगों के साथ ही प्रत्याशी प्रचार कर सकेंगे। राजधानी सहित जोधपुर और कोटा में यह आसान काम नहीं होगा।

जनता : कोरोना काल में घरों से निकलकर मतदान करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। जिला प्रशासन मतदान के प्रति जागरूक तो करेगा और मतदान के दौरान पुख्ता इंतजाम भी रखेगा। इसके बाद भी पूरी जिम्मेदारी मतदाताओं पर ही होगी कि वह मतदान सुरक्षित तरीके से करे और बचाव भी हो जाए।

हैरिटेज नगर निगम
हैरिटेज बचाकर रखना चुनौती : परकोटा विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है। हैरिटेज नगर निगम के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है। अब तक हैरिटेज नगर निगम की ओर से कोई विशेष प्रयास नहीं किए गए हैं।
सीवर लाइन की बड़ी दिक्कत : परकोटे की तंग गलियों के अलावा राजापार्क के बड़े हिस्से में सीवरेज की दिक्कत है। सिविल लाइन्स विस में भी कुछ इलाकों में बुरा हाल है।
पशुओं की समस्या : परकोटे में अवैध डेयरियों का संचालन वर्षों से होता आ रहा है। इसको रोकने के लिए अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। जानवरों की लड़ाई से विदेशी पर्यटक की मौत तक हो चुकी है।

ग्रेटर नगर निगम
सड़कों का निर्माण : ग्रेटर नगर निगम में तेजी से आबादी बढ़ रही है। ऐसे में यहां पर सुविधाएं विकसित करना निगम प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी। कई इलाकों में सड़कों का निर्माण नहीं हो पाया है।
पार्कों को बेहतर बनाना : ग्रेटर नगर निगम में 500 से अधिक निगम के पार्क हैं। जनता का सीधे जुड़ाव होने के कारण पार्कों को बेहतर करने और इनमें सुविधाएं बढ़ाना निगम के लिए बहुत जरूरी है।
बाहरी क्षेत्र में हूपर : शहर का अधिकतर बाहरी क्षेत्र ग्रेटर नगर निगम के हिस्से में है। ऐसे में अंत तक सुविधाएं पहुंचा पाना आसान नहीं होगा। इन इलाकों में नियमित रूप से हूपर नहीं पहुंचते हैं। यहां व्यवस्था बनानी होगी।

बजट की स्थिति
791 करोड़ का बजट है हैरिटेज नगर निगम का
1255 करोड़ का बजट है ग्रेटर नगर निगम का

Amit Pareek Desk
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