Lockdown Effect -बच्चों संग क्वॉलिटी टाइम बिता रहे पैंरेंट्स

बच्चों संग क्वॉलिटी टाइम बिता रहे पैंरेंट्स
घरों में चल रही मस्ती की पाठशाला
पूरे देश में है २१ दिन का लॉक डाउन

कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में २१ दिन का लॉक डाउन चल रहा है। एेसे में लोग अपने अपने घर में ही सीमित हो कर रह गए हैं। हालांकि वायरस के प्रकोप के चलते लोगों के दिलों में डर बना हुआ है लेकिन इस लॉकडाउन ने परिवार के सदस्यों को एक बार फिर एक दूसरे के पास आने का मौका दिया है जो उनकी व्यस्त दिनचर्या के कारण पहले शायद नहीं मिलता था। पहले स्टूडेंट्स खासतौर पर गल्र्स जहां अपने कॉलेज के कारण घर के काम में सहयोग नहीं कर पाती थीं वहीं अब आपको घर में अपनी मां की मदद कर रही है। इतना ही नहीं अपनी व्यस्त दिनचर्या के कारण पैरेंट्स भी बच्चों को अधिक समय नहीं दे पाते थे लेकिन इन दिनों परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर एंजाय्ॉ कर रहे हैं। आज पत्रिका टीवी के माध्यम से हम आपको लेकर चलते हैं एेसे ही कुछ परिवारों के पास।
सबसे पहले हम चलते हैं मोहन नगर में रहने वाले सिंघल परिवार में।
सिंघल परिवार की छोटी बेटी मीनाक्षी का चयन यूपीएससी में हो चुका है और अब वह अपनी पोस्टिंग का इंतजार कर रही है। कुछ ही दिनों में उसे पोस्टिंग मिलने वाली थी लेकिन कोरोना की वजह से वह टल गई है। हमेशा पढ़ाई में डूबी रहने वाली मीनाक्षी को अब घर के कामों में अपनी मां की मदद करते हुए देखा जा सकता है। फिर वह किचन का काम हो या फिर साफ सफाई का। मीनाक्षी का छोटा भाई दिव्यांशु ११वीं कक्षा में है। आईएएस बनने की चाह रखने वाले दिव्यांशु का पूरा फोकस पढ़ाई और बचे समय में एनजीओ में जाकर काम करने का रहता है लेकिन अब वह घर से बाहर नहीं निकल पाता एेसे में वह भी अपनी बहन की तरह घर के काम में मदद कर रहा है। घर का काम समाप्त होने के बाद टाइम पास करने के लिए परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर अंताक्षरी या कैरम खेलते नजर आते हैं। इनका कहना है कि इसी बहाने सभी को एक साथ बैठने का मौका मिल रहा है।
टाइम पास के लिए कैरम का सहारा
अब हम आपको लेकर चलते हैं देव नगर स्थित आशा जी के परिवार के पास। आज परिवार में हमें सिर्फ दो ही लोग नजर आ रहे हैं। आशाजी और उनका नाती अमन। यह दोनों भी कैरम खेल कर समय व्यतीत कर रहे हैं। अमन के पापा और मम्मी की पोस्टिंग बांसवाड़ा और राजसमंद है। दोनों शिक्षा विभाग में हैं। सरकारी कार्यालय भले ही बंद हो गए हो लेकिन इन विभागों से जुड़े अधिकारी और कर्मचारियों के दायित्व समाप्त नहीं हुए हैं और उन्हें पूरा करने के दोनों अपने पदस्थानों पर हैं। आशाजी का कहना है कोरोना के वजह से छुट्टी लेकर भी उनका आना संभव नहीं है। एेसे में हम वीडियो कॉलिंग के जरिए उनसे जुड़े हुए हैं और यहां हम विभिन्न गेम्स खेलकर समय व्यतीत करते हैं।
मस्ती में मशगूल विहान
अब अंत में हम आपको मिलवाएंगे छोटे से विहान से जो अपने ताऊजी के साथ मस्ती करने में मशगूल है। सिविल लाइंस में रहने वाला विहान अभी सैकेंड क्लास में है। सुबह स्कूल जाने के बाद जब वह वापस आता है तो सभी ऑफिस जा चुके होते हैं। जब तक उसके पापा और ताऊजी वापस आते हैं विहान सो चुका होता है। कोरोना वायरस ने उसके पापा के ऑफिस की छुट्टी भले ही नहीं करवाई हो लेकिन ताऊजी घर पर ही हैं और विहान उनके साथ टाइम स्पैंड कर रहा है। तो देखा आपने लॉक डाउन ने किस तरह परिवारों को एक बार फिर एक साथ बांध दिया है। इसका मतलब यह नहीं है कि यह लॉकडाउन हमेशा रहे जरूरी यह है कि परिवार के सदस्यों में प्यार हमेशा बना रहे। पत्रिका टीवी भी अपने दर्शकों से अपील करता है कि लॉकडाउन के नियमों का पालन करें। अपने अपने घरों में रहें और सुरक्षित रहें। पत्रिक

Rakhi Hajela Desk
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