बिहार के रसूखदारो के आगे लॉकडाउन फेल

सरकार की ना के बाद कोटा से खुद ही लौट रहे छात्र
नवादा के एसडीएम ने जारी किया पास

By: Sharad Sharma

Published: 20 Apr 2020, 11:11 AM IST

बिहार में कोटा को लेकर सियासत खासी गर्म हो रही है, इसको लेकर सत्ता पक्ष व प्रतिपक्ष की ओर से लगातार आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कर दिया है कि कोटा में फंसे छात्रों को नहीं बुलाया जाएगा। ऐसा करना लॉकडाउन का उल्लंघन और गरीब मजदूरों के साथ अन्याय होगा। वहीं विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार की मजबूरी पर सवाल उठाते हुए प्रदेश के नागरिकों को मंझधार में बेसहारा छोड़ देने का आरोप लगाया। आरजेडी ने यह आरोप भी लगाया था कि कई रसूखदार लोगों ने अपने बच्चों को लॉकडाउन के बीच वापस घर बुलवाया है। अब प्रदेश में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। हिसुआ विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक अनिल सिंह अपनी पत्नी और बेटी को वापस लेकर अपने निजी वाहन से कोटा से पटना पहुंच गए हैं। वहीं अब कोटा से छात्र भी खुद से ही वाहन रिजर्व कर वापस बिहार लौटने लगे हैं।
सक्षम परिवार खुद कर रहे जुगाड़
कोरोना के कारण कोटा में फंसे छात्रों को वापस बुलाने के लिए भले ही बिहार सरकार तैयार नहीं हो रही है लेकिन जो भी सक्षम है और रुतबे वाला है, वो अपने बच्चों को धड़ल्ले से बिहार लेकर आ रहा हैं। हजारों बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों को वापस लाने के लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं हैं। दूसरी तरफ रसूखदार लोगों के बच्चे प्रतिदिन कोटा से बिहार आ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अबतक 149 छात्र बिहार के विभिन्न जिलों में पहुंच गए हैं, जिन्हे वहां क्वारनटीन किया गया है। यूपी से लगी सीमा से कोटा में पढ़ाई करने वाले छात्रों की घर वापसी का सिलसिला लगातार जारी है। कोटा से नवादा के लिए चले 10 छात्र तीन वाहनों से कैमूर पहुंचे। बॉर्डर पर मजिस्ट्रेट और चिकित्सकों की टीम ने उन सभी छात्रों की स्क्रीनिंग कर हाथ पर होम क्वॉरनटीन की मुहर लगाई। ये सभी छात्र कोटा के जिलाधिकारी से पास लेकर अपने गृह जनपद के लिए चले थे। छात्रों ने लॉकडाउन के बीच इस तरह घर वापसी को मजबूरी बताते हुए कहा कि हॉस्टल से सभी छात्र जा चुके हैं। छात्र बताते हैं अन्य राज्यों की सरकारें वाहन भेजकर अपने छात्रों को बुला रही हैं, लेकिन बिहार सरकार छात्रों को बुलाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर रही है। छात्रों ने जिलाधिकारी से वाहन पास लेकर 40 हजार में निजी वाहन से घर के लिए निकलने की जानकारी दी।
अभिभावकों ने लगाई थी गुहार
इस संबंध में मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार बताते हैं कि सुबह से अब तक तीन वाहनों से 10 छात्र अपने गृह जनपद के लिए निकले हैं। सभी का चेकअप किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी के हाथ पर होम क्वारनटीन की मुहर लगाई गई है। इसकी रिपोर्ट संबंधित जिले के जिलाधिकारी को भी भेजी जा रही है। गौरतलब है कि लॉकडाउन 2.0 की घोषणा के बाद से कोटा में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों ने राज्य सरकार से उन्हें वापस बुलाने की गुहार लगाई, लेकिन राज्य सरकार ने इसे नहीं सुना। सरकार ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि कोटा में धनी परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं, उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है।

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