Shardiya Navratri 2020 First Day माता शैलपुत्री की पूजा से मिलती है शक्ति, इन मंत्रों के साथ करें आराधना

17 अक्टूबर 2020 को आश्विन माह के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इस दिन नवरात्रि प्रारंभ हो रही है. नवरात्रि के प्रथम दिन कलश-स्थापना कर मां दुर्गा की प्रथम रूप माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। हिमालय यानि शैल के यहां जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। मां शैलपुत्री को ही माता पार्वती के स्वरूप में शंकरजी की पत्नी के रूप में जाना जाता है।

By: deepak deewan

Published: 17 Oct 2020, 10:29 AM IST

Shardiya Navratri 2020 First Day Of Navratri Maa Shailputri

जयपुर. 17 अक्टूबर 2020 को आश्विन माह के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इस दिन नवरात्रि प्रारंभ हो रही है. नवरात्रि के प्रथम दिन कलश-स्थापना कर मां दुर्गा की प्रथम रूप माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। हिमालय यानि शैल के यहां जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। मां शैलपुत्री को ही माता पार्वती के स्वरूप में शंकरजी की पत्नी के रूप में जाना जाता है।

मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल रहता है और बाएं हाथ में वे कमल-पुष्प धारण करती हैं। माता शैलपुत्री का वाहन वृषभ है। इसलिए उन्हें वृषभारूढ़ा भी कहा जाता है। पूर्व जन्म में वे दक्ष प्रजापति की पुत्री सती थीं। उनका विवाह शंकरजी से हुआ था। माता शैलपुत्री की आराधना करने से स्थिरता और शक्ति प्राप्त होती है। युवतियों, महिलाओं के लिए उनकी पूजा करना विशेष रूप से मंगलकारी होता है।

माता शैलपुत्री की आराधना के लिए मंत्र

1.
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:

2.
बीज मंत्र— ह्रीं शिवायै नम:

3.
शिवरूपा वृष वहिनी हिमकन्या शुभांगिनी.
पद्म त्रिशूल हस्त धारिणी रत्नयुक्त कल्याण कारिनी.

4.
वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ .
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥

पूजा विधि
कलश स्थापना के बाद दुर्गा पूजा का संकल्प लेकर माता दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की विधिपूर्वक पूजा करें. घी का दीपक जलाकर उनकी आरती उतारें. माता को सिंदूर, धूप, पुष्प अर्पित करें. इसके बाद दुर्गासप्तशती का पाठ करें या माता के मंत्र का जाप करें.

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