किताबों पर सियासत: वासुदेव देवनानी बोले- महाराणा प्रताप ही हैं महान

प्रदेश में एक बार फिर किताबों को लेकर सियासत तेज हो गई है।

By: kamlesh

Published: 03 Jan 2019, 05:15 PM IST

जयपुर। प्रदेश में एक बार फिर किताबों को लेकर सियासत तेज हो गई है। राजस्थान के पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर शिक्षा के भगवाकरण के कांग्रेस के आरोप को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने महाराणा प्रताप और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को पाठ्क्रम में उचित स्थान दिलाने का प्रयास किया था।

देवनानी ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि महाराणा प्रताप को महान न स्वीकार करना देश के बलिदानियों का अपमान करना है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि वह अकबर को महान बताकर उसकी तुलना महाराणा प्रताप से कर रही है जबकि अकबर आक्रांता था और महाराणा प्रताप ने उससे लोहा लिया।

उन्होंने राज्य सरकार पर शिक्षा का कांग्रेसीकरण करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमने 200 से अधिक वीर वीरांगनाओं के पाठ को बच्चों से जोड़कर राष्ट्रवाद बढ़ाने की कोशिश की जबकि कांग्रेस ने लक्ष्मण रामस्य भ्राता जैसे वाक्य को भी पाठ से हटाया।

उन्होंने कहा कि जिस दल में भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगता हो, वीरों और वीरांगनाओं की वीरता को स्वीकारने में संकोच होता हो, उसके मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि इन विषयों में उनका मत क्या है।
ताकि जनता इस सरकार के बारे में अपनी धारणा स्पष्ट कर सके।

उन्होंने शिक्षा मंत्री के 3717 स्कलों के मामले समीक्षा कर उन्हें फिर से खोले जाने वाले बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि हमारी सरकार ने एक भी स्कूल बंद नहीं किया था बल्कि नियमों के अनुसार उनका विलय किया गया था। जो समय समय पर की जाने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है और छात्रों की संख्या पर निर्भर करती है।

देवनानी ने शिक्षा मंत्री के शिक्षा का बंटाधार करने वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में 26वें स्थान से दूसरे स्थान पर लाना, बोर्ड परिणाम 57 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत करना, नामांकन बढ़ाना और स्टाफ की कमी को दूर करने को यदि बंटाधार कहा जाएगा तो शिक्षा मंत्री की बुद्वि पर प्रश्न खड़े होंगे।

गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने मीडिया के सवालों पर कहा था कि हमने नहीं कहा कि यह महान है या वो महान है। अब तक जो कुछ पढ़कर आप और हम इस काबिल बने हैं, उस पाठ्यक्रम में बदलाव किस कारण से किया गया, इसकी समीक्षा होना जरूरी है।

इसके साथ ही उन्होंने निजी तौर पर महारणा प्रताप या अकबर को महान बताने से इंकार करते हुए कहा था कि अब उनका व्यक्तिगत कुछ नहीं है, क्योंकि उन्हें प्रदेश की जनता ने जिस पद पर बैठाया है, उसके अनुसार उन्हें सभी लोग और वर्ग के अनुसार निर्णय करना है।

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