सिविल लाइन फाटक पर शव के साथ रातभर सड़क पर धरना देगी भाजपा

महुवा में पुजारी शंभू शर्मा की हत्या का मामला गर्माता जा रहा है। अब महुवा की बजाय राजनीति का केंद्र जयपुर हो गया है। राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने गुरुवार को सिविल लाइन फाटक पर शव को रखकर धरना दिया।

By: Umesh Sharma

Published: 08 Apr 2021, 09:06 PM IST

जयपुर।

महुवा में पुजारी शंभू शर्मा की हत्या का मामला गर्माता जा रहा है। अब महुवा की बजाय राजनीति का केंद्र जयपुर हो गया है। राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने गुरुवार को सिविल लाइन फाटक पर शव को रखकर धरना दिया। भाजपा नेताओं ने भी इस धरने में हिस्सा लिया। इसके बाद शाम को सरकार की ओर से राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने एक प्रतिनिधिमंड को वार्ता के लिए भी बुलाया, लेकिन बात नहीं बनी, जिसके बाद पहली बार सिविल लाइन फाटक पर शव को लेकर सभी नेता रातभर धरना देंगे। पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन भी फेल नजर आया। किरोड़ी के शव को साथ लेकर जयपुर पहुंचने की पुलिस और प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। विरोध प्रदर्शन में सांसद रामचरण बोहरा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, विधायक कालीचरण सराफ, अशोक लाहोटी, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच, प्रदेश मंत्री जितेंद्र गोठवाल के साथ ही जयपुर शहर अध्यक्ष राघव शर्मा और कई मोर्चों से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।

भाजपा मुख्यालय से किया कूच

किरोड़ीलाल मीणा ने भाजपा नेताओं के साथ मिलकर भाजपा मुख्यालय से सिविल लाइंस फाटक तक पुजारी का शव लेकर कूच किया और प्रदर्शन करते हुए मांगें माने जाने तक प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी दी। हालांकि फाटक पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जिसके बाद सभी नेता शव लेकर धरने पर बैठ गए। प्रशासन के जरिए बात को सरकार तक पहुंचाया गया, जिसके बाद राजस्व मंत्री हरीश चौधरी को बातचीत के लिए अधिकृत किया गया। मगर सरकार के साथ लंबी वार्ता में सभी मांगों को लेकर सहमति नहीं बन पाई। जिसके बाद सभी नेताओं ने शव के साथ फाटक पर ही रातभर धरना देने की घोषणा कर दी।

हम एक्शन लेने को तैयार, प्रतिनिधिमंडल बोला सरकार की समाधान की मंशा नहीं

राजस्व मंत्री हरीश चौधरी की पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, सांसद किरोड़ी लाल मीणा, सांसद रामचरण बोहरा, पूर्व विधायक सुरेंद्र पारीक, मुकेश दाधीच, सुमन शर्मा, लक्ष्मीकांत भारद्वाज सहित कुछ नेता ओर ब्राह्मण समाज के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी वार्ता चली, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला पाया। किरोड़ी लाल मीणा और अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार की समाधान की मंशा नहीं है। दोषी अधिकारियों को निलंबित करने में आनकानी की जा रही है। एडीएम को बचाने के लिए सरकार अपनी ताकत लगा रही है। साथ ही मंदिर माफी की भूमि से अतिक्रमण हटाने का भी सरकार के पास कोई ठोस प्लान नहीं है, इसलिए हमारा धरना जारी रहेगा।

व्यक्तिगत व्यवहार के चलते कार्रवाई कराना सही नहीं

हरीश चौधरी ने इसके उलट बयान वार्ता विफल बताना प्रतिनिधिमंडल का नजरिया है। उन्होंने कहा कि तहसीलदार और ईओ को जांच तक वहां से ओर जगहों पर रख सकते हैं। आरोप लगाना उनका अधिकार है, लेकिन व्यक्तिगत व्यवहार के चलते कार्रवाई कराना सही नहीं है। जांच के संदर्भ में सरकार खुली हैं जिस अधिकारी से जांच कराना चाहे करवा सकते हैं। हठधर्मिता सरकार नहीं सामने वाली तरफ से है। शव को सबसे पहले दाह-संस्कार करना चाहिए। फिर अपने संघर्ष करे। मंदिर माफी की जमीनों पर अतिक्रमण के मामले में सर्वे सरकार करा रही है।

मंदिर माफी की 18 हजार बीघा जमीनों पर भू-माफियाओं का कब्जा

मीणा ने कहा कि राजस्थान में मंदिर माफी की भूमि पर भूमाफियाओं ने कब्जा जमा रखा है। करीब 30 हजार बीघा मंदिर माफी की प्रदेश में भूमि है, जिसमें 18 हजार बीघा पर भूमाफियाओं का कब्जा है। सरकार कानून बनाकर मंदिर माफी की जमीनों का संरक्षण करे और कब्जे हटवाए।

यह है मामला

दौसा जिले के टीकरी गांव में मूक बधिर पुजारी की मंदिर की 26 बीघा जमीन की भूमाफियाओं ने रजिस्ट्री करवा ली। आरोप है कि सब रजिस्ट्रार से लेकर पूरा प्रशासन भूमाफियाओं से मिला हुआ था। धोखाधड़ी से जमीन की रजिस्ट्री के बाद पहले से बीमार चल रहे पुजारी की तबीयत और बिगड़ी। दो अप्रैल को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जिसके बाद से भाजपा सांसद डॉ. मीणा शव को लेकर थाने के सामने पड़ाव डाले हुए थे।

Umesh Sharma Reporting
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