Makar Sankranti 2018: अगर ऐसे करोगे ‘दान‘, तो आपका दान बन जाएगा ‘महादान‘, खुल जाएगा भाग्य

dinesh saini

Publish: Jan, 13 2018 07:10:15 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India

प्रत्येक व्यक्ति अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार दान पुण्य करता है। भगवान भी उस दान को सहर्ष स्वीकार करते हैं...

दान के बारे में कहा जाता है कि जब आप किसी को दान करते हैं तो भगवान उससे कई हजार गुणा आपको लौटा देता है। अगर आप किसी को खुशियां बाटोगे तो हजार गुणा आपको वापस मिलेगी और इसी तरह अगर आप किसी को परेशान करोगे तो उसका भी आपको हजार गुणा वापस मिलेगा। अब फैसला आपको करना है कि आप खुशियां बांटेंगे या दुख?

 

प्रत्येक व्यक्ति अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार दान पुण्य करता है। भगवान भी उस दान को सहर्ष स्वीकार करते हैं। बहुत से लोग गायों को हरा चारा डालते हैं, पक्षियों को दाना डालते हैं। दान-पुण्य के नाम पर कई कर्मकांड भी करते हैं जिनमें बहुत खर्चा होता है। अक्सर ये देखा जाता है कि त्यौहारों विशेषकर मकरसंक्राति जैसे पर्व पर दान-पुण्य बढ़ जाता है। जिसके कारण गायों को डाला जाने वाला हरा चारा भी इतनी मात्रा में गायों को डाल दिया जाता है कि वह लोगों के पांवों तले कुचलता रहता है। धार्मिक अनुष्ठानों में खर्चें बढ़ जाते हैं। दान पुण्य के नाम पर जलाशयों में कई तरह की चीजे फेंक दी जाती है। जिनका कोई मतलब नहीं निकलता। लेकिन जो दान गरीबों की भलाई के लिए न किया जाए, वह दान ‘सात्विक दान‘ की श्रेणी में नहीं आता। भगवान भी दान-पुण्य से तभी खुश होते हैं जब धरती पर उसके द्वारा भेजे गए प्रत्येक प्राणी खुश हो। हम दान के नाम पर अन्न का अपमान कर उसे व्यर्थ कर देते हैं। अगर दान ही करना है तो गरीबों को करें। गरीब बच्चों को तन ढक ने के लिए कपड़े दें। उन्हें खाने को दें ताकि उनका पेट भर सके। जो त्योहार आप मना रहे हैं उस त्योहार की खुशियां उन्हें दें। सर्दी से रात को ठिठुरते लोगों को कंबल दान करें। सच मानिए आपका ये दान बन जाएगा ‘महादान‘। उन गरीबों की आशीष आपकों ऐसी मिलेगी कि आपके सभी दुख दूर हो जाएंगे।

 

मकर संक्रांति का पर्व इस बार भी राजस्थन में 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा। संक्रांति इस बार कुछ खास होगी क्योंकि इस बार भुवन भास्कर सूयदेव अपने ही वार रविवार के दिन धनु राशि को छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। सूर्य इस दिन दोपहर 1 बजकर 47 मीनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस बार भी मकर संक्रांति पर सर्वार्थ सिद्धि योग व प्रदोष का संयोग रहेगा। पुण्यकाल सूर्योदय यानि सुबह 7.21 से शाम 5.50 बजे तक रहेगा। इसके चलते पूरे दिन दान पुण्य का दौर चलेगा।

 

दान का है विशेष महत्व
शास्त्रों के अनुसार, यह दिन सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध , तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढक़र पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कंबल दान मोक्ष की प्राप्त करवाता है।

 

मकर संक्रांति पर्व की देश भर में रहती है धूम
मकर संक्रांति पर्व को देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है और इस अवसर पर लाखों लोग देश भर में पवित्र नदियों में स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं। देश के विभिन्न भागों में लोग इस दिन नदियों में स्नान करते हैं। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु इलाहाबाद के त्रिवेणी संगम , वाराणसी में गंगाघाट, हरियाणा में कुरुक्षेत्र, राजस्थान में पुष्कर और महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी में स्नान करते हैं।



शुभ कार्य हो जाते हैं शुरू
देश के विभिन्न मंदिरों को इस दिन विशेष रूप से सजाया जाता है और इसी दिन से शुभ कार्यों पर लगा प्रतिबंध भी खत्म हो जाता है। इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनकर मंदिरों में जाते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे−पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं।

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