मकर संक्रांति का उल्लास शुरू, बाजार महंगा

मकर संक्रांति का पर्व (Makar Sankranti Festival) 14 जनवरी को मनाया जाएगा। शहर में मकर संक्रांति का उल्लास नजर आने लग गया है, हालांकि इस बार मकर संक्रांति को लेकर बाजार में तेजी नजर आ रही है। पतंगों (Kite Festival) से लेकर मांझा और तिल के लड्डु व फीणी सब महंगे हो गए है। वहीं कोरोना के चलते रात्रिकालिन कफ्र्यू का असर भी बाजार में देखने को मिल रहा है। दुकानें जल्दी ही बंद होने से ग्राहकी भी मंदी हो गई है। सक्रांति नजदीक आ गई, लेकिन बाजार में ग्राहकी ने गति नहीं पकड़ी है।

By: Girraj Sharma

Published: 13 Jan 2021, 01:08 PM IST

मकर संक्रांति का उल्लास शुरू, बाजार महंगा
— बाजार जल्दी बंद होने से ग्राहकी पड़ी मंदी
— पतंग से लेकर फीणी, तिल के लड्डु महंगे


जयपुर। मकर संक्रांति का पर्व (Makar Sankranti Festival) 14 जनवरी को मनाया जाएगा। शहर में मकर संक्रांति का उल्लास नजर आने लग गया है, हालांकि इस बार मकर संक्रांति को लेकर बाजार में तेजी नजर आ रही है। पतंगों से लेकर मांझा और तिल के लड्डु व फीणी सब महंगे हो गए है। वहीं कोरोना के चलते रात्रिकालिन कफ्र्यू का असर भी बाजार में देखने को मिल रहा है। दुकानें जल्दी ही बंद होने से ग्राहकी भी मंदी हो गई है। सक्रांति नजदीक आ गई, लेकिन बाजार में ग्राहकी ने गति नहीं पकड़ी है।

व्यापारियों की मानें तो दुकानें जल्दी बंद होने से बाजार में रौनक नहीं है। पतंग व्यापारियों के अनुसार कोरोना के चलते इस बार पतंगें कम बनी है, ऐसे में पतंगों डेढ गुणा तक महंगी बिक रही है। वहीं बाजार में फीणी आदि भी महंगें दातों में बिक रही है। जयपुर व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सुभाष गोयल ने बताया कि नाइट कफ्र्यू के चलते इस बार मकर संक्रांति का बाजार फीका रहा है। दुकानें जल्दी बंद होने से बाजार में ग्राहकी नहीं है। मकर संक्रांति के त्योहार की ग्राहकी सुबह—शाम की होती है, ऐसे में इस बार दुकानें जल्दी बंद होने से ग्राहकी पर असर पड़ा है। व्यापार महासंघ ने नाइट कफ्र्यू को रात 9—10 बजे से लागू करने की भी मांग की है।

50 से 70 पैसे महंगी हो गई पतंगें

शहर में रामगंज बाजार स्थित हांडीपुरा के अलावा किशनपोल बाजार, चांदपोल बाजार, हल्दियों का रास्ता के साथ बाहरी बाजारों में पतंगों की दुकानें सज चुकी है। बाजार में इस बार पतंगें डेढ गुना तक महंगी बिक रही है। हांडीपुरा में बीकानेर से आकर पतंगे बेच रहे सन्नू हुसैन ने बताया कि बाजार में 20 पतंगें 20 रुपए से लेकर 200 रुपए तक बिक रही है। इस बार 100 पतंगें 50 से 70 रुपए महंगी हो गई है। वहीं मांझे का गट्टा 300 रुपए से लेकर एक हजार रुपए तक बिक रहा है। हुसैन का कहना है कि बाजार में कोरोना का असर भी पड़ा है। इस बार पतंगें कम बिक रही है, वहीं व्यापारियों ने भी कम पतंगें मंगवाई है। हालांकि स्रक्रांति के नजदीक आने के साथ ही पतंग बाजार में ग्राहकी बढने लगी है।

बाजार में बीकानेर, बरेली व अहमदाबाद की पतंगें भी
जयपुर में अहमदाबाद, बीकानेर, बरेली, कानपुर और आगरा से भी पतंगें बिकने के लिए आई है। यहां बीकानेर, बरेली और कानपुर के व्यापारियों ने भी पतंगों की दुकानें लगाई है। पतंग व्यापारियों की मानें तो जयपुर की पतंगें महंगी बिकती है, जबकि बाहर की पतंगे सस्ती दर पर आती है, ऐसे में व्यापारी बाहार से अधिक पतंगें मंगवाते है।

देशी घी की फीणी एक हजार रुपए किलो तक
मकर संक्रांति पर दान—पुण्य के लिए फीणी और तिल के लड्डु देने का महत्व बताया गया है। इस बार बाजार में फीणी और तिल के लड्डू महंगे बिक रहे है। फीणी की दुकान वाले सत्यनारायण पितलिया ने बताया कि बाजार में इस बार देशी घी की मीठी फीणी 500 रुपए से लेकर एक हजार रुपए किलो तक बिक रही है, वहीं फीकी फीणी 600 रुपए से लेकर 1200 रुपए किलो तक बिक रही है। वनस्पति में दूध की फीणी 240 रुपए से लेकर 400 रुपए किलो तक बिक रही है, वही सादा फीणी 150 रुपए से लेकर 300 रुपए किलो तक बिक रही है। तिल के लड्डु भी इस बार महंगे बिक रहे है।

Girraj Sharma Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned