भगवान श्रीराम ने उड़ाई थी दुनिया की पहली पतंग, पहुंच गर्इ थी इन्द्रलोक, हनुमान जी काे भेजा था लाने !

santosh trivedi

Publish: Jan, 14 2018 08:27:33 AM (IST) | Updated: Jan, 14 2018 09:06:28 AM (IST)

Jaipur, Rajasthan, India

पतंगबाजी की शुरूआत चीन से हुई, लेकिन कुछ विद्वानों का मत है कि चीन से पहले ही भारत में इसे उड़ाने की परंपरा थी

जयपुर। गुलाबी नगर के नाम से मशहूर राजस्थान की राजधानी जयपुर में मकर संक्रांति के दिन सूरज उगने के साथ ही आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों की छटा नजर आने लगती है। छताें पर युवाआें की टाेलियां पूरे दिन धमा-चाैकडी मचाएं रखती है।

 

हर आेर केवल ये काटा-वो काटा सुनार्इ देता है। डीजे की धुन के साथ लाेग अपने परिवार के साथ पतंगबाजी का मजा लेते हैं। किसी की पतंगा क्या काटी लगता है मानाे जग ही जीत लिया हाे।

 

आप सभी पतंग ताे खूब उड़ाते हैं, लेकिन क्या आपकाे पता है कि पहली पतंग कहां आैर कब उड़ार्इ गर्इ थी। नहीं जानते ताे काेर्इ बात नहीं हम आपकाे पतंग के बारे में सब कुछ बता देते हैं।

 

पतंग का आविष्कार 5वीं शताब्दी में चीन में हुआ था। दुनिया की पहली पतंग एक चीनी दार्शनिक मो दी ने बनाई थी। पतंग का प्रयाेग पहले मिलेट्री के लोग बचाव के उद्देश्य से सिग्नल भेजने और बातचीत करने में करते थे। चीन के बाद पतंगों का फैलाव जापान, कोरिया, थाईलैंड, भारत, अरब आैर उत्तर अफ़्रीका तक हुआ।

 

कहा जाता है कि पतंगबाजी की शुरूआत चीन से हुई, लेकिन कुछ विद्वानों का मत है कि चीन से पहले ही भारत में इसे उड़ाने की परंपरा थी। प्रसिद्ध धार्मिक ग्रंथ 'रामचरित मानस' के आधार पर श्रीराम ने अपने भाइयों के साथ पतंग उड़ाई थी। इस संदर्भ में 'बालकांड' में उल्लेख मिलता है। इस हिसाब से यह कहा जा सकता है कि दुनिया की पहली पतंग भगवान श्रीराम ने उड़ाई थी।

 

'राम इक दिन चंग उड़ाई।
इन्द्रलोक में पहुंची जाई।।'

 

इस चौपाई को लेकर एक बड़ा ही रोचक प्रसंग है। भगवान श्रीराम बालक अवस्था में थे। मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य के उत्तरायण होने पर अयोध्या में पर्व मनाया जा रहा था। श्रीराम ने विशेष रूप से बाल रूप हनुमान जी को भी बुलाया था। श्रीराम भाईयों के साथ पतंग उड़ा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने पतंग को धागे को इतना ढीला कर दिया कि पतंग देवलोक तक पहुंच गई।

 

'जासु चंग ***** सुन्दरताई।
सो पुरुष जग में अधिकाई।।'

 

पतंग को देखकर इंद्र के पुत्र जयंत की पत्नी आकर्षित हो गई। आकर्षक पतंग को देखकर वह पतंग उड़ाने वाले के बारे में सोचने लगी कि यह पतंग इतनी सुंदर है तो इसे उड़ाने वाला कितना सुंदर होगा?

 

यह सोचकर उसने पतंग को उसने पकड़ लिया और अपने पास रख लिया। जब काफी देर तक पतंग नहीं आई तो भगवान श्री राम ने बालक रूपी हनुमान जी को पतंग लेने के लिए भेजा।

 

'तिन तब सुनत तुरंत ही, दीन्ही छोड़ पतंग।
खेंच लइ प्रभु बेग ही, खेलत बालक संग।'

 

श्री हनुमान उड़ते हुए आकाश में जा पहुंचे। उन्होंने देखा कि एक स्त्री अपने हाथों में पतंग लिए खड़ी है। हनुमान जी ने स्त्री से पतंग देने की आग्रह किया। इस पर जयंत की पत्नी ने कहा कि वो पतंग उड़ाने वाले के दर्शन करना चाहती हैं। हनुमान स्त्री की बात सुनकर वापस श्रीराम के पास आ गए। उन्होंने श्रीराम प्रभु के पूरा वृतांत सुनाया।

 

इसके बाद श्रीराम ने हनुमान से कहा कि आप उन्हें बता दें कि वे चित्रकूट में उन्हें दर्शन देंगे। यह बात हनुमान ने जयंत की पत्नी को बताई। जिसके बाद उन्होंने पतंग वापस कर दी। इस अद्भुत प्रसंग के आधार पर मकर संक्रांति और पतंग की प्राचीनता का पता चलता है।

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