आधे से ज्यादा बुरुंडी मलेरिया की चपेट में

आधे से ज्यादा बुरुंडी मलेरिया की चपेट में

Kiran Kaur | Publish: Aug, 16 2019 04:22:53 PM (IST) | Updated: Aug, 16 2019 04:25:32 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

मौसम की मार झेलने वाले देशों में बुरुंडी का नाम प्रमुख है। इस साल यहां मलेरिया का प्रकोप चरम पर है।

मौसम की मार झेलने वाले देशों में बुरुंडी का नाम प्रमुख है। इस साल यहां मलेरिया का प्रकोप चरम पर है। यहां पर मलेरिया की समस्या ने महामारी का रूप ले लिया है। मलेरिया की वजह से यहां की आधे से ज्यादा जनसंख्या प्रभावित हुई है। आंकड़ों के अनुसार इस साल की शुरुआत से लेकर अभी तक यहां पर 1800 लोगों की मृत्यु मलेरिया की वजह से हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, जनवरी के पहले सप्ताह से लेकर जुलाई के अंत तक यहां पर मलेरिया के लगभग 60 लाख मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें कि मई में संक्रमण का स्तर काफी बढ़ गया था। जानकारों का कहना है कि वर्ष 2017 में भी इसी प्रकार की स्थिति देखने में आई थी, उस समय पूरे सालभर में मलेरिया के 60 लाख से ज्यादा मामले प्रकाश में आए थे। हाल में आई संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम रिपोर्ट में प्रकोप के पैमाने का वर्णन किया गया था, जिसने चेतावनी दी थी कि प्रकोप 'महामारी' के स्तर तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कई सारे कारण हैं जिन्होंने मच्छरों को बढ़ाने में मदद की और सरकार लगातार इन्हें नजरअंदाज करती रही। यही वजह है कि आज लाखों लोग इस बीमारी की चपेट में हैं। रिपोर्ट के अनुसार वे मच्छर, जो इस रोग को बढ़ावा देते हैं, पर्वतीय या ऊंचाई वाले इलाकों में भी पहुंच रहे हैं। बुरुंडी में चावल का उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में काफी बढ़ गया है, जिसने मच्छरों की वृद्धि को बढ़ावा दिया है। हालांकि बुरुंडी लंबे समय से मलेरिया से जूझ रहा है लेकिन मौजूदा प्रकोप के आंकड़े पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 50 फीसदी तक वृद्धि का इशारा कर रहे हैं। यह महामारी सीमावर्ती जिलों में लगातार बढ़ रही है। दो साल पहले की तुलना में पिछले साल मलेरिया के मामलों में कमी आई थी लेकिन इस वर्ष रोग ने फिर से विकराल रूप ले लिया।

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