भारी विरोध के बीच विधानसभा में राजस्थान विवाह का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन संशोधन विधेयक पारित

बिल के विरोध में भाजपा ने किया सदन सदन से वॉकआउट, बिल पारित होने को भाजपा ने बताया काला दिन, प्रदेश में अब बाल विवाह का भी हो सकेगा रजिस्ट्रेशन, अब ब्लॉक लेवल पर भी होंगे विवाहों का रजिस्ट्रेशन

By: firoz shaifi

Updated: 17 Sep 2021, 06:46 PM IST

जयपुर। विधानसभा में शुक्रवार को विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद राजस्थान विवाह का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन संशोधन विधेयक 2021 ध्वनि मत से पारित हो गया। हालांकि इससे पहले विपक्ष ने इस बिल को काला दिन बताते हुए मत विभाजन की मांग की थी जिसे आसन ने अस्वीकार कर दिया।

इसके विरोध में भाजपा विधायक सदन से वॉकआउट कर गए और संशोधन विधेयक को सदन में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस बिल के सदन में पारित होने के बाद अब बाल विवाह के लिए भी रजिस्ट्रेशन हो सकेगा। हालांकि बड़ी बात यह है कि भाजपा के साथ ही कांग्रेस समर्थित निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने भी इस बिल का विरोध किया।

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, राजेंद्र राठौड़, अशोक लाहौटी सहित कई बीजेपी विधायकों ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि बाल विवाह का रजिस्ट्रेशन करना उन्हें मान्यता देने जैसा कदम है, यह बाल विवाह रोकने के कानून शारदा एक्ट का भी खुला उल्लंघन है। इससे पहले बिल पर भाजपा की आपत्तियों को खारिज करते हुए संसदीय कार्य मंत्री धारीवाल ने साफ किया कि बाल विवाह के रजिस्ट्रेशन का मतलब उन्हें वैधता देना नहीं है।

बाल विवाह करने वालों के खिलाफ उसका रजिस्ट्रेशन करने के बाद भी कार्रवाई हो सकती है। रजिस्ट्रेशन का मतलब बाल विवाह को वैधता देना नहीं है। धारीवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में निर्देश दिए थे कि सभी तरह के विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।

धारीवाल ने कहा कि किसी नाबालिग की शादी हुई है तो बालिग होते हैं उसे विवाह रद्द करने का अधिकार भी होगा। धारीवाल ने कहा कि बाल विवाह देश में आज भी हो रहे हैं, यह केवल राजस्थान नहीं पूरे देश का मामला है। धारीवाल ने कहा कि कलक्टर को अगर गलत लगेगा तो वह मैरिज एक्ट के अनुसार उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।


वहीं भाजपा विधायक अशोक लाहोटी ने इस बिल को काला अध्यादेश बताते हुए कहा कि यह विधेयक एक काला अध्याय लिखेगा। लाहौटी ने कहा कि जब सभी धर्मों में धर्मगुरुओं को मैरिज सर्टिफिकेट देने का अधिकार है तो फिर हिंदू धर्मगुरुओं को सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार क्यों नहीं दिया गया? उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि अगर किसी ने कहा कि 14 साल की उम्र में शादी हुई है और 18 साल की उम्र में वह कहेगी कि मैं शादी रद्द करूंगी तो यह कैसे संभव होगा?

ब्लॉक स्तर पर होंगे शादी का रजिस्ट्रेशन
विधानसभा में विवाह के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन संशोधन विधेयक 2021 पारित होने के बाद अब ब्लॉक स्तर पर भी विवाह के रजिस्ट्रेशन हो सकेंगे। पहले पहले केवल जिला स्तर पर ही विवाह के रजिस्ट्रेशन होते आए हैं। इस कानून में प्रावधान यह भी है कि अगर विवाह के वक्त लड़की की आयु 18 साल से कम और लड़के की आयु 21 से कम है तो उसके माता-पिता को 30 दिन के भीतर इसकी सूचना रजिस्ट्रेशन अधिकारी को देनी होगी। बाल विवाह के मामले में लड़का-लड़की के माता-पिता रजिस्ट्रेशन अधिकारी को तय फॉर्मेट में ज्ञापन देकर सूचित करेंगे। इसके आधार पर रजिस्ट्रेशन अधिकारी उस बाल विवाह को रजिस्टर्ड करेगा।

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