राजस्थान की मंडियां दूसरे दिन भी बंद, 1200 करोड़ का कारोबार प्रभावित

राजस्थान की 247 मंडियां ( mandis ) बुधवार को दूसरे दिन भी बंद रही। दो दिनों में राज्य की मंडियों ( state mandis ) में 1200 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ है। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ ( Rajasthan Foods Trade Association ) की कार्यकारिणी एवं सहयोग/संघर्ष समिति की हुई बैठक में राज्य की मंडियों में चार दिन (25, 26, 27 व 28 अगस्त) हड़ताल रखने का निर्णय लिया गया है। संघ की ओर से आन्दोलन की आगे की रूपरेखा तय करने के लिए 28 अगस्त को पुन: सहयोग/संघर्ष समिति की बैठक आयोजित की जाएगी।

By: Narendra Kumar Solanki

Published: 26 Aug 2020, 02:16 PM IST

जयपुर। राजस्थान की 247 मंडियां बुधवार को दूसरे दिन भी बंद रही। दो दिनों में राज्य की मंडियों में 1200 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ है। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ की कार्यकारिणी एवं सहयोग/संघर्ष समिति की हुई बैठक में राज्य की मंडियों में चार दिन (25, 26, 27 व 28 अगस्त) हड़ताल रखने का निर्णय लिया गया है। संघ की ओर से आन्दोलन की आगे की रूपरेखा तय करने के लिए 28 अगस्त को पुन: सहयोग/संघर्ष समिति की बैठक आयोजित की जाएगी।
राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता ने बताया कि केन्द्र सरकार के कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, २०२० के विरोध में राज्य की मंडियों में चार दिन की हड़ताल रखी गई है। चार दिनों तक चलने वाली इस हड़ताल के कारण करीब २५०० करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।
गुप्ता ने बताया कि राजस्थान की मण्डियों में कार्य करने वाले व्यापारी संघ के आगामी निर्णय तक मण्डी सेस तथा कृषक कल्याण फीस मण्डी समिति को अदा नहीं करेंगे। बैठक में यह भी निर्णय हुआ कि भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल से सम्पर्क कर इस आन्दोलन को पूरे भारत के स्तर पर उठाया जाना चाहिए तथा राजस्थान से लगती पंजाब, हरियाणा तथा चण्डीगढ़ के पदाधिकारियों से भी चर्चा की जावें। बैठक में राज्य की सभी 247 मण्डियों के प्रतिनिधि तथा सहयोग/संघर्ष समिति के सदस्य उपस्थित थे।
क्यों हो रहा है विरोध
इसी अध्यादेश के अधीन मंडियों से बाहर काम करने वाले व्यापारी, मिलर, वेयरहाउसेज बगैर मण्डी लाइसेन्स तथा बिना मण्डी सेस चुकाये जिंसों की खरीद-फरोख्त कर सकेंगे। इस कानून के अनुसार राज्य के किसी भी कोने में किसान, ट्रेडर, आढ़तिया क्रय-विक्रय कर सकेंगे तथा राज्य के बाहर भी कृषि जिंस का खरीद-फरोख्त, बिना अनुज्ञापत्र लिए तथा बगैर मण्डी सेस चुकाये कर सकेंगे। इसके कारण मंडियों में कार्यरत व्यापारी व आढ़तियां का व्यापार समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया है। तथा मण्डी के बाहर असामाजिक तत्व सक्रिय हो जाएंगे।

Narendra Kumar Solanki Desk
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