जिस फर्म की गलती से गौरव की जान गई, उसी फर्म का चेक थमाने से खड़ा हुआ विवाद

मानसरोवर के एक पार्क में करंट की वजह से गौरव की मौत पर मंगलवार को 'गंदी सियासत' देखने को मिली। जिस फर्म की गलती की वजह से गौरव की जान गई थी, उस फर्म का दो लाख रुपए का चेक कार्यवाहक महापौर शील धाभाई गौरव के परिजनों को थमा आई। परिजनों ने पहले चेक ले लिया, लेकिन जब सच्चाई पता चली तो परिजनों ने वार्ड—31 के झूलेलाल मंदिर में जाकर चेक को लौटा दिया।

By: Umesh Sharma

Published: 27 Jul 2021, 09:49 PM IST

जयपुर।

मानसरोवर के एक पार्क में करंट की वजह से गौरव की मौत पर मंगलवार को 'गंदी सियासत' देखने को मिली। जिस फर्म की गलती की वजह से गौरव की जान गई थी, उस फर्म का दो लाख रुपए का चेक कार्यवाहक महापौर शील धाभाई गौरव के परिजनों को थमा आई। परिजनों ने पहले चेक ले लिया, लेकिन जब सच्चाई पता चली तो परिजनों ने वार्ड—31 के झूलेलाल मंदिर में जाकर चेक को लौटा दिया। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ परिजनों की तू तू मैं मैं भी हुई।

गौरव की मौत के बाद शील धाभाई ने वादा किया था कि वह उसके परिजनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएंगी। इसी मकसद से धाभाई दो लाख रुपए का चेक गौरव के परिजनों को देने उनके आवास पर पहुंची। महापौर ने इसे ग्रेटर नगर निगम की ओर से आर्थिक सहायता बताया। यही नहीं चेक जिस लिफाफे में था, वह लिफाफा भी ग्रेटर नगर निगम का था। परिजनों ने इसे निगम की सहायता मानकर चेक स्वीकार कर लिया। लेकिन बाद में चेक पर देखा तो आरसी एंटरप्राइजेज लिखा था। यह वही फर्म है, जिसके पास पार्कों के रखरखाव का ठेका है।

हंगामा हुआ, चेक लौटाया

सच्चाई पता चलने के बाद परिजन चेक लौटाने के लिए कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सेक्टर—31 के झूलेलाल मंदिर पहुंचे। यहां सभी जनप्रतिनिधि मौजूद थे। परिजनों ने सभी को खरीखोटी सुनाई और निगम पर कंपनी के साथ मिलीभगत के आरोप लगाए। परिजनों ने साफ कहा कि जिस कंपनी के कारण गौरव की जान गई, उसका चेक हम कैसे ले सकते हैं। यहां 15 मिनट तक हंगामा होता रहा और उसके बाद परिजन यहां से लौटे। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं की धक्का—मुक्की बात भी सामने आई है।

14 जुलाई को हुई थी मौत

मानसरोवर के सेक्टर 43 में पार्क में खेलते हुए 11 वर्ष के मासूम गौरव की 14 जुलाई को मौत हुई थी। इसके बाद 15 जुलाई को विधायक अशोक लाहोटी ने नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई के साथ 5 लाख रुपए के मुआवजे की मांग की थी। निगम आयुक्त ने 15 जुलाई को ही जेईएन और एलआई को निलम्बित कर दिया। मगर फर्म को ब्लैक लिस्टेट करने की बजाय केवल नोटिस देकर इतिश्री कर ली।

Umesh Sharma Reporting
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