Aghan Purnima 2020: शिव के साथ चंद्र देव का आशीर्वाद पाने का दिन, पूर्णिमा पर ऐसे करें महादेव की आराधना

29 दिसंबर 2020 मंगलवार को मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की उदया तिथि चतुर्दशी तिथि सुबह 7 बजकर 55 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि लग जाएगी। मार्गशीर्ष यानि अगहन माह की इस पूर्णिमा को अगहन पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। अगहन पूर्णिमा का विशेष महत्व है। पूर्णिमा पर स्नान, दान का महत्व माना गया है। इस दिन भगवान शिव के साथ ही चंद्रदेव की भी आराधना की जाती है। यह साल 2020 की आखिरी पूर्णिमा भी है।

By: deepak deewan

Published: 29 Dec 2020, 08:05 AM IST

जयपुर. 29 दिसंबर 2020 मंगलवार को मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की उदया तिथि चतुर्दशी तिथि सुबह 7 बजकर 55 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि लग जाएगी। मार्गशीर्ष यानि अगहन माह की इस पूर्णिमा को अगहन पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। अगहन पूर्णिमा का विशेष महत्व है। पूर्णिमा पर स्नान, दान का महत्व माना गया है। इस दिन भगवान शिव के साथ ही चंद्रदेव की भी आराधना की जाती है। यह साल 2020 की आखिरी पूर्णिमा भी है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि चंद्रमा को मन का कारक माना गया है इसलिए लोगों पर इसका प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ता है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने पूर्ण रूप अर्थात सभी कलाओं से युक्त होता है। कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अच्छी हो तो व्यक्ति शांत और सुखी रहता है। चंद्रमा कमजोर हो तो अशांत रहता है। ऐसे लोगों को मानसिक शांति के लिए पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा जरूर करनी चाहिए।

ज्योतिष शास्त्र में पूर्णिमा को एक विशेष तिथि के तौर पर देखा जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित एमकुमार शर्मा के अनुसार इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक-दूसरे के ठीक सामने होते हैं। सूर्य यानि नवग्रहों के राजा और चंद्रमा का यह दृष्टि संबंध बहुत शुभ माना गया है। इस दिन लक्ष्मीजी की विधि विधान से पूजा जरूर करना चाहिए। इससे आर्थिक मजबूती प्राप्त होती है। पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा बहुत शुभ फलदायी होती है।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार पूर्णिमा पर सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर शिवजी का ध्यान करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद विधि विधान से भगवान शिव की पूजा करें, उन्हें पुष्प, मिष्ठान्न आदि अर्पित करें। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें और देवी लक्ष्मी की पूजा करें। श्रीसूक्त के 16 श्लोकों का पाठ करें, संभव हो तो श्रीसूक्त के 16 श्लोकों का पाठ 16 बार करें।

इस साल मार्गशीर्ष अथवा अगहन पूर्णिमा दो दिन यानि 29 दिसंबर और 30 दिसंबर को है.
मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि और शुभ मुहूर्त-
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ- 29 दिसंबर को सुबह 7 बजकर 55 मिनट पर
पूर्णिमा तिथि समाप्त 30 दिसंबर को सुबह 8 बजकर 59 मिनट पर
मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत और पूजन 29 दिसंबर को
मार्गशीर्ष पूर्णिमा स्नान—दान 30 दिसंबर को

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