Matsya Dwadashi 2020 भगवान विष्णु के पहले और मत्स्य अवतार का दिन, सुख-संपत्ति प्राप्त करने के लिए इस विधि से करें पूजा

मार्गशीर्ष यानि अगहन माह के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि को मत्स्य द्वादशी मनाई जाती है। यह भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार का दिन है हालांकि इसकी तिथि को लेकर व्यापक मतभिन्नता है। अलग-अलग धर्मग्रंथों और पंचांगों में विष्णुजी के मत्स्य अवतार की अलग-अलग तिथि बताई गई है। मत्स्य पुराण में मत्स्य अवतार की तिथि के रूप में अगहन माह के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि का उल्लेख किया गया है. इस दिन वेदों की रक्षा के लिए विष्णुजी ने मछली का रूप लेकर राक्षस हयग्रीव को मारा था।

By: deepak deewan

Published: 26 Dec 2020, 08:18 AM IST

जयपुर. मार्गशीर्ष यानि अगहन माह के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि को मत्स्य द्वादशी मनाई जाती है। यह भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार का दिन है हालांकि इसकी तिथि को लेकर व्यापक मतभिन्नता है। अलग-अलग धर्मग्रंथों और पंचांगों में विष्णुजी के मत्स्य अवतार की अलग-अलग तिथि बताई गई है। मत्स्य पुराण में मत्स्य अवतार की तिथि के रूप में अगहन माह के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि का उल्लेख किया गया है. इस दिन वेदों की रक्षा के लिए विष्णुजी ने मछली का रूप लेकर राक्षस हयग्रीव को मारा था।

यही कारण है कि मत्स्य द्वादशी के दिन विष्णुजी की मत्स्य अर्थात मछली के रूप में पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि पौराणिक ग्रंथों के अनुसार एक बार दैत्य हयग्रीव ने वेदों को चुरा लिया। इसके कारण वैदिक ज्ञान लुप्त हो गया और सभी लोकों में अज्ञानतारूपी अंधकार फैल गया। तब धर्म और वेदों की रक्षा के लिए भगवान विष्णु आगे आए। उन्होंने मछली का रूप धारण कर राक्षस हयग्रीव का वध किया और वेदों कों भगवान ब्रह्माजी को सौंप दिया।

पंचांग के अनुसार इस बार अगहन माह के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि 26 दिसंबर यानि शनिवार को है। इसलिए आज मत्स्य द्वादशी मनाई जा रही है। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। ये भगवान विष्णु का पहला अवतार भी माना जाता है। इस दिन विष्णुजी की पूजा करने के साथ ही मछलियों को दाना देने का भी विधान है. जिनकी कुंडली में शुक्र दोष या, शुक्र नीच का हो, अस्त हो, अकारक हो, उन्हें इस दिन मछलियों को दाना जरूर देना चाहिए. इससे शुक्र संबंधी हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर भगवान विष्णुजी का ध्यान करते हुए पूजा व उपवास का संकल्प व्यक्त करें. बाद में विष्णुजी की पूजा-अर्चना विधिविधान से करें। पूजा के दौरान विष्णुजी के मंत्रों का जाप जरूर करना चाहिए। मत्स्य द्वादशी पर तालाबों या नदियों में मछली को आटे की गोलियां डालना चाहिए। विष्णुजी के 12 अवतारों में प्रथम अवतार मत्स्य अवतार ही है। इसलिए मत्स्य द्वादशी पर विष्णुपूजन का महत्व है।

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