महापौर पद : पार्षदों के बगावत की आशंका से खौफ में भाजपा, चुनाव का डर भी सता रहा

महापौर पद के लिए चल रही जद्दोजहद के बीच भाजपा संगठन अपनों पार्षदों के बगावती तेवर से परेशान है

By: Bhavnesh Gupta

Published: 18 Dec 2018, 09:12 PM IST

भवनेश गुप्ता . जयपुर। महापौर पद के लिए चल रही जद्दोजहद के बीच भाजपा संगठन ने अब बड़े नेताओं से मंथन शुरू कर दिया है। प्रदेश संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर ने मंगलवार को पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, सुरेन्द्र पारीक, महापौर अशोक लाहोटी व अन्य नेताओं से चर्चा की। महापौर के लिए योग्य प्रत्याशी चिन्हित करने, पार्षदों के बढ़ते विरोध को लेकर प्रदेश कार्यालय में मंथन हुआ।
पार्टी को चिंता है कि बगावती तेवर दिखा रहे कुछ पार्षद कांग्रेस को समर्थन दे सकते हैं। ऐसा हुआ तो न केवल पार्टी की साख खराब होगी, बल्कि कांग्रेस पार्षदों द्वारा कलक्टर के जरिए महापौर का चुनाव कराने की प्रक्रिया कराने की संभावना भी बनेगी। ऐसे में बगावती तेवर दिखा रहे पार्षदों के कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने की आशंका बनी रहेगी।
इस तरह की आशंका ने भी संगठन पदाधिकारियों को परेशान कर रखा है। कई पार्षद संगठन पदाधिकारियों को साफ कर चुके हैं कि यदि उनसे राय बिना ही चयन कर लिया गया तो वे कांग्रेस के साथ देने से परहेज नहीं करेंगे। सूत्रों के मुताबिक पार्टी भी इससे बचने का रास्ता तलाश रही है। इसके लिए उपमहापौर को महापौर का चार्ज सौंपा जा सकता है। ऐसा करके इस मामले को लोकसभा चुनाव तक खींचा जा सकता है। हालांकि, पार्षद इसके पक्ष में नहीं दिख रहे।

महापौर को इस्तीफा देने के संकेत
महापौर और विधायक में से एक पद पर रहने के नियम के बीच मामला उलझा है। सूत्रों के मुताबिक कई धड़ों मेें बंटे पार्षदों को बगावत करने से रोकने के लिए संगठन ने अशोक लाहोटी को महापौर पद से इस्तीफा देने के संकेत दे दिए हैं। हालांकि, आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

इस तरह बन रही चुनाव की स्थिति
—नगर निगम बोर्ड की बैठक हर 3 माह में बुलाने का नियम है। पिछली बोर्ड बैठक हुए तीन माह बीत चुके हैं।
—कांग्रेस पार्टी सत्ता में है और किसी भी कांग्रेसी पार्षद के जरिए कलक्टर को पत्र भेजा जा सकता है। इसमें बोर्ड बैठक बुलाने का आग्रह किया जाएगा। लेकिन बोर्ड बैठक महापौर के बिना नहीं हो सकती, क्योंकि वह बोर्ड अध्यक्ष है। ऐसे में कलक्टर चुनाव कराने के लिए आदेश दे सकते हैं।
—हालांकि, बोर्ड भाजपा का है लेकिन सर्वसम्मति से निर्णय नहीं कराने की स्थिति में चुनाव में कांग्रेस का साथ देने की आशंका बनी रहेगी। इसी का भाजपा को डर है। यही कारण है कि संगठन अब विधायकों, बड़े नेताओं से राय ले रहा है।


कौन—कहां दावा कर रहा...
—उपमहापौर मनोज भारद्वाज के लिए संगठन के एक महामंत्री सक्रिय हैं। साथ ही एक धार्मिक स्थल के महंत का साथ भी लिया जा रहा है। कई विधायकों से संपर्क बनाया।
—पार्षद विष्णु लाटा एक दिन पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं। उन्होंने सांगानेर विधानसभा सीट पर प्रत्याशी के साथ देने की बात दोहराई।
—पार्षद अनिल शर्मा व भगवत सिंह देवल बिल्कुल नहीं चाहते कि अशोक लाहोटी के चहेते तो यह पद मिले। उन्होंने इस पद के लिए खुद की दावेदारी के साथ उपमहापौर के लिए भी चर्चा छेड़ दी है। सूत्रोें की मानें तो इन्होंने पार्षदों से चर्चा करने के बाद ही नाम फाइनल करने के लिए कहा है। निर्वतमान मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से भी मिले।
—महापौर अशोक लाहोटी के साथ चुनाव के दौरान पार्षद मुकेश लख्यानी साथ रहे। लाहोटी लख्यानी के लिए जोर दे सकते हैं।

यूं समझें गणित...
भाजपा के 64 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के बैनर पर 18 पार्षद चुनकर निगम पहुंचे। इनके अलावा 9 निर्दलीय हैं और ज्यादातर ने कांग्रेस को समर्थन दे रखा है। महापौर चुनने के लिए यदि समर्थन प्रक्रिया की जरूरत पड़ती है तो 46 पार्षद चाहिए होंगे। बोर्ड भाजपा का है, इसलिए सामान्य तौर पर चिंता नहीं है लेकिन यदि चर्चा बिना महापौर का नाम तय किया जाता है तो फिर कथित भाजपा पार्षद विरोध में आ सकते हैं। इससे चिंता बढ़ेगी।

 

—इस मामले में पार्षदों से चर्चा कर रहे हैं। पार्षद दल की बैठक बुलाकर उसमें नाम तय करने की कोशिश करेंगे। —संजय जैन, अध्यक्ष (जयपुर शहर), भाजपा

Bhavnesh Gupta Reporting
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