मिलिए जयपुर शहर के रॉकस्टार्स से जिनके गानों ने विदेशों में भी लोकप्रिय हैं

ये कहानी जयपुर के इन दो युवाओं की हैं। जिन्होंने म्यूजिक की खातिर अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी।

By: Nakul Devarshi

Published: 04 Jan 2018, 03:31 PM IST

'कुछ लोग होते हैं ना ,अजीब से ,थोड़े पागल , किसी और ही दुनिया में रहते हैं , वैसा ही था जी जॉर्डन। "रॉकस्टार" फिल्म में ये डायलॉग तब आता हैं जब एक रिपोर्टर (अदिति राओ हैदरी) जॉर्डन (रणबीर कपूर) के बारे में खटाणा भाई (कुमुद मिश्रा)से पूछती हैं। रॉकस्टार । ये फिल्म एक सितारे की कहानी नहीं हैं बल्कि उस सितारे के पीछे के 'गहरे अंधेरें' की कहानी है।

चाहें वो रणबीर की एक्टिंग हो या इम्तियाज़ अली का निर्देशन हो या फिर ए आर रहमान का संगीत । तीनो ही इस फिल्म की सफलता के स्तम्भ हैं। लेकिन "रॉकस्टार" की सफलता का सबसे बड़ा कारण कहानी का मुख्य किरदार ' जॉर्डन' है। जॉर्डन एक मिडिल क्लास फैमिली का लड़का जो म्यूजिशियन बनना चाहता हैं। जिसे अपने पैशन फॉलो करने की ये सज़ा मिलती है उसे घर से बाहर निकल दिया जाता है। लेकिन फिर भी मस्जिदों में वो कव्वाली गाता है। जगरातो में वो भजन गाता है। आखिर में इस फिल्म का वो क्लाइमेक्स नहीं होता है जो अधिकांश बॉलीवुड फिल्मो का होता है।क्यूंकि ये एक कलाकार की कहानी थी । किसी फ़िल्मी हीरो की नहीं थी और कलाकारों की कोई happy or sad ending नहीं होती हैं उन्हें तो बस चलते जाना होता हैं।

कुछ ऐसी ही कहानी हमारे शहर जयपुर के इन दो युवाओं की हैं। जिन्होंने म्यूजिक की खातिर अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी। अपने सपनों की खातिर सारी दुनिया से लड़े परिवार ,समाज से लेकर दोस्तों तक सबने म्यूजिक छोड़ने के लिए कहा, तरह-तरह के हालातों का सामना करना पड़ा। लेकिन दोनों युवाओ ने हिम्मत नहीं हारी और अपना म्यूजिक बैंड "ड्रीम नोट" बनाया। जयपुर का ये मशहूर बैंड आज गानों से न सिर्फ देशभर बल्कि विदेशों में धूम मचा रहा हैं।

जब हम 'रॉकस्टार 'देखते है तो शायद जॉर्डन का दर्द हमें महसूस होता हैं उसका संघर्ष हमें अपना संघर्ष लगता है। पर क्या ये सब चीजे हमें सिर्फ फ़िल्मी किरदारों के लिए महसूस होती है। क्या हमारा ये प्यार सिर्फ सिनेमा हॉल तक सीमित रहता है ? क्या ये प्यार हम उस वास्तविक जॉर्डन को दे सकते हैं जो आपके और हमारे बीच में रहता है पर हम उसे जानते तक नहीं है ? तो आइये आज आपको मिलवाते हैं सिंगर-लिरिसिस्ट गौरव तिवारी और गिटारिस्ट-कंपोजर सचिन शर्मा से जिन्होंने "ड्रीम नोट" बैंड बनाया । आज "ड्रीम नोट" बैंड राजस्थान के टॉप बैंडों में शुमार हैं ।आइये जानते है इन दोनों युवा शख्सियतों की अर्श से फर्श तक की कहानी :

प्रश्न :आप दोनों का म्यूजिक से सबसे पहले परिचय कैसे हुआ ?

गौरव : मेरे घर में सब लोग संगीत से जुड़े हुए हैं। माँ एक स्कूल में म्यूजिक टीचर हैं और पापा को भी म्यूजिक से बहुत लगाव हैं। उन्होंने अपने समय में कई जगहों पर बतौर सिंगर परफॉर्म किया था। मेरे नाना जी एक संगीतकार थे। पर बचपन में मुझे म्यूजिक से कोई ख़ास लगाव नहीं था। फिर स्कूल में म्यूजिक में थोड़ी रूचि हुई और वहां से परफॉर्म करना शुरू किया। स्कूल में परफॉर्म करके जो मज़ा आया वो लाजवाब था। फिर कॉलेज गया तो वहाँ पर जो कॉलेज के बैंड्स में काम किया। जिससे म्यूजिक में मेरा कॉन्फिडेंस और नॉलेज बढ़ा। वहाँ मेरे सीनियर्स ने मुझे काफी प्रमोट किया । कॉलेज के दिनों में ही मैंने एक बार करीब 2000 दर्शकों के सामने परफॉर्म किया। उस समय उस समय जो दर्शकों का रिस्पांस और प्यार मिला तभी से इस क्षेत्र में करियर बनाने का मन बना लिया।

सचिन :मेरी कहानी गौरव की कहानी से बिलकुल विपरीत हैं। मेरा परिचय म्यूजिक से अपने स्कूल में हुआ था। एक दिन मैंने क्लास में 'कांगों' इंस्टूमेंटल प्ले किया। हमारी क्लास टीचर को वो इतना अच्छा लगा कि उन्होंने मुझे इंस्ट्रूमेंट सीखने के लिए कहा। मुझे आज तक नहीं पता की मैंने वो बिना कोई ट्रेनिंग के कैसे बजाया और टीचर को कैसा लगा। पर वहीं से मैंने गिटार और ड्रम के लेसन लेने शुरू किये। बाद में स्कूल के कल्चरल फंक्शन्स में गिटार पर परफॉर्म करना शुरू किया। वहाँ से लोगो का प्रोत्साहन मिला इससे मेरा भी उत्साह बढ़ा। वहीं से ये सफर शुरू हुआ।

प्रश्न : पहली बार आप एक दूसरे कब मिले थे ? आप दोनों ने मिलकर ड्रीम नोट बैंड कब बनाया?

गौरव : ड्रीम नोट हमारा पहला बैंड नहीं था। कॉलेज के बाद मेने "हैरत" बैंड में काम किया था। उस समय हम लोग अलग-अलग कॉलेजों और शहरो में जाकर पर परफॉर्म करते थे। 2011 में कॉलेज में एक शो के दौरान मेरा सचिन से मिलना हुआ। सचिन वहां परफॉर्म करने आये हुए थे। हम दोनों का म्यूजिक के प्रति हमारा नज़रिया और सोच काफी कुछ एक जैसा था । "हैरत" बैंड से मुझे काफी प्यार और रिस्पॉन्स मिला था। हैरत के साथ मेरा अनुभव भी बहुत अच्छा रहा। फिर उसके बाद उस बैंड में क्रिएटिव डिफ्रेंसेज आने लग गए। तब मैंने और सचिन ने मिलकर 2012 में RJ 14 बैण्ड बनाया।

प्रश्न :फिर ड्रीम नोट बैंड कैसे बना?

सचिन : RJ 14 बैंड का पहला परफॉरमेंस बिड़ला ऑडिटोरियम में हुआ था। पहले शो के बाद से ही हमे एक तरह से" रीजनल सेलिब्रिटी" वाला स्टेटस मिल गया था। उसके बाद हम लगातार अच्छा काम करने में लग गए। हमनें अलग शहरो में जाकर परफ़ॉर्म किया और खूब कवर्स सांग्स तैयार किये। मगर एक ही चीज़ करते रहने से थोडे समय बाद बोरियत होने लगती हैं।तब ये ख्याल आने लगा कि यार कब तक हम लोग दुसरो के गानों पर परफॉर्म करते रहेंगे ? हम हमारे गानो पर परफॉर्म कब करेंगे ? फिर बैण्ड के दूसरे मेंबर उतने एक्टिव नहीं थे। उनके लिए अब बैंड पहली प्राथमिकता नहीं थी और कम्युनिकेशन गैप और दूसरी अन्य वजहों से RJ 14 भी बैंड भी बंद हो गया। फिर 2014 में हमने हमारे दोस्त अक्षय अग्रवाल के साथ मिलकर "ड्रीम नोट" बनाया।

Gaurav and Sachin

प्रश्न :आप दोनों ने अपनी नौकरी छोड़ दी। जब म्यूजिक से आप लगातार जुड़े हुए थे ,ज़िंदगी में स्थिरता आ ही चुकी थी, समाज में जगह आप बना ही चुके थे। ऐसा क्या हो गया था कि एकदम से रिवर्स गियर लगाना पड़ा ?

सचिन : ड्रीम नोट बैंड बनने से पहले ही मैं जॉब कर रहा था। लेकिन पूरा वक्त म्यूजिक को नहीं दे पा रहा था। पेरेंट्स को लेकर मैं बहुत सेंसेटिव था इसलिए जॉब छोड़ना उस वक्त मुमकिन नहीं था। एक साल तक काम करने के बाद भी लाइफ में कुछ कमी लग रही थी। म्यूजिक से दूर रहना बहुत ही मुश्किल हो गया था। जॉब भी अधूरे मन से कर रहा था। मेरे लिए अगर मेरा जीवन एक "शरीर" हैं तो म्यूजिक उसमे बहने वाला "खून" है। सब कुछ बुरा लगने लग गया। आखिर कार मैने अपने परिवार से बात की और मेरी उम्मीदों के परे जाकर उन्होंने मुझ पर भरोसा दिखाया। फिर मैने जॉब छोड़ दी। मैं बहुत ही खुशकिस्मत हुँ कि उन्होंने मेरी बात समझी। मुझे अपना पैशन फॉलो करने दिया। आपका परिवार अगर आपके साथ है तो बहुत सारी दिक्क़ते दूर हो जाती है ।

प्रश्न :गौरव आपकी तो सरकारी नौकरी थी।

गौरव : जब सचिन जॉब कर रहा था तो बैंड का काम बहुत ही धीमे हो गया था। जो सोचा था वो काम कर ही नहीं पा रहे थे। सचिन को मैं बार -बार जॉब छोड़ने के लिए कहता रहता था। ताकि मिलकर कुछ काम कर सकें। हमारा बैंड सिर्फ नाम का ही रह गया था। कोई कुछ काम नहीं चल रहा था। अकेला मैं कुछ कर नहीं पा रहा था। फिर वो वक्त आया जब मुझे खुद को पता नहीं चल रहा था की ये क्या हो रहा हैं ? और क्युँ हो रहा हैं? इंजीनीयरिंग करने के बाद घर पर बेकार बैठना घरवालों से ज़्यादा मुझे बुरा लगता था। हालाँकि मेरे घरवालों की तरफ से कोई दबाव नहीं था पर मुझे खुद को लगने लगा था की अब कुछ तो करना पड़ेगा । सारा कॉन्फिडेंस और सपने बिखर रहे थे। फिर एक दिन दिल्ली में इंटरव्यू देने गया। जॉब करने के लिए दिल गवाही नहीं दे रहा था। इंटरव्यू बिना कोई तैयारी दिया लेकिन अगले महीने मैं सिविल इंजीनियर की जॉब कर रहा था। जैसे ही मैंने ज्वाइन किया तभी सचिन ने अपनी जॉब छोड़ दी। अब तो बिलकुल दिमाग ख़राब हो गया। जॉब लगने के बाद उसे छोड़ना बहुत ही मुश्किल होता हैं। क्यूंकि अब सोसायटी में एक जगह मिल चुकी थी। अब तो दिन रात परेशान रहने लग गया जॉब में मन नहीं लग रहा था। हमेशा सोचता था कि यहां क्या कर रहा हु?इतना तो वहीं कमा लेता। घरवाले भी परेशान रहने लगे।। डिप्रेस रहने लग गया। मेरी हालत पागलो जैसी हो गयी। वो वक्त आ ही गया जब मुझे फिर से एक और डिसीजन लेना था। "भूखे रहकर म्यूजिक या फिर आराम पसंद वाली नौकरी" में से एक को चुनना था। मैने म्यूजिक का हाथ पकड़ा और उस डिप्रेशन से बाहर निकला। इस पूरे वक्त में मेरे परिवार ने पूरा साथ दिया। मेरे मम्मी-पापा ने बहुत ख्याल रखा था।

प्रश्न : हाल ही में जयपुर में आयोजित एक म्यूजिक इवेंट में सिंगर "सोना महापात्रा" ने कुछ सिंगर्स के म्यूजिक और उनके गानो की आलोचना की थी। इस बारे में आप का क्या कहना हैं ?

सचिन : जिस किसी भी तरह का म्यूजिक आज ट्रेंड में हैं तो इसका मतलब वो दर्शको को अच्छा लग रहा हैं। हर तरह के आर्टिस्ट का एक अपना निश्चित दर्शक वर्ग होता हैं। और उसी को ध्यान में रखकर वो गाने बनाते हैं। आप किसी आर्टिस्ट के बारे अपनी खुद की ओपिनियन रख सकते हैं पर आप किसी को जज नहीं कर सकते। इतने बड़े देश में हर तरह के म्यूजिक और आर्टिस्ट का अपना एक दर्शक वर्ग हैं। अगर आप को पसंद हैं तो सुनो ,नहीं हैं तो मत सुनो।

 

Gaurav and Sachin

प्रश्न : राजस्थानी "फोक म्यूजिक" जो कि अभी पहचान के संकट से गुजर रहा हैं। हालांकि राजस्थान के कई म्यूजिक बैंड और कलाकार फिर से लोकप्रिय बनाए की कोशिश में लगे हुए हैं। उस दिशा में कुछ करने का सोचा हैं ?

गौरव : बिलकुल। इस ज़मीन से हम हैं तो यहां का म्यूजिक तो हमारी प्राथमिकता होगी। पर मेरी नज़र में फोक म्यूजिक एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी हैं। मैं इसे तब तक नहीं करना चाहूंगा जब तक मैं खुद उसके लायक नहीं बन जाऊ। मैं फोक म्यूजिक के नाम पर "फोक फ्यूज़न" या फिर कोई "फोक मिक्स म्यूजिक"नहीं करना चाहता हूँ। जो ओरिजनल फोक म्यूजिक हैं उसे फिर से एक बार लोगो के सामने लाने का और लोकप्रिय बनाने का प्रयास जरूर करूँगा। .

प्रश्न : सचिन आप किस तरह के म्यूजिक से सबसे ज़्यादा प्रभवित हैं ?

सचिन : सब तरह का म्यूजिक अच्छा लगता हैं । पर प्रभावित होने और नक़ल करने में बहुत बड़ा अंतर है। मुझे पॉप , मेटल ,रॉक , फोक, जैज़ म्यूजिक काफी पसंद है । ब्रायन एडम्स मेरे पसंदीदा कलाकार हैं। हाँ जब मैं कंपोज़ करने बैठता हूँ तो ये सारी चीज़े दिमाग में नहीं रहती हैं। उस वक्त जो लिरिक्स और फील के हिसाब से बेस्ट लगता हैं वही करता हूँ।


प्रश्न :आपकी अपने बैंड को लेकर और अपने कॅरिअर लेकर आगे क्या योजना हैं?

गौरव : अच्छे और एक्सपेरिमेंटल गाने बनाने की हमारी कोशिश रहेंगी। हमने वाला हाल ही में एक गाना "तेरे जाने के बाद" को रिलीज़ किया हैं। जिसे बहुत पसंद किया जा रहा है। ये गाना हमारी लिए अब तक का सबसे चैलेंजिंग गाना था। सबसे बड़ा चैलेंज अच्छे कंटेंट को लगातार अंतराल पर रिलीज़ करना हैं। इसके ही साथ हमने राजस्थान की पॉपुलर हिंदी वेब सीरीज "नो ऑफेन्स" और इंग्लिश वेब सीरीज़ "हिअर इज अनदर स्टोरी" सहित कई वेब सीरीज़ में म्यूजिक दिया है। जिसे बहुत पसंद किया जा रहा हैं। इन प्रोडक्शन हाउसेस के साथ काम करके भी हमने बहुत कुछ सीखा हैं। आगे भी बड़े लेवल पर काम करने का मौका मिलता हैं तो करेंगे।

सचिन : सबसे बड़ा अगर कोई चैलेंज हैं तो वो है लगातार अच्छे गाने रिलीज़ करना। क्यूंकि यु ट्यूब के हमारे ऑडियंस हमें बहुत ही ज़्यादा प्यार करते हैं। आप जब यू ट्यूब पर कमैंट्स देखेंगे तो समझ जायेंगे (हँसते हुए)। उनको हमसे यही शिकायत रहती है कि हम लगातार गाने अपलोड क्यों नहीं करते हैं? हमारे दर्शक इंडिया में ही नहीं बल्कि बांग्लादेश, पाकिस्तान, और नेपाल में भी हैं।वहां से भी लोग कमैंट्स करते हैं। ये अहसास बहुत ज़बरदस्त हैं जब लोग तुमसे नाराज़ हो रहे हैं क्यूंकि तुम उनके लिए गाने नहीं बना रहे हो (हँसते हुए)। इसके अलावा कई बड़े फिल्म प्रोडक्शन हाउसेस से भी म्यूजिक के लिए बात चल रही हैं।

प्रश्न :आप दोनों कहाँ देखते हैं अपने आप को आने वाले समय में ?

सचिन : ये बहुत मुश्किल सवाल पूछ लिया (हँसते हुए)। सच बताऊ तो कहीं पहुंचने के लिए हम ये सब नहीं कर रहे हैं। हमारी जर्नी में कोई फुल स्टॉप नहीं हैं। एक तरह से सोचें तो अभी तक का सफर ही अपने आप में एक मंज़िल हैं। पर हम रुकना नहीं चाहते हैं। न हमें कहीं पहुंचने की जल्दी है न रुकने का डर। अपने पैशन को हम फॉलो कर रहें हैं और काम कर रह रहे हैं ।

गौरव : लोगो ने हमें स्वीकारा हैं। ये हमारे लिए सबसे बड़ा इनाम हैं। हाँ हम अच्छे लोगो के साथ काम करना चाहते हैं पर ऐसा कोई डेड लाइन फिक्स नहीं है की वहां पहुंच गए तो सक्सेसफुल बन जायेंगे । किसी बड़े बैनर के साथ कर लेना हमारे लिए सक्सेस नहीं हैं। मैं चाहता हूँ कि ये सफर कभी ख़त्म ही ना हो।

प्रश्न :आप रॉकस्टार से कितना प्रभावित है? इस फिल्म में "जॉर्डन" की दुनिया एक लड़की बदल देती हैं। आप की ज़िंदगी में किसी के साथ ऐसा कुछ इमोशनल एक्सपीरियंस रहा हैं ?

गौरव : अब तक रॉकस्टार ने एक तरह से "फ्यूल" का काम किया है। इस फिल्म में एक डायलॉग है "टूटे दिल से ही संगीत निकलता है "। जो बहुत हद तक सही भी हैं। उस फिल्म से मैं बहुत इंस्पायर हूँ। हाँ, उस वक्त कोई ज़िंदगी में था और वो छोड़ के चला गया था। हमारा पहला गाना "फिर ना आऊंगा "उसी से जुड़ा हुआ था। जिसे दर्शकों ने बहुत सराहा था। कहीं ना कहीं उस लड़की का भी मेरी म्यूजिकल जर्नी में रोल हैं और शायद ये बात उसको पता भी नहीं हैं।

 

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