घुटने में मेनिसकस की चोट बना सकती है अपंग

Meniscus Injury : knee के जोड़ हमारे शरीर के Important Joints में से एक हैं। हमारी Small Activities में भी Knee Joints काम आते हैं। इनमें होने वाली समस्या से हमारी सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती है। कई बार कोई Game खेलते हुए या गलत मूवमेंट के दौरान हमें knee Injury हो जाती है जिसे नजर अंदाज करने पर उसकी परेशानी काफी ज्यादा बढ़ जाती है। यह चोट है Meniscus Tier। मेनिसकस की चोट लगने पर मरीज चलने फिरने को भी मोहताज हो जाता है।

By: Anil Chauchan

Published: 20 Oct 2019, 06:00 PM IST

Health news जयपुर . घुटने ( knee ) के जोड़ हमारे शरीर के महत्वपूर्ण जोड़ों ( Important Joints ) में से एक हैं। हमारी छोटी-छोटी गतिविधियों ( Small Activities ) में भी घुटने के जोड़ ( Knee Joints ) काम आते हैं। इनमें होने वाली समस्या से हमारी सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती है। कई बार कोई गेम ( Game ) खेलते हुए या गलत मूवमेंट के दौरान हमें घुटने की एक ऐसी चोट ( knee Injury ) लग जाती है जिसे नजर अंदाज करने पर उसकी परेशानी काफी ज्यादा बढ़ जाती है। यह चोट है मेनिसकस टियर ( Meniscus Tier ) । मेनिसकस की चोट लगने पर मरीज चलने फिरने को भी मोहताज हो जाता है।
एचसीजी हॉस्पिटल के सीनियर स्पोट्र्स इंजरी विशेषज्ञ व ऑर्थास्कोपी सर्जन डॉ. अरुण सिंह ने बताया कि हमारे घुटने के जोड़ में गद्देनुमा पदार्थ होता है, जिसे मेनिसकस कहा जाता है। हमारे चलने या दौडऩे जैसी गतिविधि में मेनिस्कस दोनों हड्डियों को आपस में टकराने नहीं देता है। दोनों जोड़ों में ऐसे दो कार्टिलेज होते हैं। कई बार फुटबॉल, हॉकी, बास्केटबॉल, क्रिकेट या अन्य किसी गतिविधि के दौरान चोट लग जाती है। आमतौर पर यह चोट खेल के दौरान ही लगती है। यदि इसका समय पर इलाज न कराया जाए तो आपको समय से पहले आर्थराइटिस हो सकता है जो आपको चलने-फिरने में भी असमर्थ कर देगी।

मेनिसकस की चोट से बचना जरूरी -:
- ट्रीटमेंट में मेनिसकस रिपेयर सर्जरी की नई तकनीक आई
- चलने को कठिनाई पैदा कर सकती है मेनिसकस की चोट
- चोट लगने पर तुरंत करें एक्सपर्ट से संपर्क
- घुटने का जोड़ शरीर के महत्वपूर्ण जोड़ों में से एक

यदि मेनिसकस की चोट के लक्षण आपके सामने आ रहे हैं तो लापरवाही न करते हुए तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। डॉ. अरुण ने बताया कि चोट के बारे में स्पष्ट जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रभावित जोड़ का एमआरआई टेस्ट करवाया जाता है। अत्याधुनिक तकनीक से छोटे चीरे के जरिए ऑर्थोस्कोपी विधि से इसका उपचार किया जाता है। ऑर्थोस्कोपी से सर्जरी के दौरान मरीज का कम रक्त स्त्राव होता है और मांसपेशियों का कम कटाव होता है। इसके ट्रीटमेंट में मेनिस्कस रिपेयर सर्जरी की नई तकनीक आई है। पहले मेनिस्कस के फटने पर उसके क्षतिग्रस्त हिस्से को निकाल दिया जाता था, लेकिन अब नई तकनीक में कटे हुए मेनिस्कस को रिपेयर कर दिया जाता है। मेनिसकस रिपेयर से भविष्य में आर्थराइटिस की संभावना भी कम हो जाती है। इससे ऑपरेशन के बाद मरीज को जल्दी ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है।

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