दिमागी सेहत को दुरुस्त रखने के लिए कीजिए कुछ ऐसे जतन

शरीर के साथ—साथ दिमागी सेहत को भी सही रास्ते पर रखना जरूरी है; कोरोना और लॉकडाउन के दौर में दिमागी सेहत को दुरुस्त रखने के लिए इन टिप्स पर भी नजर डालिए।

By: Amit Purohit

Published: 20 May 2020, 03:22 PM IST

लॉक डाउन से हो रहा तनाव? निकल जाइए 'मिनी वैकेशन' पर!
इससे किसी को इंकार नहीं होगा कि 'परिवर्तन संसार का नियम है' पर शायद ही कोई स्वीकार करें कि 'जड़ता हमारा स्वभाव बन गया है।' मनोविश्लेषकों के अनुसार इंसानी स्वभाव की जड़ता, किसी ऐसे बदलाव को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाती, जो उनकी इच्छा के अनुकूल न हो। ऐसे में तनाव होता है। इस तनाव को मिटाने का सबसे अच्छा तरीका बदलाव के साथ सहज होने का है। अच्छा हो या बुरा, हर बदलाव आपको कुछ सीखा कर जाएगा। हमेशा खुद को नौसिखिया माने और सीखने के लिए तैयार रहें। अपनी कंफर्ट जोन तोडऩे के लिए खुद भी लगातार कुछ नया करते रहेें।

समस्या के दायरे से बाहर निकल कर भी तलाशिए हल!
अगर आप किसी समस्या का हल नहीं तलाश पा रहे हैं तो थोड़ी देर के लिए उससे दूर हट जाइए। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार 'दायरे से हटकर' देखना समस्या का हल तलाशने में मदद कर सकता है। समस्या के साथ मानसिक दूरी बढऩे से, रचनात्मक समाधानों में वृद्धि हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तब हम अधिक सारगर्भित सोच पाते हैं। असंबद्ध अवधारणाओं के बीच अप्रत्याशित संबंध बनते हैं, जिससे हमारे दिमाग को समस्या सुलझाने की अपनी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। खेलते समय कोई खिलाड़ी अपने खेल का पूरा विश्लेषण नहीं कर सकता जबकि स्टेडियम से बाहर बैठे दर्शक को समूचा परिदृश्य दिखाई देता है।

खाली बैठे रहेंगे तो तनाव को घर बनाने में होगी आसानी
जहां बैठने की जगह हो, वहां खड़े मत रहिए और जहां लेटने की जगह मिल जाए, वहां बैठे मत रहिए। अगर आप भी उपरोक्त कथन में यकीन रखते हैं तो भी यह तय मानिए कि आप उन लोगों की तुलना में अधिक तनावग्रस्त होंगे जो सक्रिय रहने में ज्यादा यकीन रखते हैं। 'खाली दिमाग शैतान का घर' वाली कहावत भी शायद इसीलिए रची गई थी। कई शोधों में साबित हो चुका है कि खुद को सक्रिय रखना, तनाव से दूर रहते हुए दिमागी सेहत को को दुरुस्त रखने का सबसे बेहतरीन उपाय है। अगर आपको व्यस्त रहने के लिए प्रेरणा की तलाश है तो अपने घर के बुजुर्गों को भी याद कर सकते हैं, जिन्हें आपने शायद ही कभी खाली बैठे देखा होगा।

चिंताएं भी होती हैं असली और नकली, लिख कर पहचाने!
यदि बोलना 'चांदी' है, चुप रहना 'सोना' है तो लिख डालना 'हीरा' है! खासतौर पर ऐसे तनावों के बारे में जो आपकी नींद उड़ाए हुए हैं। ऐसी तमाम दुश्चिंताओं को कागज पर लिख डालिए और आप पाएंगे कि उनमें से आधे से ज्यादा डर ऐसे हैं जो पूरी तरह काल्पनिक हैं। आप उन सभी चीजों के बारे में सोच रहे हैं जो आपको आज तनाव दे रही हैं, लेकिन कल उनका कोई अस्तित्व नहीं होगा। वास्तविक के लिए योजना बनाइए, पर चिंतित न हो। इससे पहले कि वे आपकी नींद उड़ा डालें, उन्हें लिखें और आश्वस्त हो जाएं कि जिनसे निपटना है, उन्हें सुबह देखेंगे! पुलों के आने से पहले उन्हे पार नहीं किया जा सकता।

Amit Purohit Desk
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