मेरा वेटरनरी अस्पताल मेरा अभिमान योजना- एक माह में मिली डेढ़ करोड़ से अधिक की मदद


योजना के सार्थक परिणाम आए सामने

By: Rakhi Hajela

Published: 12 Jul 2021, 09:54 PM IST



जयपुर, 12 जुलाई
राज्य के वेटरनरी अस्पतालों, वेटरनरी इंस्टीट्यूट्स (Veterinary Hospitals, Veterinary Institutes) की दशा में बदलाव के लिए शुरू की गई मेरा वेटरनरी अस्पताल मेरा अभिमान योजना (Mera Veterinary Hospital Mera Abhiman Yojana) के सार्थक परिणाम देखने को मिले हैं। मात्र एक माह में इस योजना के तहत इन इंस्टीट्यूट्स को तकरीबन डेढ़ करोड़ से भी अधिक की मदद मिली और इनकी दशा में बदलाव आया।
क्या है योजना ?
गौरतलब है कि राज्य के सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने में भामाशाहों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भामाशाहों के योगदान के कारण सरकारी स्कूलों को अब निजी स्कूलों के समकक्ष माना जाने लगा है। स्कूलों में आए इस बदलाव को देखते हुए पशुपालन विभाग (Animal husbandry) भी इसी प्रक्रिया की तर्ज पर अपने वेटरनरी अस्पतालों की दशा सुधारने का प्रयास किया और मेरा पशु चिकित्सालय मेरा अभिमान योजना शुरू की है। योजना के तहत प्रदेश में संचालित किए जा रहे वेटरनरी इंस्टीट्यूट्स में रेफ्रिजेटर, टेबल, कुर्सी, कम्प्यूटर आदि मूलभूत सुविधाओं के साथ ही इनमें रंगरोगन, मरम्मत आदि के लिए जन सहयोग लिया। योजना के अच्छे परिणाम सामने आए।
इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट के लिए मिली मदद
विभाग ने वेटरनरी संस्थानों को निर्देश दिए थे कि योजना के तहत किसी भी प्रकार की वित्तीय मदद नहीं ली जाए। भामाशाह संस्थान के इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए यदि संसाधन उपलब्ध करवाते हैं तो उसे स्वीकार किया जाए। योजना शुरू होते ही भामाशाह इन संस्थानों की मदद के लिए आगे आए और वेटरनरी इंस्टीट्यूट्स को वॉटर कूलर, पंखे, ऑफिस चेयर, रेफ्रिजरेटर, सीलिंग फैन,वॉटर फिल्टर, कंप्यूटर प्रिंटर, स्कैनर, वॉटर प्यूरीफायर, आरओ मशीन, इन्र्वटर आदि तो उपलब्ध करवाए ही साथ ही कई जिलों में इन संस्थानों के रेनोवेशन में भी मदद की। कई वेटरनरी संस्थान ऐसे थे जिनकी ब्राउंड्री वॉल ही नहीं थी तो कई जगहों पर पशुओं के लिए कैटल शेड तक का अभाव था। इतना ही नहीं पशुओं के ट्रीटमेंट के लिए ऑपरेशन रूम नहीं होने के कारण भी कई वेटरनरी इंस्टीट्यूट्स में परेशानी आ रही थी। इन भामाशाहों ने यह सभी सुविधाएं इन वेटरनरी इंस्टीट्यूट्स और अस्पतालों को उपलब्ध करवाई। नतीजा यह रहा कि मात्र एक माह में ही इन संस्थानों का स्वरूप बदल गया।

इन जिलों में मिले बेहतरीन परिणाम
कोटा, करौली, बूंदी, बारां, झालावाड़, जोधपुर,अजमेर, झुंझुनू, जैसलमेर,जालौर, डूंगरपुर, बीकानेर, जयपुर,अलवर, सीकर, उदयपुर, राजसमंद,भरतपुर, नागौर, चित्तौडगढ़़, दौसा, चूरू, हनुमानगढ़ और टोंक जिले में इस योजना के अच्छे परिणाम सामने आए। सालों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित वेटरनरी संस्थानों को भामाशाहों ने मदद की। इन जिलों में भी सबसे अच्छे परिणाम चित्तौडगढ़़ में देखने को मिले। कोटा में मल्टीपरपस वेटरनरी अस्पताल के साथ ही जॉइंट डायरेक्टर आफिस की दशा में सुधार हुआ तो बूंदी में मल्टीपरपस वेटरनरी अस्पताल के साथ ही पशु चिकित्सा उपकेंद्र की दशा बदली। राजधानी जयपुर की बात करें तो झोटवाड़ा के साथ ही ग्रामीण इलाकों धानक्या, दूदू, बस्सी, हरमाड़ा, शाहपुरा, बेगस,जमवारामगढ़, विराटनगर, बस्सी, रेनवाल, कोटपूतली, बगरू, आमेर, कानोता, तुंगा, तिजारा, खैरथल, राजगढ़, किशनगढ़बास, मुंडावर आदि के प्रथम श्रेणी वेटरनरी सेंटर्स की स्थिति पहले से बेहतर हुई है।
हो रही थी परेशानी
संसाधनों के अभाव में इन संस्थानों में कार्यरत वेटरनरी डॉक्टर्स के साथ ही कार्मिकों और अपने पशुओं का इलाज करवाने के लिए आने वाले पशुपालकों और किसानों को परेशानी होती थी। कहीं बैठने के लिए कुर्सी नहीं थी तो कहीं पंखें तक नहीं थे, यहां तक की कैटलशेड तक नहीं थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। सुविधाएं मिलने से पशुपालक भी अस्पताल की ओर आने लगे हैं।
इनका कहना है,
वेटरनरी संस्थानों की दशा को सुधारने के लिए हमने एक माह के लिए मेरा पशु चिकित्सालय मेरा अभिमान योजना शुरू की थी जिसके सार्थक परिणाम देखने का मिले हैं। संस्थान विहिन इन संस्थानों में भामाशाहों ने बढ़चढ़ कर मदद की है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, निदेशक,
एनिमल हसबैंड्री डिपार्टमेंट

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