बसपा विधायकों के विलय पर नया मोड, स्पीकर ने विलय का आदेश प्रशासनिक बताया

सुप्रीम कोर्ट—6 विधायकों की वोटिंग पर रोक नहीं, लेकिन परिणाम याचिका के अधीन, हाईकोर्ट में आज फिर सुनवाई

By: KAMLESH AGARWAL

Published: 14 Aug 2020, 06:00 AM IST

जयपुर। बहुजन समाज पार्टी के छह विधायकों के कांग्रेस में विलय के मामले में नया मोड आ गया है। हाईकोर्ट में विधानसभा अध्यक्ष ने इन विधायकों के विलय के आदेश को सिर्फ सदन के लिए प्रशासनिक व्यवस्था बताया है, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने विश्वासमत पर इन विधायकों को मतदान से रोकने से इंकार करते हुए उनके मत पर अदालती निर्णय की तलवार लटका दी है।
इस बीच हाईकोर्ट में गुरुवार को बहस अधूरी रहने पर सुनवाई शुक्रवार सुबह 10.30 बजे तक टाल दी, वहीं सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सोमवार तक टाल दी गई।
हाईकोर्ट में न्यायाधीश महेन्द्र गोयल ने गुरुवार सुबह 10.30 बजे सुनवाई शुरु की। विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बहस की शुरुआत की, जो आधे दिन का कार्यदिवस होने से अधूरी रही।
सिब्बल : विधानसभा अध्यक्ष ने केवल विधायकों के सदन में बैठने की व्यवस्था दी है। इसका मतलब यह नहीं है कि अध्यक्ष ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दे दी है। विलय का यह आदेश केवल प्रशासनिक व्यवस्था है। इस संबंध में अध्यक्ष को कोई पत्र देता है ओर वह शत प्रतिशत विधायकों की सहमति से हो, तो विधानसभा अध्यक्ष उस पर आपत्ति नहीं कर सकता। इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष ने न्यायिक प्राधिकरण की तरह काम नहीं किया है। इसलिए न्यायालय को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। ऐसे मामले में संविधान की 10 वीं अनुसूची के तहत आपत्ति आने पर ही विधानसभा अध्यक्ष सदस्यता पर फैसला कर सकता है। फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष इन विधायकों की सदस्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं। अध्यक्ष के अंतरिम आदेश पर न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती। गोवा और मणिपुर के मामले में कोर्ट ने पहले मामला स्पीकर के पास ले जाने के आदेश दिए थे। ऐसे में अदालत को मामले का विस्तार अनुच्छेद 226 में करते हुए सुनवाई से बचना चाहिए, क्योंकि इस तरह के मामले में कोर्ट का क्षेत्राधिकार सीमित है। उन्होंने करीब 50 मिनट तक पक्ष रखा।
विधायकों की बहस शुरु: बसपा से चुनाव जीते विधायक लाखन सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने करीब डेढ़ घंटे तक पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने एक न्यायिक प्राधिकरण की तरह फैसला लिया ही नहीं है यह एक प्रशासनिक व्यवस्था का फैसला है। जब तक मेरिट पर अध्यक्ष फैसला नहीं लेते हैं न्यायालय को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची और अध्यक्ष की शक्तियों की जानकारी देते हुए विलय को सही करार दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता धवन के बाद विधायक राजेन्द्र सिंह गुढा व दीपचंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिदृधार्थ लूथरा ने बहस शुरु की, लेकिन तब कोर्ट का सुनवाई का समय पूरा हो गया। इस पर हाईकोर्ट ने लूथरा की बहस जारी रखते हुए शुक्रवार सुबह 10.30 बजे तक सुनवाई टाल दी।

जैन ने सिब्बल को टोका
भाजपा विधायक मदन दिलावर के अधिवक्ता सतपाल जैन ने सिब्बल की बहस लंबी चलती देखकर बीच में टोका और कहा कि आज अदालत की कार्रवाई एक बजे तक है ऐसे में सभी को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। इस पर सिब्बल ने जवाब दिया कि मंगलवार सुबह आपने हाईकोर्ट की सुनवाई नहीं टलवाई होती, तो समय की दिक्कत नहीं होती।

धवन पर ली चुटकी

गुरुवार को जब वरिष्ठ अ धिवक्ता राजीव धवन पक्ष रख रहे थे तो किताबें और दस्तावेज लेने के लिए वे बायीं ओर झुक रहे थे। इस वजह से वे कैमरे से आउट हो रहे थे इस पर न्यायाधीश गोयल ने चुटकी लेते हुए कहा कि मिस्टर धवन यह तकनीकी खामी है या आप जानबूझकर कर रहे हैं। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे मंगलवार की सुनवाई के दौरान का बताया जा रहा है। उसमें धवन सुनवाई के दौरान कागज की आड में धुम्रपान करते दिखाई दे रहे हैं।

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