प्रवासी मजदूरों की पीडा पर कोर्ट अब भी रहा चुप तो यह कोर्ट की असफलता होगी—आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट

(Kids) बच्चों और सामान के साथ हजारों किलोमीटर (walking) पैदल चल रहे (Migrant Labour) प्रवासी मजदूरों की (suffering) पीडा पर (Andhra Pradesh HC) आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोर्ट ने अब भी कुछ नहीं किया तो यह कोर्ट का (protector of suffering) पीडितों की रक्षा करने में (Fail) फेल होना होगा।

By: Mukesh Sharma

Published: 16 May 2020, 08:23 PM IST

जयपुर
(Kids) बच्चों और सामान के साथ हजारों किलोमीटर (walking) पैदल चल रहे (Migrant Labour) प्रवासी मजदूरों की (suffering) पीडा पर (Andhra Pradesh HC) आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोर्ट ने अब भी कुछ नहीं किया तो यह कोर्ट का (protector of suffering) पीडितों की रक्षा करने में (Fail) फेल होना होगा। कोर्ट ने पैदल चल रहे मजदूरों के लिए केन्द्र और राज्य सरकार को कई निर्देश जारी किए हैं।
मजदूरों के दम पर खुशहाल हैं हम—
कोर्ट ने कहा है कि बेहतर जीवन की तलाश में शहरों में आने वाले और हमें खुशहाल जीवन देने वाले मजदूर आज सडकों पर हैं। सडकों पर चल रहे यह मजदूर अलग—अलग काम करते हैं और इन्हीं के कारण हम आरामदायक और खुशहाल जीवन जीते हैं। इसलिए यदि इस स्थिति में भी यदि कोर्ट ने प्रतिक्रिया नहीं दी और तो यह पीडितों के संरक्षक के तौर पर अपनी भुमिका में फेल होना होगा। यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन जीने के अधिकार के तहत है और मजदूरों को अधिक सहायता की जरुरत है विशेषकर तब जबकि वह किसी की दया पर रहने के स्थान पर गर्व से पैदल अपने घरों को वापिस जा रहे हैं।
यह दिए हैं निर्देश—
कोर्ट ने हाईवे पर प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था करने, मजदूरों को चैकपोस्ट पर पीने का पानी,ओरल डिहाईड्रेशन साल्ट,ग्लूकोज के पैकेट दिए जाएं,महिलाओं के लिए अस्थाई और साफ टायलेट बनाए जाएं,सैनेटरी पैड वेडिंग मशीन लगाई जाएं,एनएचएआई और पुलिस मजदूरों को नजदीकी शैल्टर होम पहुंचाएं और उन्हें सरकारी बसों या ट्रेन से जाने के लिए समझाएं,सभी पुलिस और राजस्व अधिकारी मजदूरों को नजदीकी शैल्टर होम की जानकारी देते रहें,हिन्दी और तेलुगू में पैम्फलेट छपवाकर नजदीकी शैल्टर होम और आपात स्थिति के लिए फोन नंबर बताए जाएं,शैल्टर होम में सोश्यिल डिस्टेसिंग सुनिश्चित हो,सभी किस्म की मेडिकल सुविधाएं दी जाएं,शैल्टर होम की देखभाल के लिए तहसीलदार और डीएसपी रैंक के अफसर लगाए जाएं,जरुरत होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण,पैरा लीगल वॉलेंटियर सहित अन्य संस्थाओं की मदद भी ली जाए।
मद्रास हाईकोर्ट ने भी लिया स्व:प्रेरित प्रसंज्ञान—
मद्रास हाईकोर्ट ने भी लाखों मजदूरों के हाईवे पर पैदल चलने के मामले में स्व:प्रेरित प्रसंज्ञान लिया है। कोर्ट ने केन्द्र और राज्य सरकार से मजदूरों की सहायता के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।
कोर्ट ने कहा कि यह देखना बेहद करुणाजनक है कि मजदूर अपने घरों तक पहुंचने के लिए हजारों किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। इस दौरान कई मजदूरों को एक्सीडेंट में अपनी जान तक गंवानी पडी है। सभी राज्यों की सरकारों को इस संबंध में इन मजदूरों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए था।
कर्नाटक और गुजरात हाईकोर्ट ने भी दिए हैं निर्देश—
इसी सप्ताह कर्नाटक हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि कोई भी मजदूर किराया नहीं देने के कारण अपने घर जाने से वंचित ना रहे। गुजरात हाईकोर्ट ने भी स्व:प्रेरित प्रसंज्ञान लेकर कहा है कि लॉक डाउन के कारण मजदूर भूखे प्यासे चल रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा हम कैसे रोक सकते हैं—
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के संबंध में याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए मौखिक तौर पर कहा कि कोर्ट मजदूरों को चलने से कैसे रोक सकता है और कोर्ट के लिए इस बात की मॉनिटरिंग करना मुश्किल है कि कौन पैदल चल रहा है और कौन नहीं।

Mukesh Sharma
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