तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री ने केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को लिखा पत्र


प्रोफेसर कुहार समिति की सिफारिशों में संशोधन करने का अनुरोध
या परीक्षा का निर्णय राज्य सरकारों के विवेक पर छोडऩे का अनुरोध
लगातार बढ़ रहा कोरोना का संक्रमण
सितंबर में परीक्षा करवाना मुश्किल काम
सभी विवि और कॉलेजों में नहीं है कम्प्यूटर लेपटॉप की सुविधा
ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के पास नहीं इंटरनेट

By: Rakhi Hajela

Published: 05 Aug 2020, 09:00 PM IST


तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री डॉक्टर सुभाष गर्ग ने केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय स्तरीय परीक्षाओं के आयोजन के संबंध में प्रोफेसर कुहार समिति की सिफारिशों में जनहित में उचित संशोधन करने अथवा इस संबंध में राज्य सरकारों के विवेक पर निर्णय छोड़ने का आग्रह किया है। उन्होंने अपने पत्र में विश्वविद्यालय स्तरीय परीक्षाओं का आयोजन ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन नहीं करवाने के संबंध में तर्क देते हुए कहा है कि देश में प्रतिदिन चालीस हजार से ज्यादा नए कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं। इसी प्रकार राजस्थान में भी नौ सौ से एक हजार कोरोना पॉजिटिव रोजाना आ रहे हैं। प्रतिदिन कोरोना मरीजों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए हमारा मुख्य लक्ष्य आम लोगों की जान बचाना है। एेसे में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों की ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन परीक्षाएं करवाया जाना कोविड.19 के संक्रमण को खतरनाक रूप में बढ़ा सकता है।
कम्प्यूटर, लेपटॉप की व्यवस्था नहीं
डॉक्टर गर्ग ने अपने पत्र में कहा है ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी लॉकडाउन.1 के चलते अपने.अपने घर जा चुके हैं। जिनके घरों की दूरी 100किमी से लेकर 500किमी तक हो सकती है। परिवहन गतिविधियां सामान्य रूप में संचालित नहीं हो रही हैं। 50 से 60 प्रतिशत विद्यार्थी गांवों में रहते हैं जहां इंटरनेट की सुविधा सुचारू रूप में नहीं है, विद्यार्थियों के पास कम्प्यूटर एवं लेपटॉप जैसे संसाधन भी नहीं हैं। ऑनलाइन परीक्षाएं करवाने के लिए ज्यादातर विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कम्प्यूटर एवं लेपटॉप की पूरी तरह व्यवस्था नहीं है। उन्होंने लिखा है कि देश और प्रदेश में अगस्त एवं सितम्बर में मानसून के कारण बाढ़ आदि के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान एवं महाविद्यालय तक आवागमन कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि ऎसी परिस्थितियों में विद्यार्थियों के पिछले वर्ष के प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन कर परिणाम घोषित किया जाना विद्यार्थियों के हित में होगा, जिससे वे समय पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अथवा रोजगार ढूंढने के कार्य को कर सकेंगे।
बढ़ते संक्रमण में परीक्षा करवाना मुश्किल कार्य
उन्होंने कहा कि बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सितंबर में परीक्षाएं आयोजित करवाया जाना बहुत मुश्किल कार्य है। राज्य सरकार ने विभिन्न विश्वविद्यालयों के उपकुलपतियों और कई जाने.माने शिक्षाविदों, महाविद्यालयों के प्राचार्यों आदि से चर्चा की है। राज्य सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि वर्तमान में परीक्षाओं का आयोजन नहीं करवाया जाना चाहिए। यदि विद्यार्थी अपने प्रदर्शन सुधार चाहते हैं तो उन्हें सामान्य परिस्थितियां होने पर परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाएगा।
तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री ने अपने पत्र में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को लिखा कि पत्र में वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि प्रोफेसर कुहार समिति की सिफारिशों का पुनर्मूल्यांकन कर वृहद् जनहित को ध्यान में रखते हुए उसमें आवश्यक संशोधन किया जाए या फिर उपयुक्त निर्णय लेने के लिए इसे राज्य सरकारों के विवेक पर छोड़ दिया जाए।

Rakhi Hajela Desk
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